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43 विद्यालयों में ठप पड़ा एमडीएम, लगभग 3 हजार छात्र छात्राएं वंचित
Updated Mon, 04 Dec 2017 11:02 PM IST
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तीन हजार बच्चों का दो हफ्ते से एमडीएम ठप
अंबेडकरनगर। ग्राम प्रधान व प्रधानाध्यापकों के बीच तालमेल न होने के कारण जिले के 43 विद्यालयों में एमडीएम करीब एक पखवारे से ठप है। इससे विद्यालय में अध्ययनरत लगभग 3 हजार बच्चों को दोपहर का भोजन नहीं मिल पा रहा है। विभाग ने हालांकि इनमें से 18 प्रधानाध्यापकों को नोटिस भेजकर योजना का जल्द संचालन करने को कहा है। इस बीच शिक्षा विभाग अभियान चलाकर विद्यालयों में एमडीएम का सत्यापन करने की योजना तैयार कर रहा है।
गौरतलब है कि जिले में 1365 प्राथमिक विद्यालय व 666 उच्च प्राथमिक विद्यालय संचालित हैं। मध्याह्न भोजन के लिए शासन स्तर से कोटेदारों के माध्यम से राशन उपलब्ध कराया जाता है। कनवर्जन कास्ट की रकम ग्राम प्रधान व प्रधानाध्यापक के संयुक्त खाते में भेजी जाती है। मौजूदा समय में जिले के 43 प्राथमिक व उच्च प्राथमिक विद्यालय ऐसे हैं जहां ग्राम प्रधान व प्रधानाध्यापक के तालमेल न होने के चलते योजना का संचालन नहीं हो पा रहा है।
करीब एक पखवारे से अधिक का समय बीत गया, लेकिन बच्चों को एडीएम की सुविधा नहीं मिल पा रही है। नतीजा यह है कि लगभग 3 हजार बच्चे मध्याह्न भोजन योजना से वंचित हैं। इसे लेकर कई अभिभावकों व छात्रों ने आवाज भी उठाई, लेकिन इसके बावजूद अब तक संबंधित विद्यालय में योजना को संचालित करने की जरूरत नहीं महसूस की गई है।
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विभागीय आंकड़ों के मुताबिक अकबरपुर विकास खंड के 312 में से 5 विद्यालय, बसखारी के 169 में से 1, भीटी विकास खंड के 155 में से 5, भियांव विकास खंड के 207 में से 5, जहांगीरगंज में 192 में 2, जलालपुर में 242 में 7, कटेहरी में 210 में 6, रामनगर में 186 में 4 व टांडा में 243 विद्यालय में से 8 विद्यालय में एमडीएम योजना ठप है।
जिला स्तरीय अधिकारियों द्वारा लगातार खंड शिक्षा अधिकारियों को निर्देशित किया जा रहा है कि जिन विद्यालयों में एमडीएम योजना ठप पड़ी है, वहां जल्द से जल्द संचालन शरू कराया जाए। संबंधित बीईओ ने प्रधानाध्यापकों से वार्ता भी की, लेकिन इसका परिणाम अभी तक सामने नहीं आ पाया है।
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अंबेडकरनगर। ग्राम प्रधान व प्रधानाध्यापकों के बीच तालमेल न होने के कारण जिले के 43 विद्यालयों में एमडीएम करीब एक पखवारे से ठप है। इससे विद्यालय में अध्ययनरत लगभग 3 हजार बच्चों को दोपहर का भोजन नहीं मिल पा रहा है। विभाग ने हालांकि इनमें से 18 प्रधानाध्यापकों को नोटिस भेजकर योजना का जल्द संचालन करने को कहा है। इस बीच शिक्षा विभाग अभियान चलाकर विद्यालयों में एमडीएम का सत्यापन करने की योजना तैयार कर रहा है।
गौरतलब है कि जिले में 1365 प्राथमिक विद्यालय व 666 उच्च प्राथमिक विद्यालय संचालित हैं। मध्याह्न भोजन के लिए शासन स्तर से कोटेदारों के माध्यम से राशन उपलब्ध कराया जाता है। कनवर्जन कास्ट की रकम ग्राम प्रधान व प्रधानाध्यापक के संयुक्त खाते में भेजी जाती है। मौजूदा समय में जिले के 43 प्राथमिक व उच्च प्राथमिक विद्यालय ऐसे हैं जहां ग्राम प्रधान व प्रधानाध्यापक के तालमेल न होने के चलते योजना का संचालन नहीं हो पा रहा है।
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करीब एक पखवारे से अधिक का समय बीत गया, लेकिन बच्चों को एडीएम की सुविधा नहीं मिल पा रही है। नतीजा यह है कि लगभग 3 हजार बच्चे मध्याह्न भोजन योजना से वंचित हैं। इसे लेकर कई अभिभावकों व छात्रों ने आवाज भी उठाई, लेकिन इसके बावजूद अब तक संबंधित विद्यालय में योजना को संचालित करने की जरूरत नहीं महसूस की गई है।
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विभागीय आंकड़ों के मुताबिक अकबरपुर विकास खंड के 312 में से 5 विद्यालय, बसखारी के 169 में से 1, भीटी विकास खंड के 155 में से 5, भियांव विकास खंड के 207 में से 5, जहांगीरगंज में 192 में 2, जलालपुर में 242 में 7, कटेहरी में 210 में 6, रामनगर में 186 में 4 व टांडा में 243 विद्यालय में से 8 विद्यालय में एमडीएम योजना ठप है।
जिला स्तरीय अधिकारियों द्वारा लगातार खंड शिक्षा अधिकारियों को निर्देशित किया जा रहा है कि जिन विद्यालयों में एमडीएम योजना ठप पड़ी है, वहां जल्द से जल्द संचालन शरू कराया जाए। संबंधित बीईओ ने प्रधानाध्यापकों से वार्ता भी की, लेकिन इसका परिणाम अभी तक सामने नहीं आ पाया है।