विश्व हृदय दिवस : महिलाओं से ज्यादा पुरुषों को पड़ता है दिल का दौरा, कुल मरीजों में 60 फीसदी पुरुष
सिर्फ स्वरूप रानी नेहरू चिकित्सालय (एसआरएन) में हर महीने लगभग 400 मरीज हार्ट अटैक के भर्ती होते हैं। तकरीबन 50 मरीजों की मौत हर महीने होती है। इसमें लगभग 200 नए हार्ट अटैक के मरीज होते हैं। इनमें से 20 मरीजों की मौत हर महीने होती है।
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हार्ट अटैक के मामले तेजी से बढ़ रहे है। महिलाओं की अपेक्षा पुरुष इसके ज्यादा शिकार हो रहे हैं। अस्पताल पहुंचने वाले कुल मरीजों में 60 फीसदी पुरुष व 40 फीसदी महिलाएं होती हैं। विशेषज्ञों की मानें तो महिलाओं के मुकाबले पुरुषों में हार्ट अटैक का खतरा ज्यादा रहता है। तनाव इसमें प्रमुख कारण है।
सिर्फ स्वरूप रानी नेहरू चिकित्सालय (एसआरएन) में हर महीने लगभग 400 मरीज हार्ट अटैक के भर्ती होते हैं। तकरीबन 50 मरीजों की मौत हर महीने होती है। इसमें लगभग 200 नए हार्ट अटैक के मरीज होते हैं। इनमें से 20 मरीजों की मौत हर महीने होती है।
मगर दिल का दौरा पड़ने से जान गंवाने वालों में महिला और पुरुषों की संख्या बराबर है।महिलाओं की अपेक्षा पुरुषों में करीब 10 साल पहले दिल का दौरा पड़ता है। विशेषज्ञों के मुताबिक 45 साल के बाद पुरुषों और 55 के बाद महिलाओं में हार्ट अटैक खतरा बढ़ जाता है। जानकारों की मानें तो महिलाओं में मौजूद एस्ट्रोजेन उन्हें हार्ट अटैक से बचाते है। मोनोपॉज के बाद खतरा बढ़ जाता है।
महिलाओं में मोनोपॉज (रजोनिवृत्ति) से पहले एथेरोस्क्लेरोसिस के कारण ज्यादा बचाव होता है। एथेरोस्क्लेरोसिस एक ऐसी अवस्था है, जब धमनियों में प्लेक डिपॉजिट (फैटी डिपॉजिट) जमा होने से हार्ट अटैक का खतरा बढ़ जाता है। दरअसल मेनोपॉज के बाद महिलाओं में एस्ट्रोजन हार्मोन का स्तर गिरना शुरू हो जाता है। हाई प्री-मेनोपॉज़ल एस्ट्रोजन लेवल के कारण ही महिलाओं का हार्ट अटैक से बचाव होता है। यही कारण है कि पुरुषों की तरह महिलाएं 45 साल की उम्र में हार्ट अटैक का शिकार नहीं होती हैं। इसके अलावा यह भी माना जाता है कि पुरूष ज्यादा मानसिक तनाव लेते हैं। जिसका असर दिल पर पड़ता है।
दिल के दौरे की अब कोई उम्र नहीं
दिल का दौरा अब किसी उम्र बीमारी नहीं रह गई है। सिर्फ एसआरएन की बात करें तो यहां प्रतिदिन तीन से चार फीसदी युवा दिल का दौरा पड़ने से भर्ती हो रहे हैं। वैसे इस बार विश्व हृदय दिवस की थीम हृदय का उपयोग करो, हृदय को जानो है। ऐसे में सभी को अपने ह्दय के प्रति जागरूक होना जरूरी है।
कैसे करें बचाव
1-धूम्रपान न करें
2-स्वस्थ्य आहार लें
3-नियमित रूप से व्यायाम करें
4-शरीर का उचित वजन बनाए रखें
5-तनाव मुक्त रहें
6-नियमित हृदय की जांच कराएं
दिल का दौरा पड़ने से लोगों की अस्पताल के अपेक्षा अस्पताल से बाहर ज्यादा मौत होती है। जिसका कारण हृदय के स्वास्थ्य को लेकर जागरूकता का अभाव है। इसलिए जरूरी है कि हम अपने हृदय को जानें। - डॉ. अभिषेक सचदेवा, विभागाध्यक्ष, ह्दय रोग विभाग, मोती लाल नेहरू मंडलीय चिकित्सालय।
महिलाओं के मुकाबले पुरुषों में मानसिक तनाव अधिक पाया जाता है। काउंसलिंग के लिए आने वाले दस से बीस फीसदी मरीजों को हृदय रोग की शिकायत होती है। इसलिए जरूरी है कि लोग अपने ऊपर मानसिक तनाव को हावी न होने दें। - डॉ. राकेश पासवान, मनोचिकित्सक परामर्शदाता, कॉल्विन हॉस्पिटल।