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विश्व मधुमेह दिवस : युवाओं-किशोरों में बढ़ा डायबिटिज का खतरा, शारीरिक सक्रियता घटने से आ रहे चपेट में
Sun, 14 Nov 2021 10:28 PM IST
विनोद सिंह
अमर उजाला ब्यूरो, प्रयागराज
अमर उजाला ब्यूरो, प्रयागराज
Published by: विनोद सिंह
Updated Sun, 14 Nov 2021 10:28 PM IST
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मधुमेह
- फोटो : social media
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विश्व मधुमेह दिवस पर इलाहाबाद मेडिकल एसोसिएशन (एएमए) की ओर से आयोजित कार्यशाला में मधुमेह मरीजों की बढ़ रही संख्या पर चिंता व्यक्त की गई। मोती लाल नेहरू मेडिकल कॉलेज की एसोसिएट प्रो. अनुभा श्रीवास्तव ने कहा कि बदलते दौर में खानपान और लोगों की दिनचर्या काफी प्रभावित हो गई है। शारीरिक सक्रियता भी घटी है। मधुमेह रोगियों के बढ़ने का एक बड़ा कारण यह भी है। इसके साथ उन्होंने दो वर्ष पूर्व हुए एक सर्वे के कुछ आंकडे़ भी सामने रखे।
डॉ. अनुभा ने कहा कि दो साल पूर्व हुए सर्वे की रिपोर्ट के मुताबिक दुनिया में 46.3 करोड़ लोग मधुमेह से ग्रसित हैं। इसमें 7.7 करोड़ मधुमेह रोगी अकेले भारत में हैं। मधुमेह की पहली वाली स्थिति यानी प्री डायबिटीक की संख्या भी तकरीबन 3.5 करोड़ है। उन्होंने प्री डायबिटीक की स्थिति को चुनौती पूर्ण बताया। कहा कि इसी वजह से मधुमेह जो 40 से 45 वर्ष की उम्र के बीच के लोगों को हुआ करती थी वह अब 25 से 30 वर्ष के बीच के लोगों में देखी जा रही है।
लोग लैपटॉप, मोबाइल जैसी इलेक्ट्रानिक डिवाइसों के बीच अपना समय ज्यादा व्यतीत कर रहे हैं। जिससे उनका शारीरिक मूवमेंट कम हो गया है। इस वजह से युवाओं में थकान, सुस्ती, कमजोरी जैसी स्थिति देखी जा रही है। उन्होंने बताया कि आठ साल के बच्चों में भी मधुमेह के लक्षण मिल रहे हैं। उनके मुताबिक टाईप-टू मधुमेह को नियंत्रित किया जा सकता है। इसके लिए जरूरी है कि रोजाना 30 से 45 मिनट व्यायाम करें। इस दौरान डॉ. अनिल कुमार अग्रवाल, डॉ. जीएस सिन्हा, डॉ. सुबोध जैन ने भी अपनी बात रखी।
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डॉ. अनुभा ने कहा कि दो साल पूर्व हुए सर्वे की रिपोर्ट के मुताबिक दुनिया में 46.3 करोड़ लोग मधुमेह से ग्रसित हैं। इसमें 7.7 करोड़ मधुमेह रोगी अकेले भारत में हैं। मधुमेह की पहली वाली स्थिति यानी प्री डायबिटीक की संख्या भी तकरीबन 3.5 करोड़ है। उन्होंने प्री डायबिटीक की स्थिति को चुनौती पूर्ण बताया। कहा कि इसी वजह से मधुमेह जो 40 से 45 वर्ष की उम्र के बीच के लोगों को हुआ करती थी वह अब 25 से 30 वर्ष के बीच के लोगों में देखी जा रही है।
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लोग लैपटॉप, मोबाइल जैसी इलेक्ट्रानिक डिवाइसों के बीच अपना समय ज्यादा व्यतीत कर रहे हैं। जिससे उनका शारीरिक मूवमेंट कम हो गया है। इस वजह से युवाओं में थकान, सुस्ती, कमजोरी जैसी स्थिति देखी जा रही है। उन्होंने बताया कि आठ साल के बच्चों में भी मधुमेह के लक्षण मिल रहे हैं। उनके मुताबिक टाईप-टू मधुमेह को नियंत्रित किया जा सकता है। इसके लिए जरूरी है कि रोजाना 30 से 45 मिनट व्यायाम करें। इस दौरान डॉ. अनिल कुमार अग्रवाल, डॉ. जीएस सिन्हा, डॉ. सुबोध जैन ने भी अपनी बात रखी।
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शरीर में मोटापा है तो लीवर में चर्बी: डॉ. टीडी
मोती लाल नेहरू मेडिकल (एमएलएनएम) कॉलेज के पुरा छात्रसंघ की ओर से रविवार को आयोजित चिकित्सा सम्मेलन मेें चंडीगढ़ पीजीआई के गैस्ट्रोइंट्रोलॉजी विभाग के प्रो. टीडी यादव ने लीवर प्रत्यारोपण पर आधुनिक तकनीकी पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि शरीर में मोटापा है तो इसका अर्थ है कि लीवर में चर्बी आ गई है। उन्होंने लिवर को स्वस्थ रखने के लिए खानपान का ध्यान रखने की नसीहत दी। इसके पूर्व कार्यक्रम की विधिवत शुरूआत की गई। अटल बिहारी स्टेट मेडिकल विश्वविद्यालय लखनऊ के कुलपति प्रो. एके सिंह और मुख्य अतिथि पूर्व प्राचार्य एमएलएनएम कॉलेज के पूर्व प्रो. पीसी सक्सेना ने इसका उद्घाटन किया।
प्रीतमदास प्रेक्षागृह में आयोजित कार्यक्रम में गैस्ट्रोइंट्रोलॉजिस्ट प्रो. टीडी यादव ने कहा कि लीवर को स्वस्थ रखने के लिए हरी सब्जियां, दाल के साथ नियमित व्यायाम जरूरी है। उन्होंने कहा कि मोटापा होने से लिवर की गंभीर बीमारियां हो सकती हैं। उन्होंने आलू, चावल, को लिवर का दुष्मन बताया। कहा कि शराब का सेवन भी बेहद खतरनाक है। यदि इंफेक्शन, हेपेटाइटिस बी का इंफेक्शन हो जाए तो पीलिया होने पर तीन से छह महीने में खून की जांच, अल्ट्रासाउंड जरूर कराएं।
सम्मेलन में प्रो. कमलजीत सिंह, टाटा मेमोरियल कैंसर हॉस्पिटल मुंबई के प्लॉस्टिक सर्जन प्रो. विनय कांत शंखधर, प्रो. एसपी मिश्रा ने भी अलग-अलग बीमारियों पर अपनी बात रखी। विशिष्ट अतिथि डॉ. एसएल टीवरसन, मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. एसपी सिंह, पुरातन छात्रसंघ के अध्यक्ष डॉ. आलोक मिश्रा, सचिव डॉ. अनुज गुप्ता, डॉ. अशोक अग्रवाल, डॉ. सुबोध जैन, डॉ. मुकुल पांडेय, डॉ. शरद जैन, डॉ. सुरेश मौर्य, डॉ. मोहित जैन, डॉ. सचिन जैन, डॉ. कमल सिंह, डॉ. संजीव गुप्ता आदि मौजूद रहे।
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मोती लाल नेहरू मेडिकल (एमएलएनएम) कॉलेज के पुरा छात्रसंघ की ओर से रविवार को आयोजित चिकित्सा सम्मेलन मेें चंडीगढ़ पीजीआई के गैस्ट्रोइंट्रोलॉजी विभाग के प्रो. टीडी यादव ने लीवर प्रत्यारोपण पर आधुनिक तकनीकी पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि शरीर में मोटापा है तो इसका अर्थ है कि लीवर में चर्बी आ गई है। उन्होंने लिवर को स्वस्थ रखने के लिए खानपान का ध्यान रखने की नसीहत दी। इसके पूर्व कार्यक्रम की विधिवत शुरूआत की गई। अटल बिहारी स्टेट मेडिकल विश्वविद्यालय लखनऊ के कुलपति प्रो. एके सिंह और मुख्य अतिथि पूर्व प्राचार्य एमएलएनएम कॉलेज के पूर्व प्रो. पीसी सक्सेना ने इसका उद्घाटन किया।
प्रीतमदास प्रेक्षागृह में आयोजित कार्यक्रम में गैस्ट्रोइंट्रोलॉजिस्ट प्रो. टीडी यादव ने कहा कि लीवर को स्वस्थ रखने के लिए हरी सब्जियां, दाल के साथ नियमित व्यायाम जरूरी है। उन्होंने कहा कि मोटापा होने से लिवर की गंभीर बीमारियां हो सकती हैं। उन्होंने आलू, चावल, को लिवर का दुष्मन बताया। कहा कि शराब का सेवन भी बेहद खतरनाक है। यदि इंफेक्शन, हेपेटाइटिस बी का इंफेक्शन हो जाए तो पीलिया होने पर तीन से छह महीने में खून की जांच, अल्ट्रासाउंड जरूर कराएं।
सम्मेलन में प्रो. कमलजीत सिंह, टाटा मेमोरियल कैंसर हॉस्पिटल मुंबई के प्लॉस्टिक सर्जन प्रो. विनय कांत शंखधर, प्रो. एसपी मिश्रा ने भी अलग-अलग बीमारियों पर अपनी बात रखी। विशिष्ट अतिथि डॉ. एसएल टीवरसन, मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. एसपी सिंह, पुरातन छात्रसंघ के अध्यक्ष डॉ. आलोक मिश्रा, सचिव डॉ. अनुज गुप्ता, डॉ. अशोक अग्रवाल, डॉ. सुबोध जैन, डॉ. मुकुल पांडेय, डॉ. शरद जैन, डॉ. सुरेश मौर्य, डॉ. मोहित जैन, डॉ. सचिन जैन, डॉ. कमल सिंह, डॉ. संजीव गुप्ता आदि मौजूद रहे।
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