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विवि प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए देगा माहौल
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
Updated Thu, 05 Jan 2017 01:39 AM IST
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लगातार मांग उठने के बाद इलाहाबाद विश्वविद्यालय में सिविल सेवा तथा अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए माहौल बनाने की कवायद शुरू कर दी गई है। इसके तहत एक हाल बनाने की योजना है, जहां विद्यार्थियों को तैयारी का पूरा माहौल मिलेगा। लाइब्रेरी के नियंत्रण में बनने वाले इस हाल में विश्वविद्यालय के विद्यार्थी खुद की पुस्तकें लाकर तैयारी कर सकेंगे। जरूरत पड़ने पर अध्यापकों का भी मार्गदर्शन मिलेगा। प्रतियोगी परीक्षाओं को ध्यान में रखकर इस हाल के अलावा कई अन्य योजनाएं भी प्रस्तावित हैं। पीसीएस में सिविल सेवा का प्रारूप लागू करने की पहल के बीच विश्वविद्यालय के इस फैसले से प्रतियोगियों को काफी मदद मिलने के दावे किए जा रहे हैं।
प्रारूप में बदलाव के बाद सिविल सेवा में इलाहाबाद में रहकर तैयारी करने वाले प्रतियोगियों की सफलता का ग्राफ लगातार नीचे गिरा। विगत दो वर्षों से तो संख्या एक-दो तक सिमट गई है। जबकि, 2008 में ही यहां के 73 अभ्यर्थियों ने देश की इस सबसे प्रतिष्ठित प्रतियोगिता में सफलता हासिल की थी। इस स्थिति के लिए इलाहाबाद विश्वविद्यालय में शिक्षा के गिरते स्तर को भी बड़ा कारण माना जा रहा है। ऐसे में छात्र-छात्राओं की ओर से सिविल सेवा के अनुरूप सिलेबस में बदलाव की लगातार मांग की जा रही है। सिविल सेवा के अनुरूप विशेष कक्षाएं तथा अंग्रेजी की पढ़ाई के लिए भी दबाव बनाया गया है।
विद्यार्थियों के दबाव का अब असर भी दिखने लगा है। डेलीगेसी तथा लॉज में रहने वाले बड़ी संख्या में ऐसे छात्र-छात्राएं हैं जिन्हें तैयारी के लिए उचित माहौल नहीं मिल पाता। ऐसे में वे भटकने के लिए मजबूर होते हैं। ऐसे विद्यार्थियों के लिए विश्वविद्यालय की केंद्रीय लाइब्रेरी के अंतर्गत हाल बनाने का निर्णय लिया गया है। लाइब्रेरियन डॉ.बीके सिंह ने बताया कि इसके लिए जगह चिह्ति किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि लाइब्रेरी में विद्यार्थियों को खुद की किताब ले जाने की अनुमति नहीं होती है लेकिन उस हाल में वे अपनी पुस्तक तथा नोट्स से पढ़ाई कर सकेंगे। खासतौर, पर तैयारी करने वाले विद्यार्थियों की ओर से इसकी लगातार मांग की जा रही थी। इसके मद्देनजर यह निर्णय लिया गया है।
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हिन्दी पट्टी के प्रतियोगियों के लिए अंग्रेजी बड़ी चुनौती है। बड़ी संख्या में अभ्यर्थी सिविल सेवा में अंग्रेजी के पेपर में क्वालीफाई ही नहीं कर पाते। अंग्रेजी कमजोर होने की वजह से अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं में भी पिछड़ जाते हैं। इसे ध्यान में रखकर छात्र-छात्राओें की मांग पर विश्वविद्यालय में सभी के लिए अंग्रेजी की पढ़ाई अनिवार्य करने का निर्णय लिया गया है। इसमें विद्यार्थी को पास होना अनिवार्य है। हालांकि, एक साल पहले हुए इस निर्णय को अभी लागू नहीं किया जा सका है।
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प्रारूप में बदलाव के बाद सिविल सेवा में इलाहाबाद में रहकर तैयारी करने वाले प्रतियोगियों की सफलता का ग्राफ लगातार नीचे गिरा। विगत दो वर्षों से तो संख्या एक-दो तक सिमट गई है। जबकि, 2008 में ही यहां के 73 अभ्यर्थियों ने देश की इस सबसे प्रतिष्ठित प्रतियोगिता में सफलता हासिल की थी। इस स्थिति के लिए इलाहाबाद विश्वविद्यालय में शिक्षा के गिरते स्तर को भी बड़ा कारण माना जा रहा है। ऐसे में छात्र-छात्राओं की ओर से सिविल सेवा के अनुरूप सिलेबस में बदलाव की लगातार मांग की जा रही है। सिविल सेवा के अनुरूप विशेष कक्षाएं तथा अंग्रेजी की पढ़ाई के लिए भी दबाव बनाया गया है।
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विद्यार्थियों के दबाव का अब असर भी दिखने लगा है। डेलीगेसी तथा लॉज में रहने वाले बड़ी संख्या में ऐसे छात्र-छात्राएं हैं जिन्हें तैयारी के लिए उचित माहौल नहीं मिल पाता। ऐसे में वे भटकने के लिए मजबूर होते हैं। ऐसे विद्यार्थियों के लिए विश्वविद्यालय की केंद्रीय लाइब्रेरी के अंतर्गत हाल बनाने का निर्णय लिया गया है। लाइब्रेरियन डॉ.बीके सिंह ने बताया कि इसके लिए जगह चिह्ति किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि लाइब्रेरी में विद्यार्थियों को खुद की किताब ले जाने की अनुमति नहीं होती है लेकिन उस हाल में वे अपनी पुस्तक तथा नोट्स से पढ़ाई कर सकेंगे। खासतौर, पर तैयारी करने वाले विद्यार्थियों की ओर से इसकी लगातार मांग की जा रही थी। इसके मद्देनजर यह निर्णय लिया गया है।
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हिन्दी पट्टी के प्रतियोगियों के लिए अंग्रेजी बड़ी चुनौती है। बड़ी संख्या में अभ्यर्थी सिविल सेवा में अंग्रेजी के पेपर में क्वालीफाई ही नहीं कर पाते। अंग्रेजी कमजोर होने की वजह से अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं में भी पिछड़ जाते हैं। इसे ध्यान में रखकर छात्र-छात्राओें की मांग पर विश्वविद्यालय में सभी के लिए अंग्रेजी की पढ़ाई अनिवार्य करने का निर्णय लिया गया है। इसमें विद्यार्थी को पास होना अनिवार्य है। हालांकि, एक साल पहले हुए इस निर्णय को अभी लागू नहीं किया जा सका है।