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किछौछा उर्स में जायरीनों ने टेका दरगाह पर माथा
Updated Thu, 19 Oct 2017 05:46 PM IST
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उर्स में आए जायरीन ने किछौछा दरगाह पर टेका माथा
बसखारी। विश्व प्रसिद्ध किछौछा दरगाह में चल रहे सालाना उर्स में गुरुवार को सज्जादानशीं सै. फखरुद्दीन अशरफ ने आस्तान-ए-आलिया पर पहुंचकर मुल्क की खुशहाली व सलामती की दुआ की। विशेष वस्त्र खिरका धारण कर लोगों से अपील की कि वे आपसी भाईचारे व सद्भाव के साथ एक-दूसरे का साथ दें।
खिरके की जियारत के लिए बड़ी संख्या में जायरीन पहुंचे। उधर देश-विदेश से आए जायरीन का आस्तान-ए-आलिया पर पहुंचकर माथा टेकने व चादर चढ़ाकर मन्नतें मांगने का दौर लगातार जारी है।
गौरतलब है कि महान सूफी संत हजरत मखदूम अशरफ जहांगीर सिमनानी का 631वां उर्स विश्व प्रसिद्ध दरगाह रसूलपुर किछौछा में चल रहा है। एक दिन पहले मुख्य सज्जादानशीं सै. मोहिउद्दीन अशरफ ने 631 वर्ष पुराने पवित्र खिरका वस्त्र को ग्रहण कर आस्तान-ए-आलिया पर पहुंचकर विशेष दुआ की थी।
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गुरुवार को सज्जादानशीं व मुस्लिम पर्सनल ला बोर्ड के उपाध्यक्ष सै. फखरुद्दीन अशरफ गुरुवार दोपहर बाद बसखारी स्थित आवास से जुलूस के साथ लगभग एक किमी चलकर अशरफी पुल पहुंचे। यहां गनीदार शाह की अगुवाई में फोखराओं ने उन्हें अपने घेरे में ले लिया।
इसके बाद अशरफी तराने के बीच विभिन्न प्रकार के नारे लगाते हुए उन्हें लहदखाने ले जाया गया। यहां विशेष नमाज अदा करने के बाद विशेष वस्त्र खिरका धारण किया। इसके बाद जायरीन के हुजूम के बीच आस्तान-ए-आलिया पर पहुंचकर देश व दुनिया में अमन-चैन, खुशहाली व देश की तरक्की के लिए दुआ की।
इससे पहले खानकाह में कैव्वाली का आयोजन हुआ जिसमें सै. फखरुद्दीन अशरफ के साथ सज्जादानशीं सै. मोहिउद्दीन अशरफ भी मौजूद रहे। इसमें बड़ी संख्या में जायरीन ने भाग लिया। इस दौरान इंतेजामिया कमेटी अध्यक्ष सै. मेराजुद्दीन किछौछवी, नईम अशरफ, सै. फैजान अशरफ चांद, सै. मेराजुद्दीन अशरफ एडवोकेट, अली अशरफ व सै. वली अशरफ आदि मौजूद रहे।
उधर देश-विदेश से पहुंचे बड़ी संख्या में जायरीन का आस्तान-ए-आलिया पर पहुंचकर चादर चढ़ाने व मन्नत मांगने का सिलसिला भी लगातार जारी है। इंतेजामिया कमेटी अध्यक्ष सै. मेराजुद्दीन किछौछवी ने बताया कि शुक्रवार को आस्तान-ए-आलिया के सामने सज्जादानशीं सै. मोहिउद्दीन अशरफ व सै. फखरुद्दीन अशरफ की अध्यक्षता में विशेष अदालत लगेगी।
इसमें देश के कोने-कोने से आए फोखराओं की समस्याओं का निस्तारण किया जाएगा। शनिवार को अशरफी तराने के बीच उर्स का समापन होगा।
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बसखारी। विश्व प्रसिद्ध किछौछा दरगाह में चल रहे सालाना उर्स में गुरुवार को सज्जादानशीं सै. फखरुद्दीन अशरफ ने आस्तान-ए-आलिया पर पहुंचकर मुल्क की खुशहाली व सलामती की दुआ की। विशेष वस्त्र खिरका धारण कर लोगों से अपील की कि वे आपसी भाईचारे व सद्भाव के साथ एक-दूसरे का साथ दें।
खिरके की जियारत के लिए बड़ी संख्या में जायरीन पहुंचे। उधर देश-विदेश से आए जायरीन का आस्तान-ए-आलिया पर पहुंचकर माथा टेकने व चादर चढ़ाकर मन्नतें मांगने का दौर लगातार जारी है।
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गौरतलब है कि महान सूफी संत हजरत मखदूम अशरफ जहांगीर सिमनानी का 631वां उर्स विश्व प्रसिद्ध दरगाह रसूलपुर किछौछा में चल रहा है। एक दिन पहले मुख्य सज्जादानशीं सै. मोहिउद्दीन अशरफ ने 631 वर्ष पुराने पवित्र खिरका वस्त्र को ग्रहण कर आस्तान-ए-आलिया पर पहुंचकर विशेष दुआ की थी।
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गुरुवार को सज्जादानशीं व मुस्लिम पर्सनल ला बोर्ड के उपाध्यक्ष सै. फखरुद्दीन अशरफ गुरुवार दोपहर बाद बसखारी स्थित आवास से जुलूस के साथ लगभग एक किमी चलकर अशरफी पुल पहुंचे। यहां गनीदार शाह की अगुवाई में फोखराओं ने उन्हें अपने घेरे में ले लिया।
इसके बाद अशरफी तराने के बीच विभिन्न प्रकार के नारे लगाते हुए उन्हें लहदखाने ले जाया गया। यहां विशेष नमाज अदा करने के बाद विशेष वस्त्र खिरका धारण किया। इसके बाद जायरीन के हुजूम के बीच आस्तान-ए-आलिया पर पहुंचकर देश व दुनिया में अमन-चैन, खुशहाली व देश की तरक्की के लिए दुआ की।
इससे पहले खानकाह में कैव्वाली का आयोजन हुआ जिसमें सै. फखरुद्दीन अशरफ के साथ सज्जादानशीं सै. मोहिउद्दीन अशरफ भी मौजूद रहे। इसमें बड़ी संख्या में जायरीन ने भाग लिया। इस दौरान इंतेजामिया कमेटी अध्यक्ष सै. मेराजुद्दीन किछौछवी, नईम अशरफ, सै. फैजान अशरफ चांद, सै. मेराजुद्दीन अशरफ एडवोकेट, अली अशरफ व सै. वली अशरफ आदि मौजूद रहे।
उधर देश-विदेश से पहुंचे बड़ी संख्या में जायरीन का आस्तान-ए-आलिया पर पहुंचकर चादर चढ़ाने व मन्नत मांगने का सिलसिला भी लगातार जारी है। इंतेजामिया कमेटी अध्यक्ष सै. मेराजुद्दीन किछौछवी ने बताया कि शुक्रवार को आस्तान-ए-आलिया के सामने सज्जादानशीं सै. मोहिउद्दीन अशरफ व सै. फखरुद्दीन अशरफ की अध्यक्षता में विशेष अदालत लगेगी।
इसमें देश के कोने-कोने से आए फोखराओं की समस्याओं का निस्तारण किया जाएगा। शनिवार को अशरफी तराने के बीच उर्स का समापन होगा।