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शिक्षा के साथ सेहत में भी सशक्त हों महिलाएं
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शिक्षा के साथ सेहत में भी सशक्त बनें महिलाएं
राज्य विवि के दीक्षांत समारोह में बोलीं राज्यपाल आनंदी बेन पटेल
विश्वविद्यालय प्रशासन प्रत्येक छात्रा के हीमोग्लोबिन की कराए जांच
प्रयागराज। प्रो. राजेंद्र सिंह (रज्जू भइया) राज्य विश्वविद्यालय में सोमवार को आयोजित दीक्षांत समारोह में प्रदेश की राज्यपाल आनंदी बेन पटेल ने इस बात पर खुशी जाहिर की कि मेडल पाने वाले विद्यार्थियों में आधे से अधिक छात्राएं हैं। लेकिन यह सवाल भी उठाया कि सिर्फ शिक्षा से ही नारी सशक्तिकरण कैसे होगा? उन्होंने छात्राओं की बेहतर सेहत के लिए विश्वविद्यालयों को ध्यान देने की जरूरत बताई।
एक चौंकाने वाला आंकड़ा प्रस्तुत करते हुए राज्यपाल ने बताया कि बीते दिनों कानपुर विश्वविद्यालय में दो सौ छात्राओं के हीमोग्लोबिन की जांच कराई गई और रिपोर्ट में आधे से अधिक छात्राओं का हीमोग्लोबिन सात फीसदी से भी कम निकला। कहा कि देश तभी मजबूती से आगे बढ़ेगा, जब महिलाएं शिक्षा के साथ सेहत में भी सशक्त बनें। सही मायने में महिला सशक्तिकरण तभी होगा। उन्होंने विश्वविद्यालयों को उनकी जिम्मेदारियों का एहसास दिलाते हुए कहा कि सिर्फ शिक्षा ही नहीं, महिला सशक्तिकरण के लिए विश्वविद्यालयों एवं महाविद्यालयों को दूसरे रास्तों से भी आगे आना होगा। राज्य विवि प्रशासन को निर्देश कि प्रत्येक छात्रा के हीमोग्लोबिन की जांच कराई जाए।
कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वर्ष 2025 तक देश को टीबी मुक्त बनाने का संकल्प लिया है। अगर हर शख्स टीबी ग्रस्त एक बच्चे को गोद ले तो यह लक्ष्य 2024 में ही पूरा हो जाएगा। राज्यपाल ने बताया कि वह अब तक जिन शिक्षण संस्थानों में गईं, वहां इस दिशा में काम शुरू हुआ। अब तक 5500 बच्चों को गोद लिया जा चुका है। प्रयागराज की ही बात करें तो यहां विश्वविद्यालय और उससे संबद्ध महाविद्यालयों की संख्या इतनी अधिक है कि अगर हर शिक्षक टीबी ग्रस्त एक बच्चे को गोद ले तो प्रयागराज में ही तकरीबन दो हजार बच्चों को भविष्य संवर जाएगा।
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गर्भ संस्कार से ही संवरेगा देश का भविष्य
- राज्यपाल ने कहा कि गर्भ संस्कार से ही देश का भविष्य संवरेगा। बच्चे को मां के गर्भ से ही संस्कार मिलने लगे हैं। आठ साल की उम्र तक बच्चा जीवन का 80 फीसदी व्यवहारिक ज्ञान हासिल कर लेता है। इसके बाद तमाम प्रयासों के बावजूद भी बदलाव मुश्किल होता है। ऐसे में मां का पढ़ा-लिखा होना बहुत जरूरी है। ‘बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ’ अभियान भी इसी उद्देश्य से शुरू किया गया। राज्यपाल ने विश्वविद्यालयों को इस दिशा में काम करने की सलाह दी।
जिन्हें गोल्ड मिला, वे शादी में न मांगे गोल्ड
- राज्यपाल ने दीक्षांत समारोह में गोल्ड मेडल पाने वाले छात्र-छात्राओं को शुभकानाएं दीं। साथ ही छात्रों और उनके अभिभावकों से कहा कि अच्छी बात है कि पढ़ाई में गोल्ड मेडल मिला लेकिन इस बात का भी ध्यान रखना होगा कि शादी में गोल्ड की मांग न करें।
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राज्य विवि के दीक्षांत समारोह में बोलीं राज्यपाल आनंदी बेन पटेल
विश्वविद्यालय प्रशासन प्रत्येक छात्रा के हीमोग्लोबिन की कराए जांच
प्रयागराज। प्रो. राजेंद्र सिंह (रज्जू भइया) राज्य विश्वविद्यालय में सोमवार को आयोजित दीक्षांत समारोह में प्रदेश की राज्यपाल आनंदी बेन पटेल ने इस बात पर खुशी जाहिर की कि मेडल पाने वाले विद्यार्थियों में आधे से अधिक छात्राएं हैं। लेकिन यह सवाल भी उठाया कि सिर्फ शिक्षा से ही नारी सशक्तिकरण कैसे होगा? उन्होंने छात्राओं की बेहतर सेहत के लिए विश्वविद्यालयों को ध्यान देने की जरूरत बताई।
एक चौंकाने वाला आंकड़ा प्रस्तुत करते हुए राज्यपाल ने बताया कि बीते दिनों कानपुर विश्वविद्यालय में दो सौ छात्राओं के हीमोग्लोबिन की जांच कराई गई और रिपोर्ट में आधे से अधिक छात्राओं का हीमोग्लोबिन सात फीसदी से भी कम निकला। कहा कि देश तभी मजबूती से आगे बढ़ेगा, जब महिलाएं शिक्षा के साथ सेहत में भी सशक्त बनें। सही मायने में महिला सशक्तिकरण तभी होगा। उन्होंने विश्वविद्यालयों को उनकी जिम्मेदारियों का एहसास दिलाते हुए कहा कि सिर्फ शिक्षा ही नहीं, महिला सशक्तिकरण के लिए विश्वविद्यालयों एवं महाविद्यालयों को दूसरे रास्तों से भी आगे आना होगा। राज्य विवि प्रशासन को निर्देश कि प्रत्येक छात्रा के हीमोग्लोबिन की जांच कराई जाए।
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कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वर्ष 2025 तक देश को टीबी मुक्त बनाने का संकल्प लिया है। अगर हर शख्स टीबी ग्रस्त एक बच्चे को गोद ले तो यह लक्ष्य 2024 में ही पूरा हो जाएगा। राज्यपाल ने बताया कि वह अब तक जिन शिक्षण संस्थानों में गईं, वहां इस दिशा में काम शुरू हुआ। अब तक 5500 बच्चों को गोद लिया जा चुका है। प्रयागराज की ही बात करें तो यहां विश्वविद्यालय और उससे संबद्ध महाविद्यालयों की संख्या इतनी अधिक है कि अगर हर शिक्षक टीबी ग्रस्त एक बच्चे को गोद ले तो प्रयागराज में ही तकरीबन दो हजार बच्चों को भविष्य संवर जाएगा।
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गर्भ संस्कार से ही संवरेगा देश का भविष्य
- राज्यपाल ने कहा कि गर्भ संस्कार से ही देश का भविष्य संवरेगा। बच्चे को मां के गर्भ से ही संस्कार मिलने लगे हैं। आठ साल की उम्र तक बच्चा जीवन का 80 फीसदी व्यवहारिक ज्ञान हासिल कर लेता है। इसके बाद तमाम प्रयासों के बावजूद भी बदलाव मुश्किल होता है। ऐसे में मां का पढ़ा-लिखा होना बहुत जरूरी है। ‘बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ’ अभियान भी इसी उद्देश्य से शुरू किया गया। राज्यपाल ने विश्वविद्यालयों को इस दिशा में काम करने की सलाह दी।
जिन्हें गोल्ड मिला, वे शादी में न मांगे गोल्ड
- राज्यपाल ने दीक्षांत समारोह में गोल्ड मेडल पाने वाले छात्र-छात्राओं को शुभकानाएं दीं। साथ ही छात्रों और उनके अभिभावकों से कहा कि अच्छी बात है कि पढ़ाई में गोल्ड मेडल मिला लेकिन इस बात का भी ध्यान रखना होगा कि शादी में गोल्ड की मांग न करें।