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-हां, हां, मैं ‘एल्कोहलिक’ हूं
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
Updated Sun, 26 Jun 2016 02:00 AM IST
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नशा मुक्ति केंद्रों की कमी के कारण हो रही है मौतें
- फोटो : Reuters
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हां...हां मैं ‘एल्कोहलिक’ हूं। बीते दिनों लोगों की जुबान पर चढ़ा फिल्म ‘द शौकीन्स’ का यह गाना नशेड़ियों पर एकदम सटीक है। सिगरेट, तंबाकू, शराब, भांग, गांजा, चरस, स्मैक जैसी चीजों के इतर दर्द, खांसी जैसी बीमारियों में इस्तेमाल होने वाली दवाओं में भी नशेड़ी मानसिक आनंद तलाश रहे हैं। सो ऐसी दवाओं का कारोबार भी तेजी से बढ़ा है। बड़े घरों के बिगड़ैल बेटे-बेटियां ही नहीं रिक्शा चालक, सायकिल पंक्चर बनाने वाले, ठेलिया चलाने वालेे, स्टेशनों पर काम करने वाले बच्चे, मजदूर आदि भी जबर्दस्त तरीके से नशे की लत के शिकार हैं।
मंडल के सबसे बड़े अस्पताल स्वरूपरानी नेहरू चिकित्सालय और जिला अस्पताल कॉल्विन में स्थापित ओएसटी सेंटर में आने वाले नशेड़ियों को नशा छुड़ाने के लिए बुर्कीनार्फिन नामक दवा दी जाती हैं। जैसे-जैसे उनका नशा कम होता जाएगा, दवा की डोज भी कम कर दी जाती है। इन चीजों का नशा करने वालों की संख्या सबसे अधिक सरकारी अस्पतालों, कचहरी के करीब, जंक्शन, बस स्टेशनों, सहित तटीय मोहल्लों में है।
संगठन लोक स्मृति सेवा संस्थान के संचालक आलोक वर्मा कहते हैं, शहर में कई नशेड़ी ऐसे हैं, जो नशे के लिए इंजेक्शन से लिक्विड लेते हैं। इंजेक्ट फार्म में पेन किलर के साथ एविल को मिलाकर लगाते हैं। नशेड़ी, दर्द से राहत दिलाने वाले आयोडेक्स, खांसी से राहत दिलाने वाले कफ सीरप, ह्वाइटनर, ट्यूब का पंक्चर बनाने के लिए इस्तेमाल होने वाले सुलेशन आदि का भी सेवन करते हैं। ऐसे नशेड़ियों में युवाओं के साथ छोटे-छोटे बच्चे, महिलाएं भी शामिल हैं। अब तक ऐसे सात सौ से ज्यादा रजिस्टर्ड हो चुके हैं जबकि इसका आंकड़ा हजारों मेें है। रजिस्टर्ड लोगों को नशे से मुक्ति दिलाने के लिए मुट्ठीगंज दफ्तर पर काउंसिल सहित दूसरे उपाय बताए जाते हैं। इंजेक्शन के जरिए नशा लेने वालों के लिए एसआरएन और कॉल्विन में ओएसटी सेंटर पर दवाएं दी जाती हैं। लोग इन सेंटर्स पर उपचार करा सकते हैं।
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लोग मानसिक आनंद के लिए नशे के लती हो रहे हैं। कोई भी नशा लोगों पर दो तरह का प्रभाव डालता है। पहली स्थिति में यह मस्तिष्क के इनहिबटरी सेंटर में कांटेक्ट कर सारे सिक्रिसन जबकि दूसरी स्थिति में इक्साइकेटरी सेंटर एंजाइम, हार्मोन को रोक देता है, जिससे लोगों की अपेक्षाएं बढ़ती जाती हैं। इसी स्थिति में लोग सही-गलत का फर्क भूल कर हत्या, बलात्कार जैसे अपराधों को अंजाम देते हैं।
0 प्रो.वीके सिंह
अध्यक्ष, मानसिक रोग विभाग/नोडल अधिकारी, ओएसटी सेंटर, मेडिसिन विभाग, एसआरएन चिकित्सालय
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मंडल के सबसे बड़े अस्पताल स्वरूपरानी नेहरू चिकित्सालय और जिला अस्पताल कॉल्विन में स्थापित ओएसटी सेंटर में आने वाले नशेड़ियों को नशा छुड़ाने के लिए बुर्कीनार्फिन नामक दवा दी जाती हैं। जैसे-जैसे उनका नशा कम होता जाएगा, दवा की डोज भी कम कर दी जाती है। इन चीजों का नशा करने वालों की संख्या सबसे अधिक सरकारी अस्पतालों, कचहरी के करीब, जंक्शन, बस स्टेशनों, सहित तटीय मोहल्लों में है।
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संगठन लोक स्मृति सेवा संस्थान के संचालक आलोक वर्मा कहते हैं, शहर में कई नशेड़ी ऐसे हैं, जो नशे के लिए इंजेक्शन से लिक्विड लेते हैं। इंजेक्ट फार्म में पेन किलर के साथ एविल को मिलाकर लगाते हैं। नशेड़ी, दर्द से राहत दिलाने वाले आयोडेक्स, खांसी से राहत दिलाने वाले कफ सीरप, ह्वाइटनर, ट्यूब का पंक्चर बनाने के लिए इस्तेमाल होने वाले सुलेशन आदि का भी सेवन करते हैं। ऐसे नशेड़ियों में युवाओं के साथ छोटे-छोटे बच्चे, महिलाएं भी शामिल हैं। अब तक ऐसे सात सौ से ज्यादा रजिस्टर्ड हो चुके हैं जबकि इसका आंकड़ा हजारों मेें है। रजिस्टर्ड लोगों को नशे से मुक्ति दिलाने के लिए मुट्ठीगंज दफ्तर पर काउंसिल सहित दूसरे उपाय बताए जाते हैं। इंजेक्शन के जरिए नशा लेने वालों के लिए एसआरएन और कॉल्विन में ओएसटी सेंटर पर दवाएं दी जाती हैं। लोग इन सेंटर्स पर उपचार करा सकते हैं।
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लोग मानसिक आनंद के लिए नशे के लती हो रहे हैं। कोई भी नशा लोगों पर दो तरह का प्रभाव डालता है। पहली स्थिति में यह मस्तिष्क के इनहिबटरी सेंटर में कांटेक्ट कर सारे सिक्रिसन जबकि दूसरी स्थिति में इक्साइकेटरी सेंटर एंजाइम, हार्मोन को रोक देता है, जिससे लोगों की अपेक्षाएं बढ़ती जाती हैं। इसी स्थिति में लोग सही-गलत का फर्क भूल कर हत्या, बलात्कार जैसे अपराधों को अंजाम देते हैं।
0 प्रो.वीके सिंह
अध्यक्ष, मानसिक रोग विभाग/नोडल अधिकारी, ओएसटी सेंटर, मेडिसिन विभाग, एसआरएन चिकित्सालय