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योग आचरण है, तन और मन को सुंदर बनाने की विधि
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
Updated Thu, 18 Jun 2015 01:54 AM IST
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इलाहाबाद। भारत में योग को शारीरिक एवं मानसिक शांति का एक माध्यम माना जाता है। हिंदू धर्म के छह आस्तिक दर्शनों में योग को अभ्यास दर्शन के रूप में स्थान मिला है। इसकी मुख्य शाखाएं राज योग, कर्म योग, ज्ञान योग, हठ योग आदि हैं। महर्षि पतंजलि ने राज योग को विस्तारित कर पूरी दुनिया के सामने ला दिया। 21 जून को जब योग दिवस केे रूप में मनाए जाने की तैयारी पूरी दुनिया में है तो इसे लेकर सियासी जंग हो रही है। विभिन्न धर्मों के अनुयायी इसे अपने-अपने नजरिए से देख रहे हैं।
शहर के काजी, मौलाना जहां शरीर के लिए इसे अच्छा मानते हैं वहीं इसाई धर्म गुरू इसे गॉड से जोड़ने के नजरिए से देखते हैं। उनका कहना है कि शरीर और मन को स्वस्थ रखने के लिए की जाने वाली क्रियाएं न तो इस्लाम में मना हैं और न ही इसाई धर्म में। सियासतदान तो इस पर बेवजह तूल दिए हुए हैं।
शिया जामा मजिस्द चक इमाम जुमा व जमात के मौलाना सैयद हसन रजा कहते हैं कि योग तो एक एक्सरराइज (व्यायाम) है। इस्लाम में एक्सरसाइज को मना नहीं किया गया है। सांस बांधना, विभिन्न तरह की शारीरिक क्रियाएं करना कोई गलत नहीं है। इस्लाम ऐसा करने से मना नहीं करता है। इसको लेकर उलझने की बजाय सही समझ बनाने की जरूरत है। शहर काजी मुफ्ती शफीक अहमद शरीफी कहते हैं कि वर्जिश (व्यायाम) करना इस्लाम में मना नहीं है। योग में जैसे ओऊ्म शब्द का इस्तेमाल किया जाता है। वह इस्लाम में मना है। इसे छोड़ दिया जाए तो बाकी चीजें करने की इस्लाम में पाबंदी नहीं लगाई गई है। उन्होंने भाजपा पर सियासी और महजबी रंग देने का आरोप भी लगाया। कहा कि वह इसे जबरदस्ती थोपने की कोशिश कर रही है।
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इस्लाम धर्म अनुवाइयों के इतर इसाई धर्म गुरू तो इसे एक आचरण के तौर पर देखते हैँ। सीएनआई की लखनऊ डायोसिस के सचिव पादरी राजेश जोसेफ कहते हैं कि दुनिया के लिए भारत वर्ष की यह अनोखी देन है। इसका हर आसन एक विशेष एक्सरसाइज की तरह है। इससे स्वस्थ्य रखने के साथ-साथ भगवान से जोड़ने का माध्यम हैं। पादरी जोसेफ मौजूदा विवाद पर अफसोस जताते हैं। कहते हैं कि इसका किसी विशेष धर्म से जोड़कर नहीं देखना चाहिए और न ही सियासत करनी चाहिए। उन्होंने सूर्य नमस्कार की महत्ता भी बताई। कहा कि इससे शक्ति के स्रोत सूर्य से मिलने वाली अल्ट्रावायलेट किरणें शरीर में प्रवेश कर तन और मन को सुंदर और सुसज्जित बनाती हैं। इविवि फिजिकल विभागाध्यक्ष डॉ. डीसी लाल कहते हैं कि इसके बहुत लाभ हैं। इस पर विवाद ठीक नहीं है। बेली अस्पताल के योग एक्सपर्ट विनोद तिवारी कहते हैं कि कई बीमारियों में यह रामबाण साबित हो रही है।
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शहर के काजी, मौलाना जहां शरीर के लिए इसे अच्छा मानते हैं वहीं इसाई धर्म गुरू इसे गॉड से जोड़ने के नजरिए से देखते हैं। उनका कहना है कि शरीर और मन को स्वस्थ रखने के लिए की जाने वाली क्रियाएं न तो इस्लाम में मना हैं और न ही इसाई धर्म में। सियासतदान तो इस पर बेवजह तूल दिए हुए हैं।
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शिया जामा मजिस्द चक इमाम जुमा व जमात के मौलाना सैयद हसन रजा कहते हैं कि योग तो एक एक्सरराइज (व्यायाम) है। इस्लाम में एक्सरसाइज को मना नहीं किया गया है। सांस बांधना, विभिन्न तरह की शारीरिक क्रियाएं करना कोई गलत नहीं है। इस्लाम ऐसा करने से मना नहीं करता है। इसको लेकर उलझने की बजाय सही समझ बनाने की जरूरत है। शहर काजी मुफ्ती शफीक अहमद शरीफी कहते हैं कि वर्जिश (व्यायाम) करना इस्लाम में मना नहीं है। योग में जैसे ओऊ्म शब्द का इस्तेमाल किया जाता है। वह इस्लाम में मना है। इसे छोड़ दिया जाए तो बाकी चीजें करने की इस्लाम में पाबंदी नहीं लगाई गई है। उन्होंने भाजपा पर सियासी और महजबी रंग देने का आरोप भी लगाया। कहा कि वह इसे जबरदस्ती थोपने की कोशिश कर रही है।
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इस्लाम धर्म अनुवाइयों के इतर इसाई धर्म गुरू तो इसे एक आचरण के तौर पर देखते हैँ। सीएनआई की लखनऊ डायोसिस के सचिव पादरी राजेश जोसेफ कहते हैं कि दुनिया के लिए भारत वर्ष की यह अनोखी देन है। इसका हर आसन एक विशेष एक्सरसाइज की तरह है। इससे स्वस्थ्य रखने के साथ-साथ भगवान से जोड़ने का माध्यम हैं। पादरी जोसेफ मौजूदा विवाद पर अफसोस जताते हैं। कहते हैं कि इसका किसी विशेष धर्म से जोड़कर नहीं देखना चाहिए और न ही सियासत करनी चाहिए। उन्होंने सूर्य नमस्कार की महत्ता भी बताई। कहा कि इससे शक्ति के स्रोत सूर्य से मिलने वाली अल्ट्रावायलेट किरणें शरीर में प्रवेश कर तन और मन को सुंदर और सुसज्जित बनाती हैं। इविवि फिजिकल विभागाध्यक्ष डॉ. डीसी लाल कहते हैं कि इसके बहुत लाभ हैं। इस पर विवाद ठीक नहीं है। बेली अस्पताल के योग एक्सपर्ट विनोद तिवारी कहते हैं कि कई बीमारियों में यह रामबाण साबित हो रही है।