फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Prayagraj News ›   Woman gives new dimensions to discussions Ismat

स्त्री विमर्श को नए आयाम देती हैं इस्मत

Thu, 03 Mar 2016 12:55 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो/इलाहाबाद
अमर उजाला ब्यूरो/इलाहाबाद Updated Thu, 03 Mar 2016 12:55 AM IST
विज्ञापन
Woman gives new dimensions to discussions Ismat

इलाहाबाद विश्वविद्यालय के उर्दू विभाग की ओर से ‘इस्मत चुगताई : फिक्रोफन’ विषय पर बुधवार से शुरू हुई दो दिनी राष्ट्रीय गोष्ठी में इस्मत की रचनाओं के माध्यम से  समाज में महिलाओं की स्थिति पर चिंता व्यक्त की गई। कुलपति प्रोफेसर रतनलाल हांगलू ने कहा, समाज को क्रियाशीलता से नहीं बदला जा सकता, बल्कि, साहित्य और इतिहास के अध्ययन से समाज को सकारात्मक दिशा दी जा सकती है। घर से बाहर शालीनता के नाम पर उन्हें पर्दा कराया जाता है, लेकिन घर के भीतर उनका बुरी तरह से शोषण होता है।

विज्ञापन

प्रोफेसर अनवर पाशा ने कहा, इस्मत चुगताई में प्रतिरोध की भावना बचपन से थी। इसीलिए घरवालों के मना करने पर भी उन्होंने शिक्षा ग्रहण की। इस्मत ने समाज के घुटन भरे माहौल में स्त्रियों की मनोस्थिति को अपनी रचनाओं का विषय बनाया। उर्दू कहानीकार निगार अजीम ने इस्मत को निडर साहित्यकार बताया। प्रोफेसर अली अहमद फातमी ने कहा, इस्मत चुगताई ने रचनाओं के माध्यम से समाज की व्यवस्था पर कुठाराघात किया है। उन्होंने स्त्रियों के संबंध में एकतरफा बात नहीं की बल्कि, पूरी सामाजिक व्यवस्था को समझा और उसे प्रस्तुत किया। गोष्ठी को प्रोफेसर सगीर इफराहीम, अरशद जमील, डॉ.फाजिल हाशमी, शाह महमदू रम्ज, डॉ.शाहनवाज हुसैन, डॉ.फखरुल करीम आदि मौजूद थे।डॉ.मोहम्मद काशिफ ने संचालन किया।

विज्ञापन

इसी तरह उत्तर प्रदेश राजर्षि टंडन मुक्त विश्वविद्यालय के समाज विज्ञान विद्याशाखा की ओर से ‘मोहन से महात्मा तक की यात्रा’ विषय पर बुधवार को शुरू दो दिनी राष्ट्रीय गोष्ठी में वक्ताओं ने गांधी चिंतन पर प्रकाश डाला। मुख्य अतिथि इलाहाबाद विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर रतनलाल हांगलू ने कहा कि गांधी चिंतन से ही मानवीय विरासत को अक्षुण्ण बनाया जा सकता है। उन्हाेंने कहा कि गांधी चिंतन को अभी तक सही ढंग से आत्मसात नहीं कर सके हैं। अन्यथा, वर्तमान और अधिक सार्थक होता।

विज्ञापन
विज्ञापन

प्रोफेसर हांगलू ने कहा कि सामाजिक और सांस्कृतिक संकट से देश को बचाने के लिए घरों एवं कार्यस्थलों पर गांधीवादी चिंतन पर आधारित एक नई कार्य पद्धति को अपनाकर आगे बढ़ना होगा। प्रोफेसर हांगलू ने मोहन से महात्मा विषय पर डाक चित्र प्रदर्शनी का उद्घाटन भी किया। विशिष्ट अतिथि पूर्व सांसद तथा जैन विश्वभारती विश्वविद्यालय जयपुर के पूर्व कुलपति प्रोफेसर रामजी सिंह ने कहा कि गांधीजी जैसा व्यक्ति किसी देश, जाति और धर्म विशेष का नहीं वरन संपूर्ण मानवता का प्रतीक हैं। इस देश की नियति सर्वधर्म समभाव में है, जिसके विषय में गांधीजी ने पूर्व में पथ प्रशस्त्र कर दिया था। 


इलाहाबाद विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति प्रोफेसर आरपी मिश्रा ने कहा कि आज गांधीजी के रास्ते से हम भटक गए हैं। हर तरफ गड़बड़ियां हैं। ऐसे में शिक्षण संस्थानों की जिम्मेदारी बढ़ गई है। कुलपति प्रोफेसर एमपी दुबे ने कहा कि गांधीजी के विचाराें के अनगिनत आयाम हैं जिन पर शोध कार्य किए जा सकते हैं। संयोजक डॉ.एमएन सिंह ने अतिथियों का स्वागत किया। विषय प्रवर्तन आयोजन सचिव डॉ.दीपशिखा श्रीवास्तव ने किया। गोष्ठी में प्रोफेसर सुरेंद्र वर्मा, डॉ.अरुणोदय बाजपेयी, डॉ.जेएस सिंह, डॉ.रमा सिंह, अनिल रस्तोगी आदि ने विचार रखे। इस मौके पर गोष्ठी में प्रस्तुत शोधपत्रों पर आधारित ई-सोविनियर तथा शोध-संक्षिप्तिका का विमोचन हुआ।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed