{"_id":"5b7b0ce142c792465704157f","slug":"153479087120-ambedkar-nagar-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"बाढ़ प्रभावित क्षेत्र में जान जोखिम में डाल स्कूल जाने को विवश हैं बच्चे","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
बाढ़ प्रभावित क्षेत्र में जान जोखिम में डाल स्कूल जाने को विवश हैं बच्चे
Updated Tue, 21 Aug 2018 12:18 AM IST
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टांडा/राजेसुल्तानपुर (अंबेडकरनगर)। सरयू नदी की बाढ़ ने टांडा व आलापुर तहसील क्षेत्र में लगभग डेढ़ दर्जन गांव के ग्रामीणों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। आलापुर में छात्र छात्राओं को जान जोखिम में डालकर नाव से स्कूल आने जाने को विवश होना पड़ रहा है। छोटी सी नाव में क्षमता से अधिक बच्चों को आने जाने की मजबूरी बनी हुई है। इस बीच प्रशासन ने दोनों तहसील क्षेत्र के लगभग 1300 परिवारों को राहत सामग्री प्रदान किया। सांसद हरिओम पाण्डेय, टांडा विधायक संजू देवी तथा आलापुर विधायक अनीता कमल ने ग्रामीणों को राहत सामग्री सौंपी। भरोसा दिलाया कि किसी अन्य तरह की जरूरत महसूस हुई तो वह भी पूरी कराई जाएगी। इस बीच नदी का जलस्तर खतरे के निशान से 58 सेंटीमीटर ऊपर बना हुआ है।
सरयू नदी के जलस्तर ने टांडा व आलापुर तहसील क्षेत्र केे दर्जन भर गांवों में हड़कंप मचा रखा है। दरअसल नदी का पानी खतरे के निशान से काफी ऊपर चल रहा है। एक तरफ जहां टांडा तहसील अन्तर्गत माझा उल्टहवा के सात पुरवे तक पानी पहुंच गया है, वहीं माझा कम्हरिया के नौ पुरवों तक भी सरयू के पानी ने पहुंच बना ली है। नतीजा यह है कि इन पुरवों के लोगों को आवागमन से लेकर पशुओं के चारे तक में खासी दिक्कत हो रही है। राजेसुल्तानपुर प्रतिनिधि ने हालात का जायजा लेने के लिए सोमवार को क्षेत्र का दौरा किया तो आराजी देवारा गांव के हंसू का पूरा में जान जोखिम में डालकर छात्र-छात्राएं स्कूल जाते दिखे। यहां एक छोटी सी नाव पर कुल 15 बच्चे सवार थे। एक नाविक के अलावा एक अन्य ग्रामीण भी उसमें मौजूद था। बच्चों की संख्या ज्यादा होने के चलते नाव से कभी भी हादसा होने की संभावना बनी हुई थी। स्थानीय ग्रामीण दिवाकर ने कहा कि पर्याप्त नाव उपलब्ध नही है। इसके चलते ही इस तरह से एक नाव में ज्यादा लोगों को आने जाने की विवशता बनी हुई है।
टांडा प्रतिनिधि के अनुसार सरयू नदी का जलस्तर अभी भी खतरे के निशान से 58 सेंटीमीटर ऊपर है। माझा उल्टहवा ग्राम पंचायत के पुरवों में अभी भी पानी बना हुआ है। ग्रामीणों का सड़क मार्ग से संपर्क कटा है। नाव से ही आवागमन करने की मजबूरी बनी हुई है। यहां प्रशासन ने कुल 13 नाव लगा रखी है। एक नाव ग्राम सभा की तरफ से ग्रामीणों की मदद में जुटी है।
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1300 परिवारों को दी गई मदद
टांडा प्रतिनिधि के अनुसार सांसद हरिओम पांडेय, विधायक संजू देवी, एसडीएम पंकज सिंह व तहसीलदार मेवालाल आदि ने माझा उल्टहवा गांव के बंधे पर पहुंचकर 588 परिवारों को राहत सामग्री का वितरण किया। इसमें 10-10 किलो आटा व चावल के अलावा दो किलो दाल, पांच लीटर मिट्टी का तेल, 10 किलो आलू, 10 पैकेट बिस्कुट, पांच किलो लाई, दो किलो भुना चना, धनिया मिर्चा व माचिस आदि शामिल था। राजेसुल्तानपुर प्रतिनिधि के अनुसार विधायक अनीता कमल, भाजपा नेता अवधेश कमल व अभिषेक तिवारी आदि ने तहसील प्रशासन की मौजूदगी में 700 परिवारों को राहत सामग्री सौंपी। जनप्रतिनिधियों ने ग्रामीणों को भरोसा दिलाया कि आगे और कोर्ई जरूरत महसूस होती है तो वह भी मुहैया कराई जाएगी।
आगे भी होगी मदद
टांडा व आलापुर के बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में ग्रामीणों की जरूरी मदद सोमवार को की गई है। गुणवत्तापूर्ण राहत सामग्री उपलब्ध कराई गई है। नदी का पानी घट रहा है। आगे कोई और जरूरत हुई तो वह भी पूरी कराई जाएगी। -सुरेश कुमार, डीएम
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सरयू नदी के जलस्तर ने टांडा व आलापुर तहसील क्षेत्र केे दर्जन भर गांवों में हड़कंप मचा रखा है। दरअसल नदी का पानी खतरे के निशान से काफी ऊपर चल रहा है। एक तरफ जहां टांडा तहसील अन्तर्गत माझा उल्टहवा के सात पुरवे तक पानी पहुंच गया है, वहीं माझा कम्हरिया के नौ पुरवों तक भी सरयू के पानी ने पहुंच बना ली है। नतीजा यह है कि इन पुरवों के लोगों को आवागमन से लेकर पशुओं के चारे तक में खासी दिक्कत हो रही है। राजेसुल्तानपुर प्रतिनिधि ने हालात का जायजा लेने के लिए सोमवार को क्षेत्र का दौरा किया तो आराजी देवारा गांव के हंसू का पूरा में जान जोखिम में डालकर छात्र-छात्राएं स्कूल जाते दिखे। यहां एक छोटी सी नाव पर कुल 15 बच्चे सवार थे। एक नाविक के अलावा एक अन्य ग्रामीण भी उसमें मौजूद था। बच्चों की संख्या ज्यादा होने के चलते नाव से कभी भी हादसा होने की संभावना बनी हुई थी। स्थानीय ग्रामीण दिवाकर ने कहा कि पर्याप्त नाव उपलब्ध नही है। इसके चलते ही इस तरह से एक नाव में ज्यादा लोगों को आने जाने की विवशता बनी हुई है।
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टांडा प्रतिनिधि के अनुसार सरयू नदी का जलस्तर अभी भी खतरे के निशान से 58 सेंटीमीटर ऊपर है। माझा उल्टहवा ग्राम पंचायत के पुरवों में अभी भी पानी बना हुआ है। ग्रामीणों का सड़क मार्ग से संपर्क कटा है। नाव से ही आवागमन करने की मजबूरी बनी हुई है। यहां प्रशासन ने कुल 13 नाव लगा रखी है। एक नाव ग्राम सभा की तरफ से ग्रामीणों की मदद में जुटी है।
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1300 परिवारों को दी गई मदद
टांडा प्रतिनिधि के अनुसार सांसद हरिओम पांडेय, विधायक संजू देवी, एसडीएम पंकज सिंह व तहसीलदार मेवालाल आदि ने माझा उल्टहवा गांव के बंधे पर पहुंचकर 588 परिवारों को राहत सामग्री का वितरण किया। इसमें 10-10 किलो आटा व चावल के अलावा दो किलो दाल, पांच लीटर मिट्टी का तेल, 10 किलो आलू, 10 पैकेट बिस्कुट, पांच किलो लाई, दो किलो भुना चना, धनिया मिर्चा व माचिस आदि शामिल था। राजेसुल्तानपुर प्रतिनिधि के अनुसार विधायक अनीता कमल, भाजपा नेता अवधेश कमल व अभिषेक तिवारी आदि ने तहसील प्रशासन की मौजूदगी में 700 परिवारों को राहत सामग्री सौंपी। जनप्रतिनिधियों ने ग्रामीणों को भरोसा दिलाया कि आगे और कोर्ई जरूरत महसूस होती है तो वह भी मुहैया कराई जाएगी।
आगे भी होगी मदद
टांडा व आलापुर के बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में ग्रामीणों की जरूरी मदद सोमवार को की गई है। गुणवत्तापूर्ण राहत सामग्री उपलब्ध कराई गई है। नदी का पानी घट रहा है। आगे कोई और जरूरत हुई तो वह भी पूरी कराई जाएगी। -सुरेश कुमार, डीएम