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जानकारी के अभाव में तेजी से बढ़ रही लोगों में टीबी की बीमारी
Updated Sat, 24 Mar 2018 10:47 PM IST
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अंबेडकरनगर। क्षयरोग के बढ़ते मरीजों के चलते भारत इस समय दुनिया में टीबी रोगियों की सबसे बड़ी संख्या वाला देश बन गया है। लगभग एक लाख मरीजों में 211 नए संक्रमण पाए गए हैं। देश में एमडीआर टीबी रोगियों की संख्या सबसे ज्यादा है। बिना पहचान वाले टीबी रोगियों की संख्या भी कम नहीं है। ऐसे कई लाख मामले हैं, जिनकी पहचान ही नहीं हुई है। न ही इलाज शुरू हुआ। ये लोग अभी तक स्वास्थ्य विभाग के राडार पर भी नहीं हैं। यह बातें विश्व क्षयरोग दिवस के अवसर पर आयोजित गोष्ठी में प्रधानाचार्य डॉ. पीके सिंह ने कही।
महामाया राजकीय एलोपैथिक मेडिकल कॉलेज सद्दरपुर में ‘वांटेड लीडर फॉर ए टीबी फ्री वर्ल्ड’ विषय पर हुई गोष्ठी में डॉ. सिंह ने कहा टीबी संक्रामक बीमारी है। इसका इलाज पूरी अवधि के लिए तय दवाएं सही समय पर लेने से इसे ठीक किया जा सकता है। ड्रग रेजीमैन या दवा के इस पूरे कोर्स को डॉट्स कहा जाता है। इसे राष्ट्रीय टीबी नियंत्रण कार्यक्रम के तहत मुफ्त प्रदान किया जाता है। विभागाध्यक्ष डॉ. अमीरुल हसन ने कहा कि हमारा समाज टीबी जैसी घातक बीमारी के बारे में पर्याप्त जागरूक नहीं है। इसके कारण एक सामान्य सा दिखने वाला यह टीबी का मरीज अनजाने में अपने साथ साथ साल में लगभग 10-15 नए लोगों को टीबी का मरीज बना जाता है। जानकारी व जागरूकता से इससे बचा जा सकता है। पुनरीक्षित राष्ट्रीय क्षय नियंत्रण कार्यक्रम के नोडल अधिकारी डॉ. उमेश वर्मा ने बताया कमजोर लोगों, बुजुर्गों, धूम्रपान करने वालों, स्लम एरिया में रहने वालों तथा फैक्ट्रियों में काम करने वाले लोगों में टीबी होने की अधिक संभावना रहती है। इसके लिए अपने आस पास विशेष रूप से स्वच्छता पर भी ध्यान देना चाहिए। इस मौके पर डॉ. मुकुल सक्सेना, डॉ. राहुल, डॉ. मुकेश राना, डॉ. बृजेश, डॉ. कमलेश, डॉ. रितेश, डॉ. राजेश, डॉ. मनोज, डॉ. लेखा तुली, प्रवीण गुप्त डॉ. सुनील यादव आदि मौजूद रहे।
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महामाया राजकीय एलोपैथिक मेडिकल कॉलेज सद्दरपुर में ‘वांटेड लीडर फॉर ए टीबी फ्री वर्ल्ड’ विषय पर हुई गोष्ठी में डॉ. सिंह ने कहा टीबी संक्रामक बीमारी है। इसका इलाज पूरी अवधि के लिए तय दवाएं सही समय पर लेने से इसे ठीक किया जा सकता है। ड्रग रेजीमैन या दवा के इस पूरे कोर्स को डॉट्स कहा जाता है। इसे राष्ट्रीय टीबी नियंत्रण कार्यक्रम के तहत मुफ्त प्रदान किया जाता है। विभागाध्यक्ष डॉ. अमीरुल हसन ने कहा कि हमारा समाज टीबी जैसी घातक बीमारी के बारे में पर्याप्त जागरूक नहीं है। इसके कारण एक सामान्य सा दिखने वाला यह टीबी का मरीज अनजाने में अपने साथ साथ साल में लगभग 10-15 नए लोगों को टीबी का मरीज बना जाता है। जानकारी व जागरूकता से इससे बचा जा सकता है। पुनरीक्षित राष्ट्रीय क्षय नियंत्रण कार्यक्रम के नोडल अधिकारी डॉ. उमेश वर्मा ने बताया कमजोर लोगों, बुजुर्गों, धूम्रपान करने वालों, स्लम एरिया में रहने वालों तथा फैक्ट्रियों में काम करने वाले लोगों में टीबी होने की अधिक संभावना रहती है। इसके लिए अपने आस पास विशेष रूप से स्वच्छता पर भी ध्यान देना चाहिए। इस मौके पर डॉ. मुकुल सक्सेना, डॉ. राहुल, डॉ. मुकेश राना, डॉ. बृजेश, डॉ. कमलेश, डॉ. रितेश, डॉ. राजेश, डॉ. मनोज, डॉ. लेखा तुली, प्रवीण गुप्त डॉ. सुनील यादव आदि मौजूद रहे।
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