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दिवाली मनाने पैतृक गांव आई महिला शिक्षक की कोरोना से मौत
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नेताओं के कहने पर अस्पताल वालों ने परिजन को बिना सुरक्षा दे दिया शव
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मीरगंज। दिवाली पर यहां के पैतृक गांव असदनगर आई काठगोदाम (उत्तराखंड) के नजदीक एक सरकारी स्कूल में तैनात महिला शिक्षक की कोरोना से मौत हो गई। सोमवार को तबीयत बिगड़ने पर उन्हें फतेहगंज पश्चिमी इलाके के एक अस्पताल में भर्ती कराया गया था। मंगलवार सुबह मौत होने के बाद नेताओं के कहने पर अस्पताल प्रबंधन ने शव बिना सुरक्षा के परिजन को सौंप दिया। घर ले जाए जाने के बाद परिजन ने अंतिम संस्कार कर दिया।
50 वर्षीय शिक्षक को सोमवार की जब तबीयत खराब हुई तो सामान्य बीमारी समझकर परिवार वाले उन्हें डॉक्टर के पास ले गए। कई अस्पताल में चेकअप कराने के बाद उन्हें फतेहगंज पश्चिमी के एक प्राइवेट कोविड अस्पताल ले जाया गया। वहां जांच में उन्हें कोरोना पॉजिटिव पाया गया। इसके बाद इलाज शुरू किया गया, मगर मंगलवार सुबह उनकी मौत हो गई। इसके बाद अस्पताल कर्मी कोविड नियमावली के तहत ही अंत्येष्टि कराना चाहते थे, मगर सत्ताधारी नेताओं के दखल पर शव परिजन को सौंप दिया गया। घर ले जाने के बाद उन्होंने रिश्तेदारों को आखिरी बार चेहरा दिखाने के लिए महिला शिक्षक के शव की सील तोड़ दी। इसके कुछ देर बाद सामान्य रूप से अंतिम संस्कार कर दिया।
इस लापरवाही का पता चलने के बाद ग्राम प्रधान गौरव सिंह व अन्य कई ग्रामीणों ने स्वास्थ्य विभाग और प्रशासन के अधिकारियों से शिकायत कर महिला शिक्षक के घर पहुंचने वालों की कोरोना जांच कराने की मांग की, ताकि गांव संक्रमण न फैले।
50 वर्षीय शिक्षक को सोमवार की जब तबीयत खराब हुई तो सामान्य बीमारी समझकर परिवार वाले उन्हें डॉक्टर के पास ले गए। कई अस्पताल में चेकअप कराने के बाद उन्हें फतेहगंज पश्चिमी के एक प्राइवेट कोविड अस्पताल ले जाया गया। वहां जांच में उन्हें कोरोना पॉजिटिव पाया गया। इसके बाद इलाज शुरू किया गया, मगर मंगलवार सुबह उनकी मौत हो गई। इसके बाद अस्पताल कर्मी कोविड नियमावली के तहत ही अंत्येष्टि कराना चाहते थे, मगर सत्ताधारी नेताओं के दखल पर शव परिजन को सौंप दिया गया। घर ले जाने के बाद उन्होंने रिश्तेदारों को आखिरी बार चेहरा दिखाने के लिए महिला शिक्षक के शव की सील तोड़ दी। इसके कुछ देर बाद सामान्य रूप से अंतिम संस्कार कर दिया।
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इस लापरवाही का पता चलने के बाद ग्राम प्रधान गौरव सिंह व अन्य कई ग्रामीणों ने स्वास्थ्य विभाग और प्रशासन के अधिकारियों से शिकायत कर महिला शिक्षक के घर पहुंचने वालों की कोरोना जांच कराने की मांग की, ताकि गांव संक्रमण न फैले।
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