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शादी शुदा होते हुए लिव इन रिलेशन में रहने पर नौकरी से बर्खास्तगी गलत
Sun, 18 Jul 2021 08:02 PM IST
विनोद सिंह
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
Published by: विनोद सिंह
Updated Sun, 18 Jul 2021 08:02 PM IST
सार
- हाईकोर्ट ने रद्द किया बर्खास्तगी आदेश, नए सिरे से आदेश पारित करने की छूट
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allahabad high court
- फोटो : social media
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विस्तार
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने शादी होते हुए दूसरी महिला के साथ लिव इन रिलेशन में रहने वाले सरकारी कर्मचारी की सेवा से बर्खास्तगी को गलत करार दिया है। कोर्ट ने माना कि सेवा से बर्खास्तगी एक कठोर दंड है। बर्खास्तगी को रद़द करते हुए कोर्ट ने कहा है कि याची को सेवा में फिर से बहाल किया जाए और विभाग चाहे तो इूसरा कोई मामूली दंड दे सकता है। गोरेलाल वर्मा की याचिका पर सुनवाई कर रहे न्यायमूर्ति पंकज भाटिया ने यह आदेश दिया है।
याचिका में कहा गया कि गोरेलाल का विवाह लक्ष्मीदेवी से हुआ है जो कि जीवित है, मगर वह हेमलता वर्मा के साथ लिव इन रिलेशन में रहता है और दोनों को तीन बच्चे भी हैं। इस आधार पर 31 अगस्त 2020 को उसे सेवा से बर्खास्त कर दिया गया। इस आदेश के खिलाफ उसने विभागीय अपील दाखिल की । अपील भी खारिज कर दी गई। विभाग का मानना है कि उसका यह कार्य सरकारी सेवक आचरण नियमावली 1956 और हिंदू विवाह अधिनियम के प्रावधानों के विपरीत है।
याची के अधिवक्ता की दलील थी कि इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अनीता यादव बनाम उत्तर प्रदेश राज्य के केस में इस प्रकार के मामले में बर्खास्ती का आदेश रद़द कर दिया था। इस फैसले के खिलाफ सुप्रीमकोर्ट ने एसएलपी खारिज कर दी थी। याची भी इसका लाभ पाने का हकदार है। कोर्ट ने याची की दलील को स्वीकार करते हुए याची की बर्खास्तगी का आदेश रद्द करते हुए उसे सेवा में बहाल करने का निर्देश दिया है। मगर कोर्ट ने कहा है कि याची बर्खास्तगी अवधि का वेतन पाने का हकदार नहीं होगा।
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याचिका में कहा गया कि गोरेलाल का विवाह लक्ष्मीदेवी से हुआ है जो कि जीवित है, मगर वह हेमलता वर्मा के साथ लिव इन रिलेशन में रहता है और दोनों को तीन बच्चे भी हैं। इस आधार पर 31 अगस्त 2020 को उसे सेवा से बर्खास्त कर दिया गया। इस आदेश के खिलाफ उसने विभागीय अपील दाखिल की । अपील भी खारिज कर दी गई। विभाग का मानना है कि उसका यह कार्य सरकारी सेवक आचरण नियमावली 1956 और हिंदू विवाह अधिनियम के प्रावधानों के विपरीत है।
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याची के अधिवक्ता की दलील थी कि इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अनीता यादव बनाम उत्तर प्रदेश राज्य के केस में इस प्रकार के मामले में बर्खास्ती का आदेश रद़द कर दिया था। इस फैसले के खिलाफ सुप्रीमकोर्ट ने एसएलपी खारिज कर दी थी। याची भी इसका लाभ पाने का हकदार है। कोर्ट ने याची की दलील को स्वीकार करते हुए याची की बर्खास्तगी का आदेश रद्द करते हुए उसे सेवा में बहाल करने का निर्देश दिया है। मगर कोर्ट ने कहा है कि याची बर्खास्तगी अवधि का वेतन पाने का हकदार नहीं होगा।
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