शासन के निर्देश पर प्रभावित हुए जिले के 1433 शिक्षा प्रेरक

Lucknow Bureau Updated Thu, 05 Oct 2017 11:03 PM IST
जिले के 1433 शिक्षा प्रेरक हुए बेरोजगार
- मानव संसाधन मंत्रालय ने समाप्त की साक्षर भारत मिशन योजना
- 15 वर्ष से अधिक उम्र के निरक्षर बच्चे पढ़ाने के लिए हुई थी तैनाती
अमर उजाला ब्यूरो
अंबेडकरनगर। केंद्र सरकार के निर्णय के बाद शिक्षा निदेशक के निर्देश से जिले के विभिन्न परिषदीय विद्यालयों में तैनात 1433 शिक्षा प्रेरक प्रभावित हुए हैं। एक झटके में नौकरी छिनने और 11 माह का बकाया मानदेय भुगतान नहीं होने के चलते संबंधित शिक्षा प्रेरकों के समक्ष तमाम मुश्किलें खड़ी हो गई हैं। नियमितीकरण व मानदेय 10 हजार रुपये होने की उम्मीद लगाए शिक्षा प्रेरकों को दीपावली से पहले तगड़ा झटका लगा है। उनका कहना है कि, सरकार ने पहले तो उन्हें सब्जबाग दिखाए और अब उनके भविष्य को अंधकारमय कर दिया।
गौरतलब हो कि मानव संसाधन मंत्रालय द्वारा संचालित साक्षर भारत मिशन योजना के तहत दिसंबर 2011 में 15 वर्ष से अधिक उम्र के निरक्षर बच्चों को शिक्षित करने के लिए परिषदीय विद्यालयों में शिक्षा प्रेरकों की तैनाती की गई थी। योजना के तहत जिले में कुल 1433 शिक्षा प्रेरकों की तैनाती की गई थी। शिक्षा प्रेरकों की निगरानी के लिए ब्लॉक स्तर पर एक व जिला स्तर पर तीन समन्वयक की तैनाती की गई थी। शिक्षा प्रेरकों को दो हजार रुपये प्रतिमाह मानदेय, जबकि ब्लॉक व जिलास्तरीय समन्वयक को छह-छह हजार रुपये मानदेय दिया जाता रहा है। बीते कुछ समय से शिक्षा प्रेरक संघ द्वारा न सिर्फ नियमित करने, बल्कि मानदेय 10 हजार रुपये करने की भी मांग की जा रही थी।
इस बीच पिछले दिनों मानव संसाधन मंत्रालय ने साक्षर भारत मिशन योजना बंद करके शिक्षा प्रेरकों का कार्यकाल समाप्त करने का निर्णय ले लिया। जिसके बाद 28 सितंबर को शिक्षा निदेशक अवध नरेश शर्मा ने विज्ञप्ति जारी कर कहा कि, 30 सितंबर के बाद से शिक्षा प्रेरकों से न तो कार्य लिया जाए और न ही किसी प्रकार का भुगतान किया जाए। ये भी कहा गया कि 11 माह के बकाया मानदेय के भुगतान के लिए बाद में आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किया जाएगा। केंद्र सरकार के इस फैसले पर शिक्षा प्रेरकों ने कड़ी नाराजगी जताई। उनका कहना है कि, सरकार के इस फैसले से उनका भविष्य अंधकारमय हो गया है। हालांकि वे चुप बैठने वाले नहीं हैं। अपना हक पाने के लिए वे पूरी मजबूती से लड़ाई लड़ेंगे।

शिक्षण कार्य में कोई बाधा नहीं
बीएसए अतुल कुमार सिंह का कहना है कि, शासन के निर्देश की शिक्षा प्रेरकों को जानकारी दे दी गई है। 30 सितंबर के बाद से शिक्षा प्रेरक विद्यालय नहीं जा रहे हैं। प्रेरकों के नहीं आने से शिक्षण कार्य में किसी प्रकार की बाधा नहीं उत्पन्न हो रही है।


मजबूती से लडे़ंगे हक की लड़ाई
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केंद्र सरकार ने पहले तो शिक्षा प्रेरक पद पर तैनाती कर सब्जबाग दिखाए और अब एक झटके में नौकरी छीन ली। ये कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। सरकार के इस निर्णय का पूरी मजबूती के साथ विरोध किया जाएगा। अपने हक की लड़ाई पूरी मजबूती के साथ लड़ी जाएगी। इसे लेकर नौ, दस व 11 अक्तूबर को कलेक्ट्रेट के निकट धरना दिया जाएगा। यदि नौकरी बहाल नहीं की गई, तो पहले लखनऊ में विधानसभा के समक्ष और फिर दिल्ली में धरना-प्रदर्शन किया जाएगा।
देवेंद्र यादव, प्रेरक संघ जिलाध्यक्ष

न्यायालय की लेंगे शरण
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हम लोगों ने काफी उम्मीदें लगा रखी थीं। मगर सरकार ने एक झटके में सारी उम्मीदों पर पानी फेर दिया। ये पूरी तरह अन्याय है। शिक्षा प्रेरकों के भविष्य के साथ खिलवाड़ है। सरकार को अपना निर्णय वापस लेना होगा। यदि धरना-प्रदर्शन के माध्यम के बाद भी सरकार ने निर्णय वापस नहीं लिया, तो न्यायालय की शरण ली जाएगी।
धीरेंद्र श्रीवास्तव, ब्लॉक समन्वयक

फैसला वापस ले सरकार
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शिक्षा प्रेरक अपनी जिम्मेदारी का निर्वहन पूरी ईमानदारी से कर रहे थे। इसके बावजूद उन्हें एक झटके में नौकरी से हटा दिया गया। ये पूरी तरह अन्यायपूर्ण है। शिक्षा प्रेरकों के हित को देखते हुए सरकार को अपना निर्णय वापस लेना होगा। नौकरी से हटाने के बाद शिक्षा प्रेरकों का भविष्य अंधकारमय हो गया है।
रंजना वर्मा, शिक्षा प्रेरक

खड़ी हुईं विभिन्न समस्याएं
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सरकार के निर्णय से शिक्षा प्रेरकों के समक्ष विभिन्न प्रकार की समस्याएं खड़ी हो गईं हैं। न सिर्फ आर्थिक बल्कि अन्य कई प्रकार की समस्याएं खड़ी हो गईं हैं। पूर्व में सरकार ने नियमित करने व मानदेय बढ़ाने का आश्वासन दिया था, लेकिन इसे पूरा करने की बजाय नौकरी से ही हटा दिया गया।
प्रियंका यादव, शिक्षा प्रेरक

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