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नहीं खर्च हो पाई गावों के विकास पर साढ़े 7 करोड़ की धनराशि
Updated Wed, 28 Mar 2018 10:48 PM IST
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अंबेडकरनगर। 14वें वित्त योजना आयोग के तहत 927 गावों के विकास के लिए भेजी गई 19 करोड़ 35 लाख रुपये राशि के सापेक्ष लगभग साढ़े सात करोड़ रुपये की राशि अब तक खर्च ही नहीं की जा सकी है। इतना ही नहीं, जो राशि विकास कार्यों में खर्च भी की गई है, उसका उपभोग प्रमाणपत्र एक भी ग्राम पंचायत द्वारा विभाग या पोर्टल को नहीं उपलब्ध कराया जा सका है। अब जबकि वित्तीय वर्ष समाप्त होने में मात्र तीन दिन ही शेष रह गए हैं, तो ऐसे में शेष बची धनराशि का उपयोग कहां और किस प्रकार किया जा सकेगा, इसका अंदाजा सहज ही लगाया जा सकता है।
गौरतलब है कि गावों में विकास कार्य के लिए 14वें वित्त आयोग के तहत ग्राम पंचायतों में आवश्यकतानुसार राशि उपलब्ध कराई जाती है। वित्तीय वर्ष 2017-18 में भी योजना के तहत जिले के 927 ग्राम पंचायतों में विकास के लिए ग्राम प्रधान व ग्राम सचिव के संयुक्त खाते में कुल 19 करोड़ 35 लाख रुपये की राशि उपलब्ध करा दी गई थी। इसके तहत गांव में नाली निर्माण, मार्ग प्रकाश, सड़क निर्माण, पेयजल, हैंडपंप की मरम्मत, खड़ंजा निर्माण समेत अन्य कई प्रकार के विकास कार्य कराए जाते हैं। विकास कार्य के लिए ग्राम पंचायत समिति की खुली बैठक होती है। इसमें आने वाले प्रस्ताव को मंजूरी मिलने के बाद विकास कार्य कराया जाता है। योजना के तहत ग्राम पंचायतों में विकास कार्य को लेकर ग्राम प्रधान व ग्राम सचिव कितना गंभीर रहे, इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि अभी भी लगभग साढ़े सात करोड़ रुपये की राशि खर्च ही नहीं की जा सकी है।
और तो और जो राशि विकास कार्यों के नाम पर खर्च भी की गई है, उसका उपभोग प्रमाणपत्र एक भी ग्राम पंचायत द्वारा विभाग या पोर्टल को नहीं उपलब्ध कराया जा सका है। ऐसा तब है, जबकि लगभग डेढ़ माह पूर्व तत्कालीन सीडीओ ने निर्देश जारी किया था कि जो राशि खर्च की गई है, उसका उपभोग प्रमाणपत्र तत्काल विभाग को उपलब्ध कराया जाए। अब जबकि वित्तीय वर्ष समाप्त होने में मात्र तीन दिन का समय शेष रह गया है, तो ऐसे में शेष बची धनराशि को कहां और किस प्रकार खर्च की जा सकेगी, इसका अंदाजा सहज ही लगाया जा सकता है।
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एक सचिव पर कई ग्राम पंचायतों का है भार
14वें वित्त आयोग के तहत ग्राम पंचायतों में विकास की गति न बढ़ने का मुख्य कारण एक एक सचिव पर कई कई गांवों की जिम्मेदारी है। विभागीय आंकड़ों के अनुसार एक एक ग्राम सचिव के जिम्मे आठ से 10 गांवों की जिम्मेदारी है। भार अधिक होने के चलते ही सचिव द्वारा विकास कार्यों पर ध्यान नहीं दिया जाता है।
दिए गए हैं निर्देश
14वें वित्त आयोग के तहत विकास कार्यों के लिए ग्राम पंचायतों को दी गई राशि का उपभोग प्रमाणपत्र प्रस्तुत करने के लिए संबंधित सचिव को निर्देश दिए गए हैं। -मयाशंकर मिश्र, डीपीआरओ
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गौरतलब है कि गावों में विकास कार्य के लिए 14वें वित्त आयोग के तहत ग्राम पंचायतों में आवश्यकतानुसार राशि उपलब्ध कराई जाती है। वित्तीय वर्ष 2017-18 में भी योजना के तहत जिले के 927 ग्राम पंचायतों में विकास के लिए ग्राम प्रधान व ग्राम सचिव के संयुक्त खाते में कुल 19 करोड़ 35 लाख रुपये की राशि उपलब्ध करा दी गई थी। इसके तहत गांव में नाली निर्माण, मार्ग प्रकाश, सड़क निर्माण, पेयजल, हैंडपंप की मरम्मत, खड़ंजा निर्माण समेत अन्य कई प्रकार के विकास कार्य कराए जाते हैं। विकास कार्य के लिए ग्राम पंचायत समिति की खुली बैठक होती है। इसमें आने वाले प्रस्ताव को मंजूरी मिलने के बाद विकास कार्य कराया जाता है। योजना के तहत ग्राम पंचायतों में विकास कार्य को लेकर ग्राम प्रधान व ग्राम सचिव कितना गंभीर रहे, इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि अभी भी लगभग साढ़े सात करोड़ रुपये की राशि खर्च ही नहीं की जा सकी है।
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और तो और जो राशि विकास कार्यों के नाम पर खर्च भी की गई है, उसका उपभोग प्रमाणपत्र एक भी ग्राम पंचायत द्वारा विभाग या पोर्टल को नहीं उपलब्ध कराया जा सका है। ऐसा तब है, जबकि लगभग डेढ़ माह पूर्व तत्कालीन सीडीओ ने निर्देश जारी किया था कि जो राशि खर्च की गई है, उसका उपभोग प्रमाणपत्र तत्काल विभाग को उपलब्ध कराया जाए। अब जबकि वित्तीय वर्ष समाप्त होने में मात्र तीन दिन का समय शेष रह गया है, तो ऐसे में शेष बची धनराशि को कहां और किस प्रकार खर्च की जा सकेगी, इसका अंदाजा सहज ही लगाया जा सकता है।
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एक सचिव पर कई ग्राम पंचायतों का है भार
14वें वित्त आयोग के तहत ग्राम पंचायतों में विकास की गति न बढ़ने का मुख्य कारण एक एक सचिव पर कई कई गांवों की जिम्मेदारी है। विभागीय आंकड़ों के अनुसार एक एक ग्राम सचिव के जिम्मे आठ से 10 गांवों की जिम्मेदारी है। भार अधिक होने के चलते ही सचिव द्वारा विकास कार्यों पर ध्यान नहीं दिया जाता है।
दिए गए हैं निर्देश
14वें वित्त आयोग के तहत विकास कार्यों के लिए ग्राम पंचायतों को दी गई राशि का उपभोग प्रमाणपत्र प्रस्तुत करने के लिए संबंधित सचिव को निर्देश दिए गए हैं। -मयाशंकर मिश्र, डीपीआरओ