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किडनी देकर बचाई जान, तो पति की मौत के बाद भी नहीं हारी हिम्मत
Updated Sat, 12 May 2018 10:04 PM IST
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अंबेडकरनगर। मां की ममता एवं विशाल हृदय का वाकई कोई और उदाहरण देखने को नहीं मिलता। कई प्रतिकूल परिस्थितियों में भी माताओं ने अपनी दृढ़ इच्छाशक्ति के बूते परिवार को नई राह दिखाई है। उनके जज्बे के चलते परिवार में फिर से खुशहाली देखने को मिली है। रविवार 13 मई को मदर्स डे है। प्रत्येक वर्ष मई माह के दूसरे रविवार को मदर्स डे मनाया जाता है। इसे देखते हुए ही अमर उजाला टीम ने ऐसे परिवार की महिलाओं को सामने लाने का प्रयास किया, जिन्होंने मां की ममता का अद्वितीय उदाहरण समाज के सामने प्रस्तुत किया। इनमें अहिरौली थाने की उस महिला सिपाही प्रियांशु वर्मा का उल्लेख करना भी जरूरी हो जाता है, जिसने गत दिवस ही ड्यूटी के दौरान एक दिवंगत महिला के नवजात बच्चे को सीने से चिपकाकर अपने ममत्व के चलते पूरे जिले में वाहवाही बटोरी थी। इस महिला को बाद में एसपी संतोष कुमार मिश्र ने सम्मानित भी किया था। अमर उजाला टीम ने समाज की कुछ चुनिंदा मामलों का अध्यन किया, जिनमें दो मामले उल्लेखनीय रूप से सामने आए-
किडनी देकर बचाई इकलौते बेटे की जान
इकलौते बेटी को जिंदगी देने के लिए मां ने अपनी एक किडनी सौंप दी। जलालपुर तहसील अंतर्गत रफीगंज निवासी उमा देवी पत्नी ओंकारनाथ के एकमात्र पुत्र अभिषेक कुमार है। अभिषेक जब 14 वर्ष का था, तब उसकी दोनों किडनी खराब हो चुकी थीं। इकलौता पुत्र होने के चलते मां व पिता सन्न रह गए थे। पुत्र की जान बचाने के लिए उसे किडनी की आवश्यकता थी। मां की ममता ने यहां संवेदना का ज्वार उत्पन्न किया। अपने इकलौते पुत्र को जिंदगी देने के लिए उसने एक किडनी सौंपने का निर्णय लिया। 29 अक्तूबर 2010 को पीजीआई लखनऊ में सफल ऑपरेशन हुआ। मौजूदा समय में उमा व उसका पुत्र अभिषेक दोनों पूरी तरह स्वस्थ हैं। अभिषेक अपने पिता के बिजनेस में हाथ बंटा रहा है। उसके पिता की रफीगंज बाजार में हार्डवेयर की दुकान है। उमा देवी ने अमर उजाला से बातचीत में कहा कि उसके सिर्फ एक पुत्र है। घर के चिराग को बचाने के लिए उसने अपनी जिंदगी की परवाह नहीं की और एक किडनी दान कर दी।
पति की मौत के बाद संभाली बच्चों की परवरिश
बाढ़ में पति की मौत के बाद हिम्मत न हारने वाली महिला अपनी जिम्मेदारी का निर्वहन करते हुए चार बच्चों का लालन-पालन कर रही है। भीटी तहसील अंतर्गत अढ़नपुर निवासी रामसूरत मुंबई में रहकर नौकरी करता था। 26 जुलाई 2005 को मुंबई में आई बाढ़ के दौरान रामसूरत की मौत हो गई। उसकी मौत के बाद तीन पुत्रियों व एक पुत्र की जिम्मेदारी उसकी पत्नी उर्मिला पर आ गई। उर्मिला ने हौसला नहीं खोया। बच्चों की जिंदगी संवारने का उसने बीड़ा उठाया। वह मुंबई से गांव आ गई। इसके लिए अढ़नपुर बाजार में उसने मूंगफली व रामदाना का ठेला लगाना शुरू कर दिया। बच्चों के बेहतर लालन पालन के साथ ही उनकी शिक्षा पर भी उसने पूरा जोर दिया। बड़ी पुत्री विजयकांति को बीए कराने के बाद उसका विवाह कर दिया। दूसरी पुत्री प्रेमसी इंटर पास कर चुकी है तो तीसरी पुत्री महिमा कक्षा 12 की छात्रा है, जबकि पुत्र कक्षा नौ का छात्र है। उर्मिला ने कहा कि उसने कभी अपने बच्चों को पिता की कमी नहीं खलने दी। मां व पिता दोनों का प्यार अपने बच्चों को दिया। अब उसका बस एक ही सपना है कि बेटा कुलदीप पढ़-लिखकर कुछ बन जाए।
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किडनी देकर बचाई इकलौते बेटे की जान
इकलौते बेटी को जिंदगी देने के लिए मां ने अपनी एक किडनी सौंप दी। जलालपुर तहसील अंतर्गत रफीगंज निवासी उमा देवी पत्नी ओंकारनाथ के एकमात्र पुत्र अभिषेक कुमार है। अभिषेक जब 14 वर्ष का था, तब उसकी दोनों किडनी खराब हो चुकी थीं। इकलौता पुत्र होने के चलते मां व पिता सन्न रह गए थे। पुत्र की जान बचाने के लिए उसे किडनी की आवश्यकता थी। मां की ममता ने यहां संवेदना का ज्वार उत्पन्न किया। अपने इकलौते पुत्र को जिंदगी देने के लिए उसने एक किडनी सौंपने का निर्णय लिया। 29 अक्तूबर 2010 को पीजीआई लखनऊ में सफल ऑपरेशन हुआ। मौजूदा समय में उमा व उसका पुत्र अभिषेक दोनों पूरी तरह स्वस्थ हैं। अभिषेक अपने पिता के बिजनेस में हाथ बंटा रहा है। उसके पिता की रफीगंज बाजार में हार्डवेयर की दुकान है। उमा देवी ने अमर उजाला से बातचीत में कहा कि उसके सिर्फ एक पुत्र है। घर के चिराग को बचाने के लिए उसने अपनी जिंदगी की परवाह नहीं की और एक किडनी दान कर दी।
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पति की मौत के बाद संभाली बच्चों की परवरिश
बाढ़ में पति की मौत के बाद हिम्मत न हारने वाली महिला अपनी जिम्मेदारी का निर्वहन करते हुए चार बच्चों का लालन-पालन कर रही है। भीटी तहसील अंतर्गत अढ़नपुर निवासी रामसूरत मुंबई में रहकर नौकरी करता था। 26 जुलाई 2005 को मुंबई में आई बाढ़ के दौरान रामसूरत की मौत हो गई। उसकी मौत के बाद तीन पुत्रियों व एक पुत्र की जिम्मेदारी उसकी पत्नी उर्मिला पर आ गई। उर्मिला ने हौसला नहीं खोया। बच्चों की जिंदगी संवारने का उसने बीड़ा उठाया। वह मुंबई से गांव आ गई। इसके लिए अढ़नपुर बाजार में उसने मूंगफली व रामदाना का ठेला लगाना शुरू कर दिया। बच्चों के बेहतर लालन पालन के साथ ही उनकी शिक्षा पर भी उसने पूरा जोर दिया। बड़ी पुत्री विजयकांति को बीए कराने के बाद उसका विवाह कर दिया। दूसरी पुत्री प्रेमसी इंटर पास कर चुकी है तो तीसरी पुत्री महिमा कक्षा 12 की छात्रा है, जबकि पुत्र कक्षा नौ का छात्र है। उर्मिला ने कहा कि उसने कभी अपने बच्चों को पिता की कमी नहीं खलने दी। मां व पिता दोनों का प्यार अपने बच्चों को दिया। अब उसका बस एक ही सपना है कि बेटा कुलदीप पढ़-लिखकर कुछ बन जाए।
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