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महिला को वार्ड से निकाला, रात भर तड़पी सुबह मौत

Sat, 26 Sep 2015 01:55 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद Updated Sat, 26 Sep 2015 01:55 AM IST
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Woman pulled from the ward , overnight death Tdpi morning
इलाहाबाद (ब्यूरो)। स्वरूपरानी नेहरू (एसआरएन)अस्पताल में बृहस्पतिवार देर रात तीमारदारों द्वारा ईएमओ के साथ हुई मारपीट से आक्रोशित जूनियर डॉक्टर शुक्रवार को हड़ताल पर चले गए। शाम चार बजे तक जारी इस हड़ताल के दौरान इमरजेंसी सर्जिकल वार्ड से बाहर की गई एक महिला मरीज की मौत हो गई। वार्ड  में भर्ती महिला को गुरुवार देररात बाहर निकाल दिया गया, मरीज रात भर वार्ड के बाहर तड़पती रही।
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शुक्रवार सुबह हड़ताल के चलते उसे दोबारा भर्ती नहीं किया गया। इलाज के अभाव में तड़पती महिला ने दोपहर में दम तोड़ दिया। हड़ताल के दौरान जूनियर डॉक्टरों ने ओपीडी के साथ  इमरजेंसी सेवा भी बाधित कर दी। न सर्जरी हुई न ही नए मरीज भर्ती किए गए। इसके चलते मरीजों को निजी अस्पतालों को भटकना पड़ा। शाम चार बजे मेडिकल प्रशासन ने डॉक्टरों मांगों को पूरा करने आश्वासन दिया। इसके बाद वह काम पर लौट आए। एसआरएन की तरह चिल्ड्रेन अस्पताल में भी ओपीडी सेवा बाधित रही।
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जूनियर डॉक्टर बृहस्पतिवार को ईएमओ से मारपीट के बाद हड़ताल पर चले गए थे। सुबह अस्पताल खुलते ही उन्होंने ओपीडी, इमरजेंसी सेवा बंद करा दी। अस्पताल की इमरजेंसी में मारपीट के बाद इमरजेंसी सर्जरी वार्ड में भर्ती प्रतापगढ़ की एक महिला को बाहर कर दिया गया। वह महिला पूरी रात बाहर ही पड़ी रही। घटना के प्रत्यक्षदर्शी पीसी तिवारी ने बताया कि महिला रात भर तड़पती रही। हड़ताल के चलते सुबह भी उसे भर्ती नहीं किया गया। दोपहर में उसकी मौत हो गई। प्रत्यक्षदर्शी ने बताया कि महिला के पुत्र अजय कुमार के अनुसार मारपीट के बाद उसकी मां को बाहर कर दिया गया। तब से वह बाहर ही अपनी मां को लेकर पड़ा रहा। सुबह उसने कई बार भर्ती के लिए गुहार लगाई लेकिन उसकी सुनी नहीं गई। आखिरकार उसकी मां ने दम तोड़ दिया।
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हड़ताल से सीनियर डॉक्टर भी नजर नहीं आए : अस्पताल के सभी ऑपरेशन थिएटर बंद रहे। इसके चलते आर्थो, सर्जरी, ईएनटी, गॉयनी विभाग में एक भी सर्जरी नहीं हुई। सीनियर डॉक्टरों के गैरमौजूदगी से ओपीडी और इमरजेंसी में आने वाले मरीजों को लौटना पड़ा। हंडिया से आए रामपाल के परिजनों ने बताया कि वह इमरजेंसी में डॉक्टर को दिखाने आया था लेकिन उसे भर्ती नहीं किया गया। तीमारदार उसे लेकर निजी अस्पताल चले गए। इसी तरह यमुनापार के लेड़ियारी से आया सूरज भी गंभीर हालत में एसआरएन पहुंचा था। उसकी पहले सर्जरी हुई थी। सर्जरी वाली जगह परेशानी अधिक होने से वह भर्ती होने आया था, लेकिन उसे देखा भी नहीं गया। इसी तरह दर्जनों मरीजों के साथ ऐसा ही हुआ। कई मरीज तो बेली, कॉल्विन सहित निजी अस्पताल चले गए।

कई तीमारदारों ने बताया कि कई वार्डों में भर्ती मरीज भी नहीं देखे गए। जूनियर डॉक्टर की हड़ताल का समर्थन अस्पताल परिसर में स्थित और परिसर के बाहर स्थित दवा की दुकान के संचालकों ने भी किया। उन्होंने दवा की दुकानें बंद रखीं। मरीजों को ले जाने के लिए एंबुलेंस भी नहीं मिली। डॉक्टरों के आंदोलन को देखते हुए अस्पताल परिसर में आरएएफ की तैनाती कर दी गई थी। जूनियर डॉक्टर सुबह से आंदोलन पर डटे रहे। दोपहर दो बजे के बाद मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. एसपी सिंह, एसआरएन अस्पताल के एसआईसी डॉ. केके द्विवेदी से उनकी वार्ता हुई। प्राचार्य ने अस्पताल में सुरक्षा मुहैया कराने का वादा किया। इसके बाद जूनियर डॉक्टर काम पर लौट आए। एसआरएन के एसआईसी ने बताया कि सुरक्षा के लिए छह जवानों की तैनाती कर दी गई है।


मारपीट की घटना से आहत जूनियर डॉक्टरों के एक प्रतिनिधिमंडल ने शुक्रवार को मंडलायुक्त राजन शुक्ला, डीआईजी भगवान स्वरूप, डीएम संजय कुमार, एसएसपी केएस इमैनुअल से मुलाकात कर अपनी समस्याओं को रखा। मंडलायुक्त ने घटना की पुनरावृत्ति को रोकने के लिए अस्पताल परिसर में स्थित पुलिस चौकी, इमरजेंसी में दो-दो सशस्त्र पुलिस कर्मी तैनात करने के निर्देश दिए। यह भी निर्देश दिया कि इमरजेंसी सहित अस्पताल के दूसरे महत्वपूर्ण स्थानों पर सीसीटीवी कैमरे लगाए जाएं।
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