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जिले के 110 साधन सहकारी समितियों पर गरमाया चुनावी माहौल

Wed, 27 Dec 2017 11:05 PM IST
Updated Wed, 27 Dec 2017 11:05 PM IST
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जिले के 110 साधन सहकारी समितियों पर गरमाया चुनावी माहौल
साधन सहकारी समितियों पर गरमाया चुनावी माहौल
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अंबेडकरनगर। जिले की 110 साधन सहकारी समितियों पर सभापति व सदस्य के चुनाव को लेकर गहमागहमी तेज हो गई है। 110 सभापति व 990 सदस्य पद के चुनाव मैदान में उतरने वाले प्रत्याशियों ने जहां अपनी जोड़तोड़ शुरू कर दी है, वहीं विभागीय कोरम भी एक-एक कर पूरा होने लगा है। बीते दिनों सहकारिता विभाग ने सभी साधन सहकारी समितियों की आरक्षण सूची भी जारी कर दी है। शासन के नए फरमान से लगातार दो बार सभापति व सदस्य रह चुके लोगों के चुनाव लड़ने की तैयारियों पर पानी फिर गया है। साथ ही साधन सहकारी समिति के बकाएदार किसान भी चुनाव में अपनी दावेदारी नहीं कर सकेंगे। पिछले चुनाव में जहां सपा से जुड़े उम्मीदवारों का दबदबा रहा, वहीं इस बार सत्ताधारी पार्टी भाजपा समर्थित प्रत्याशियों का बोलबाला रहने की उम्मीद है।
गौरतलब है कि जिले में सहकारिता विभाग द्वारा संचालित साधन सहकारी समितियों के सुचारु संचालन के लिए सरकार सभापति व सदस्यों का चुनाव कराती है। अवैतनिक रूप में चुने जाने वाले ये पदाधिकारी समिति के बेहतर संचालन में सहयोग करते हैं। किसानों को समय से समिति से खाद व बीज मिलना सुनिश्चित हो इसमें उनका विशेष योगदान रहता है। किसानों द्वारा उधार ली गई खाद व बीज का भुगतान कराने में भी पदाधिकारी अहम भूमिका निभातेहैं। प्रत्येक समिति पर एक सभापति और नौ सदस्यों का चुनाव होता है। ये चुनाव वही किसान लड़ सकता है, जो साधन सहकारी समिति का मेंबर होगा। मेंबर किसानों द्वारा सदस्यों का चयन होता है, जबकि सदस्य अपने सभापति का चुनाव करते हैं। ज्ञात हो कि, वर्ष 2012 से पहले समिति का ये चुनाव तीन वर्ष के लिए होता था। मगर वर्ष 2012 में सपा सरकार ने इसका कार्यकाल बढ़ाकर पांच वर्ष कर दिया था।
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सहकारिता विभाग के वरिष्ठ सहायक शंभूनाथ यादव ने बताया कि, गत 28 नवंबर को जिले की समस्त साधन सहकारी समितियों के सभापति व सदस्यों का कार्यकाल समाप्त हो गया है। इसके बाद समितियों का प्रभार विभाग को सौंप दिया गया है। इस बीच शासन के आए निर्देश पर चुनाव की तैयारियां शुरू हो गई है। जिले की 110 साधन सहकारी समितियों पर चुनाव होने हैं। हर समिति पर एक सभापति चुना जाएगा, जबकि नौ सदस्य किसान मेंबरों द्वारा चुने जाएंगे। शासन के निर्देश मुताबिक, इस बार वह मेंबर चुनाव नहीं लड़ सकेंगे जो लगातार दो बार सभापति या फिर सदस्य पद पर रह चुके हैं। वहीं, ऐसे उम्मीदवार या फिर मेंबर किसानों को चुनाव लड़ने व मतदान करने का मौका नहीं मिलेगा जो समिति के बकाएदार हैं। इसके लिए सभी समिति सचिवों को पूर्व में ही सूचना दे दी गई है। जनवरी में चुनाव को लेकर अधिसूचना जारी होने की उम्मीद है।
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विभागीय अधिकारियों का कहना है कि, समिति सचिवों को निर्देशित किया गया है कि वे जल्द ही समिति के बकाएदारों की सूची कार्यालय को उपलब्ध करा दें। इसके बाद संबंधित बकाएदारों की सूची उनकी साधन सहकारी समिति पर चस्पा कर दी जाएगी। चुनाव लड़ने के इच्छुक किसान यदि निर्धारित तिथि से पहले अपने बकाए का भुगतान कर देंगे तो वे चुनाव लड़ सकते हैं। जो उम्मीदवार बकाए का भुगतान नहीं करेगा, तो उसकी उम्मीदवारी रद्द कर दी जाएगी।

सहकारी समितियाें के सहायक आयुक्त हरिप्रसाद का कहना है कि, सहकारिता चुनाव को लेकर सभी तैयारियां तेजी से की जा रही हैं। निर्देशों का पूरी तरह पालन सुनिश्चित कराया जाएगा।
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