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छोटे कस्बे से बढ़कर तय किया जिला मुख्यालय का दर्जा
Updated Thu, 25 Jan 2018 11:49 PM IST
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अंबेडकरनगर। बीते छह दशक के दौर में अकबरपुर नगर ने एक छोटे कस्बे से बढ़कर जिला मुख्यालय का गौरव हासिल करने की बड़ी उपलब्धि पाई है। न सिर्फ आवागमन व विद्युतीकरण सुविधा में वृद्धि हुई, वरन रहन-सहन से लेकर सामाजिक स्तर तक में काफी परिवर्तन आया। जिला मुख्यालय का दर्जा मिलने के बाद से कई जरूरी सुविधाएं बढ़ीं। इसका लोगों ने बढ़ चढ़कर लाभ भी उठाया। हालांकि विकास के कई बड़े कार्य अभी होने बाकी हैं, लेकिन तब भी आजादी के बाद से अब तक शहर ने काफी प्रगति तय की है। नगर पंचायत की शुरुआत के बाद से अब अकबरपुर को नगर पालिका परिषद का भी दर्जा मिल चुका है।
सड़कों का बिछा जाल
छह दशक पहले जहां अकबरपुर नगर की सड़क मात्र 45 किमी में सिमटी थी, वहीं अब गली मोहल्लों को मिलाकर सड़कों की कुल लंबाई 220 किमी हो गई। नगर क्षेत्र में एनएच निर्माण से विभिन्न जनपद मुख्यालयों की दूरी अकबरपुर नगर से कम हो गई है।
10 से बढ़कर 25 हुए वार्ड
वर्ष 1889 में अकबरपुर को नगर पंचायत का दर्जा मिला। उस समय नगर की आबादी लगभग 5 हजार थी। 25 फरवरी 1975 को नगर पंचायत से नगर पालिका दर्जा मिला। उस समय मात्र 10 वार्ड थे और आबादी थी लगभग 14 हजार। अकबरपुर जो कि एक छोटे से कस्बे के रूप में था, उसे जिला मुख्यालय होने का गौरव प्राप्त हुआ। तेजी से हुए विकास के बीच मौजूदा समय 25 वार्ड हो गए और आबादी बढ़कर हो गई 1 लाख 30 हजार।
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बढ़ी पेयजल की सुविधा
नगर पंचायत से नगर पालिका बनने तक के सफर में अकबरपुर में शुद्ध पेयजल की समुचित व्यवस्था नहीं थी। लोगों को साधारण हैंडपंप, तमसा नदी व कुएं के पानी का प्रयोग करना पड़ता था। आबादी बढ़ी, तो प्रदूषण बढ़ने लगा। इससे शुद्ध पेयजल की समस्या उत्पन्न हो गई। इसे देखते हुए नगर पालिका परिषद द्वारा चार ओवर हेड टैंक की स्थापना कराई गई। साथ ही 10 पंप की भी स्थापना के साथ ही घर घर शुद्ध पानी पहुंचाने के लिए लगभग 25 किमी पाइप का जाल फैलाया गया।
शिक्षा क्षेत्र में आया बड़ा बदलाव
शिक्षा क्षेत्र में अकबरपुर नगर में बड़ा बदलाव आया है। लगभग छह दशक पूर्व नगर में इंटर कॉलेज के नाम पर बीएन इंटर कॉलेज व डॉ. गणेशकृष्ण जेतली इंटर कॉलेज व डिग्री कॉलेज के नाम पर मात्र बीएनकेबी डिग्री कॉलेज ही था। इसके साथ ही इस्लामिया स्कूल का भी संचालन था। बढ़ती आबादी के बीच एक-एक कर विद्यालयों की संख्या बढ़ने लगी। आलम यह है कि मौजूदा समय में 18 प्राथमिक व उच्च प्राथमिक, 22 इंटर कॉलेज व 9 डिग्री कॉलेज संचालित हैं। इसके अलावा 14 मदरसे भी संचालित हो रहे हैं। तकनीकी शिक्षा के लिए पालीटेकिभनक, राजकीय इंजीनियरिंग कॉलेज व कृषि इंजीनियरिंग कॉलेज का भी संचालन लंबे समय से हो रहा है।
विद्युतीकरण में हुआ बड़ा सुधार
शुरुआत में मरैला मिल के निकट विद्युत सबस्टेशन की स्थापना थी, जिससे अकबरपुर नगर को विद्युत सप्लाई की जाती थी। समय के साथ इसमें बदलाव आया। पहले अकबरपुर नगर में विद्युत उपकेंद्र की स्थापना हुई, इसके बाद एक एक कर दो नए सब स्टेशनों की स्थापना हुई। इसके अलावा जहां पहले खुले तार से विद्युत सप्लाई की जाती थी, वहीं अब इसके स्थान पर केबिल लगाई गई है।
स्वास्थ्य क्षेत्र में आई बड़ी क्रांति
अकबरपुर में पूर्व में मात्र एक सरकारी अस्पताल डॉ. गणेशकृष्ण जेतली प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र की स्थापना थी, वहीं अब जिला अस्पताल के अलावा आयुर्वेदिक, होमियोपैथिक, यूनानी, टीबी अस्पताल आदि का तोहफा अकबरपुर नगर को मिला। इससे मरीजों को इलाज में इधर उधर की भागदौड़ से राहत मिली।
कस्बा चौकी से तय किया कप्तान कार्यालय तक का सफर
पूर्व में अकबरपुर नगर में मात्र एक पुलिस चौकी की स्थापना थी। यहां एक दरोगा व कुछ सिपाही ही तैनात थे। समय का पहिया घूमा कि न सिर्फ कोतवाली की स्थापना हुई, बल्कि जिला बनने के बाद एसपी कार्यालय भी संचालित हुआ। इसके अलावा पुलिस लाइन, एलआईयू व फायर स्टेशन जैसे महत्वपूर्ण विभाग भी संचालित होने लगे।
यातायात की हुई समुचित व्यवस्था
छह दशक से अधिक के समय अंतराल में अकबरपुर नगर में वाहनों की संख्या में व्यापक वृद्धि हुई। देश की आजादी के बाद अकबरपुर बस स्टेशन की स्थापना हुई, तो बसों की संख्या 2 से बढ़कर 52 हो गईं। अकबरपुर रेलवे स्टेशन की स्थापना आजादी से पहले जरूर हुई थी, लेकिन यहां मात्र एक पैसेंजर ट्रेन ही रुकती थी। मौजूदा समय में अकबरपुरवासियों को दो दर्जन से अधिक एक्सप्रेस ट्रेनों का लाभ मिल रहा है।
कराए जाएंगे व्यापक विकास कार्य
अकबरपुर नगर में विकास के व्यापक कार्य कराए जाएंगे। अभी एक दिन पहले ही लगभग नौ करोड़ की परियोजना का शिलान्यास किया गया है। नगर में सफाई, जलनिकासी, पेयजल व्यवस्था व मार्ग व्यवस्था पर आगामी दिनों में बड़े पैमाने पर काम होंगे। इसका असर भी लोगों को देखने को मिलेगा। -सरिता गुप्ता, अध्यक्ष नगर पालिका परिषद अकबरपुर
विकास कार्यों पर है सतत जोर
जिले में विकास कार्यों पर लगातार ध्यान है। केंद्र व राज्य सरकार की योजनाओं के अनुरूप सभी पात्रों को लाभ दिलाने पर जोर दिया जा रहा है। शहर के विकास के लिए कई तरह के प्रस्तावों पर विचार विमर्श चल रहा है। इसे जल्द ही अमलीजामा पहनाने की कोशिश होगी। -अखिलेश सिंह, डीएम
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सड़कों का बिछा जाल
छह दशक पहले जहां अकबरपुर नगर की सड़क मात्र 45 किमी में सिमटी थी, वहीं अब गली मोहल्लों को मिलाकर सड़कों की कुल लंबाई 220 किमी हो गई। नगर क्षेत्र में एनएच निर्माण से विभिन्न जनपद मुख्यालयों की दूरी अकबरपुर नगर से कम हो गई है।
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10 से बढ़कर 25 हुए वार्ड
वर्ष 1889 में अकबरपुर को नगर पंचायत का दर्जा मिला। उस समय नगर की आबादी लगभग 5 हजार थी। 25 फरवरी 1975 को नगर पंचायत से नगर पालिका दर्जा मिला। उस समय मात्र 10 वार्ड थे और आबादी थी लगभग 14 हजार। अकबरपुर जो कि एक छोटे से कस्बे के रूप में था, उसे जिला मुख्यालय होने का गौरव प्राप्त हुआ। तेजी से हुए विकास के बीच मौजूदा समय 25 वार्ड हो गए और आबादी बढ़कर हो गई 1 लाख 30 हजार।
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बढ़ी पेयजल की सुविधा
नगर पंचायत से नगर पालिका बनने तक के सफर में अकबरपुर में शुद्ध पेयजल की समुचित व्यवस्था नहीं थी। लोगों को साधारण हैंडपंप, तमसा नदी व कुएं के पानी का प्रयोग करना पड़ता था। आबादी बढ़ी, तो प्रदूषण बढ़ने लगा। इससे शुद्ध पेयजल की समस्या उत्पन्न हो गई। इसे देखते हुए नगर पालिका परिषद द्वारा चार ओवर हेड टैंक की स्थापना कराई गई। साथ ही 10 पंप की भी स्थापना के साथ ही घर घर शुद्ध पानी पहुंचाने के लिए लगभग 25 किमी पाइप का जाल फैलाया गया।
शिक्षा क्षेत्र में आया बड़ा बदलाव
शिक्षा क्षेत्र में अकबरपुर नगर में बड़ा बदलाव आया है। लगभग छह दशक पूर्व नगर में इंटर कॉलेज के नाम पर बीएन इंटर कॉलेज व डॉ. गणेशकृष्ण जेतली इंटर कॉलेज व डिग्री कॉलेज के नाम पर मात्र बीएनकेबी डिग्री कॉलेज ही था। इसके साथ ही इस्लामिया स्कूल का भी संचालन था। बढ़ती आबादी के बीच एक-एक कर विद्यालयों की संख्या बढ़ने लगी। आलम यह है कि मौजूदा समय में 18 प्राथमिक व उच्च प्राथमिक, 22 इंटर कॉलेज व 9 डिग्री कॉलेज संचालित हैं। इसके अलावा 14 मदरसे भी संचालित हो रहे हैं। तकनीकी शिक्षा के लिए पालीटेकिभनक, राजकीय इंजीनियरिंग कॉलेज व कृषि इंजीनियरिंग कॉलेज का भी संचालन लंबे समय से हो रहा है।
विद्युतीकरण में हुआ बड़ा सुधार
शुरुआत में मरैला मिल के निकट विद्युत सबस्टेशन की स्थापना थी, जिससे अकबरपुर नगर को विद्युत सप्लाई की जाती थी। समय के साथ इसमें बदलाव आया। पहले अकबरपुर नगर में विद्युत उपकेंद्र की स्थापना हुई, इसके बाद एक एक कर दो नए सब स्टेशनों की स्थापना हुई। इसके अलावा जहां पहले खुले तार से विद्युत सप्लाई की जाती थी, वहीं अब इसके स्थान पर केबिल लगाई गई है।
स्वास्थ्य क्षेत्र में आई बड़ी क्रांति
अकबरपुर में पूर्व में मात्र एक सरकारी अस्पताल डॉ. गणेशकृष्ण जेतली प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र की स्थापना थी, वहीं अब जिला अस्पताल के अलावा आयुर्वेदिक, होमियोपैथिक, यूनानी, टीबी अस्पताल आदि का तोहफा अकबरपुर नगर को मिला। इससे मरीजों को इलाज में इधर उधर की भागदौड़ से राहत मिली।
कस्बा चौकी से तय किया कप्तान कार्यालय तक का सफर
पूर्व में अकबरपुर नगर में मात्र एक पुलिस चौकी की स्थापना थी। यहां एक दरोगा व कुछ सिपाही ही तैनात थे। समय का पहिया घूमा कि न सिर्फ कोतवाली की स्थापना हुई, बल्कि जिला बनने के बाद एसपी कार्यालय भी संचालित हुआ। इसके अलावा पुलिस लाइन, एलआईयू व फायर स्टेशन जैसे महत्वपूर्ण विभाग भी संचालित होने लगे।
यातायात की हुई समुचित व्यवस्था
छह दशक से अधिक के समय अंतराल में अकबरपुर नगर में वाहनों की संख्या में व्यापक वृद्धि हुई। देश की आजादी के बाद अकबरपुर बस स्टेशन की स्थापना हुई, तो बसों की संख्या 2 से बढ़कर 52 हो गईं। अकबरपुर रेलवे स्टेशन की स्थापना आजादी से पहले जरूर हुई थी, लेकिन यहां मात्र एक पैसेंजर ट्रेन ही रुकती थी। मौजूदा समय में अकबरपुरवासियों को दो दर्जन से अधिक एक्सप्रेस ट्रेनों का लाभ मिल रहा है।
कराए जाएंगे व्यापक विकास कार्य
अकबरपुर नगर में विकास के व्यापक कार्य कराए जाएंगे। अभी एक दिन पहले ही लगभग नौ करोड़ की परियोजना का शिलान्यास किया गया है। नगर में सफाई, जलनिकासी, पेयजल व्यवस्था व मार्ग व्यवस्था पर आगामी दिनों में बड़े पैमाने पर काम होंगे। इसका असर भी लोगों को देखने को मिलेगा। -सरिता गुप्ता, अध्यक्ष नगर पालिका परिषद अकबरपुर
विकास कार्यों पर है सतत जोर
जिले में विकास कार्यों पर लगातार ध्यान है। केंद्र व राज्य सरकार की योजनाओं के अनुरूप सभी पात्रों को लाभ दिलाने पर जोर दिया जा रहा है। शहर के विकास के लिए कई तरह के प्रस्तावों पर विचार विमर्श चल रहा है। इसे जल्द ही अमलीजामा पहनाने की कोशिश होगी। -अखिलेश सिंह, डीएम