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हाथी ने दौड़ाया तो मची भगदड़, तीन बच्चे जख्मी
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बरेली/मीरगंज। नेपाल के जंगलों से भटककर आए हाथियों के हमले में बृहस्पतिवार को भी तीन बच्चों की जान जाते-जाते बच गई। शाही के परचई गांव में शोरशराबे के साथ लगातार सैकड़ों लोगों के लगातार पीछा करने से गुस्साए हाथी फिर भीड़ की तरफ दौड़ पड़े। भगदड़ मची तो तीन बच्चे हाथियों से चंद कदमों की दूरी पर गिर गए, गनीमत यह हुई बच्चों पर हमला करने से पहले ही कंटीले तारों की बाड़ हाथियों के रास्ते में आ गई। तारों में उलझकर एक हाथी की सूंड़ और एक पैर जख्मी हो गया, जिसके बाद वे लौट गए और बच्चों की जान बच गई। हालांकि भागदौड़ के बीच गिरने से तीनों बच्चे भी चुटैल हो गए।
बुधवार को शीशगढ़ के नजदीकी गांव तिगड़ी में फॉरेस्ट गार्ड हेमंत कुमार की जान लेने के बाद देर रात तक दोनों हाथी इसी गांव के आसपास टहलते रहे, लेकिन अंधेरा घिरने के बाद वन विभाग की टीम और गांव वालों की भीड़ ने पीछा छोड़ा तो रात को चलकर तिगड़ी से चलकर करीब 20 किलोमीटर दूर शाही के परचई गांव पहुंच गए। परचई में सुबह हाथियों को हरिओम के यूकेलिप्टिस के पेड़ों के बीच टहलते देखे जाने के बाद कुछ ही देर में सैकड़ों लोगों की भीड़ जुट गई। सूचना मिलने के बाद थाने की पुलिस भी मौके पर पहुंच गई। लोगों को हाथियों के पास न जाने की हिदायत दी, लेकिन फिर भी हाथियों को नजदीक से देखने के लिए लोग लगातार उनका पीछा करते रहे।
दोपहर के वक्त हाथी अचानक शोरशराबे के साथ लगातार पीछा कर रही भीड़ की ओर दौड़ पड़े। कुछ लोग हाथियों के काफी नजदीक थे। हाथियों के हमलावर होने पर भगदड़ मची को गांव के तसव्वुर खां के बेटे सलमान, फ़रमान और अरमान हाथियों से कुछ ही दूरी पर गिर गए। गुस्साए हाथी उनकी ओर बढ़े लेकिन आगे खेत में कंटीले तारों की बाड़ में फंस गए। कंटीले तार से एक हाथी की सूंड़ और पैर में घाव भी हो गया। झांसी के मुख्य वन संरक्षक पीपी सिंह ने इसकी पुष्टि करते हुए बताया कि वनविभाग के साथी अफसरों के साथ जब वह मौके पर पहुंचे तो हाथी देखने के लिए काफी भीड़ इकट्ठी थी। उन्होंने बताया कि मंडल के चारों जिलों के साथ अब लखीमपुर और रामपुर से भी वनकर्मियों की टीम को बुला लिया गया है। दोपहर बाद वनकर्मियों की टीम ने हाथियों के इर्द-गिर्द सुरक्षा घेरा बना लिया।
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गोंडा के मुख्य वन संरक्षक गोंडा सुजाय बनर्जी ने बताया कि हाथी दिन में आराम करते हैं और रात को चलते हैं। कोशिश की जा रही है कि दोनों हाथियों को हांका लगाकर उत्तराखंड के जंगलों में ले जाया जाए। उन्होंने बताया कि हाथी रात भर चलते हुए शीशगढ से सहोड़ा, बसई, रास मोहनपुर होते हुए परचई पहुंचे।
दहशत के मारे स्कूल नहीं गए बच्चे
मीरगंज। क्षेत्र के परचई गांव पहुंचे हाथियों की दहशत के चलते ग्रामीणों ने गुरुवार अपने बच्चों को स्कूल नहीं भेजा। इसके चलते क्षेत्र के अधिकांश शिक्षण संस्थानों में सन्नाटा पसरा रहा। ग्रामीणों ने बताया कि सुबह जब दोनों हाथियों के पहुंचने की सूचना मिली तो अभिभावक डर गए। ये हाथी चार लोगों को मार चुके हैं, लिहाजा उन्हें यह डर सताने लगा कि स्कूल जाते समय हाथी उनके बच्चों पर हमला न कर दें, इसी भय से अधिकांश ग्रामीणों ने अपने बच्चों को स्कूल नहीं भेजा।
गुरुद्वारा-मस्जिद से कराई अपील- हाथियों के पास न जाएं
बरेली। मीरगंज में डेरा जमाए मुख्य वन संरक्षक झांसी पीपी सिंह ने बताया कि हाथी ग्रामीणों के नजदीक पहुंचने पर ही हमलावर हो रहे हैं। अभी तक इन हाथियों ने फसल को छोड़ अन्य किसी तरह की कोई संपत्ति को नुकसान भी नहीं पहुंचाया है। मौजूदा समय में ये हाथी जहां मौजूद हैं वहां आसपास में गांव की आबादी है। लिहाजा वन विभाग का पूरा प्रयास इस बात पर है कि हाथी के निकट कोई ग्रामीण न पहुंच सके। इसके लिए क्षेत्र की सभी मस्जिद व गुरुद्वारों में मौजूद धर्मगुरुओं के माध्यम से ग्रामीणों से हाथी के निकट न जाने की अपील लाउडस्पीकर से कराई गई है। उन्होंने बताया कि इसका गुरुवार असर भी देखने को मिला। दोपहर बाद ग्रामीणों की भीड़ छटने लगी शाम तक अधिकांश ग्रामीण अपने घरों को चले गए। ऐसे में हाथी भी सकून से एक स्थान पर डटे रहे।
हांके से कामयाबी न मिली तो ट्रैंक्युलाइज करने पर विचार
वन विभाग के अफसर हालांकि हाथियों को ट्रैंक्युलाइज करने को बेहतर विकल्प नहीं मान रहे हैं लेकिन अगले कुछ दिनों में हांके के बाद भी अगर हाथियों को नेपाल की ओर वापस भेजने में कामयाबी न मिली तो उन्हें ट्रैंक्युलाइज करने पर भी विचार किया जाएगा। हालांकि अफसरों को हाथियों को ट्रैंक्युलाइज करने में भी कई दिक्कतें आने का अंदेशा है, इसलिए इस विकल्प पर सारी कोशिशें नाकाम होने पर ही विचार किए जाने की बात कही जा रही है। वन विभाग के अफसर यह भी उम्मीद जता रहे हैं कि अगर भीड़ ने पीछा छोड़ा तो हाथी खुद भी वापस अपने रास्ते चलकर नेपाल लौट सकते हैं।
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बुधवार को शीशगढ़ के नजदीकी गांव तिगड़ी में फॉरेस्ट गार्ड हेमंत कुमार की जान लेने के बाद देर रात तक दोनों हाथी इसी गांव के आसपास टहलते रहे, लेकिन अंधेरा घिरने के बाद वन विभाग की टीम और गांव वालों की भीड़ ने पीछा छोड़ा तो रात को चलकर तिगड़ी से चलकर करीब 20 किलोमीटर दूर शाही के परचई गांव पहुंच गए। परचई में सुबह हाथियों को हरिओम के यूकेलिप्टिस के पेड़ों के बीच टहलते देखे जाने के बाद कुछ ही देर में सैकड़ों लोगों की भीड़ जुट गई। सूचना मिलने के बाद थाने की पुलिस भी मौके पर पहुंच गई। लोगों को हाथियों के पास न जाने की हिदायत दी, लेकिन फिर भी हाथियों को नजदीक से देखने के लिए लोग लगातार उनका पीछा करते रहे।
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दोपहर के वक्त हाथी अचानक शोरशराबे के साथ लगातार पीछा कर रही भीड़ की ओर दौड़ पड़े। कुछ लोग हाथियों के काफी नजदीक थे। हाथियों के हमलावर होने पर भगदड़ मची को गांव के तसव्वुर खां के बेटे सलमान, फ़रमान और अरमान हाथियों से कुछ ही दूरी पर गिर गए। गुस्साए हाथी उनकी ओर बढ़े लेकिन आगे खेत में कंटीले तारों की बाड़ में फंस गए। कंटीले तार से एक हाथी की सूंड़ और पैर में घाव भी हो गया। झांसी के मुख्य वन संरक्षक पीपी सिंह ने इसकी पुष्टि करते हुए बताया कि वनविभाग के साथी अफसरों के साथ जब वह मौके पर पहुंचे तो हाथी देखने के लिए काफी भीड़ इकट्ठी थी। उन्होंने बताया कि मंडल के चारों जिलों के साथ अब लखीमपुर और रामपुर से भी वनकर्मियों की टीम को बुला लिया गया है। दोपहर बाद वनकर्मियों की टीम ने हाथियों के इर्द-गिर्द सुरक्षा घेरा बना लिया।
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गोंडा के मुख्य वन संरक्षक गोंडा सुजाय बनर्जी ने बताया कि हाथी दिन में आराम करते हैं और रात को चलते हैं। कोशिश की जा रही है कि दोनों हाथियों को हांका लगाकर उत्तराखंड के जंगलों में ले जाया जाए। उन्होंने बताया कि हाथी रात भर चलते हुए शीशगढ से सहोड़ा, बसई, रास मोहनपुर होते हुए परचई पहुंचे।
दहशत के मारे स्कूल नहीं गए बच्चे
मीरगंज। क्षेत्र के परचई गांव पहुंचे हाथियों की दहशत के चलते ग्रामीणों ने गुरुवार अपने बच्चों को स्कूल नहीं भेजा। इसके चलते क्षेत्र के अधिकांश शिक्षण संस्थानों में सन्नाटा पसरा रहा। ग्रामीणों ने बताया कि सुबह जब दोनों हाथियों के पहुंचने की सूचना मिली तो अभिभावक डर गए। ये हाथी चार लोगों को मार चुके हैं, लिहाजा उन्हें यह डर सताने लगा कि स्कूल जाते समय हाथी उनके बच्चों पर हमला न कर दें, इसी भय से अधिकांश ग्रामीणों ने अपने बच्चों को स्कूल नहीं भेजा।
गुरुद्वारा-मस्जिद से कराई अपील- हाथियों के पास न जाएं
बरेली। मीरगंज में डेरा जमाए मुख्य वन संरक्षक झांसी पीपी सिंह ने बताया कि हाथी ग्रामीणों के नजदीक पहुंचने पर ही हमलावर हो रहे हैं। अभी तक इन हाथियों ने फसल को छोड़ अन्य किसी तरह की कोई संपत्ति को नुकसान भी नहीं पहुंचाया है। मौजूदा समय में ये हाथी जहां मौजूद हैं वहां आसपास में गांव की आबादी है। लिहाजा वन विभाग का पूरा प्रयास इस बात पर है कि हाथी के निकट कोई ग्रामीण न पहुंच सके। इसके लिए क्षेत्र की सभी मस्जिद व गुरुद्वारों में मौजूद धर्मगुरुओं के माध्यम से ग्रामीणों से हाथी के निकट न जाने की अपील लाउडस्पीकर से कराई गई है। उन्होंने बताया कि इसका गुरुवार असर भी देखने को मिला। दोपहर बाद ग्रामीणों की भीड़ छटने लगी शाम तक अधिकांश ग्रामीण अपने घरों को चले गए। ऐसे में हाथी भी सकून से एक स्थान पर डटे रहे।
हांके से कामयाबी न मिली तो ट्रैंक्युलाइज करने पर विचार
वन विभाग के अफसर हालांकि हाथियों को ट्रैंक्युलाइज करने को बेहतर विकल्प नहीं मान रहे हैं लेकिन अगले कुछ दिनों में हांके के बाद भी अगर हाथियों को नेपाल की ओर वापस भेजने में कामयाबी न मिली तो उन्हें ट्रैंक्युलाइज करने पर भी विचार किया जाएगा। हालांकि अफसरों को हाथियों को ट्रैंक्युलाइज करने में भी कई दिक्कतें आने का अंदेशा है, इसलिए इस विकल्प पर सारी कोशिशें नाकाम होने पर ही विचार किए जाने की बात कही जा रही है। वन विभाग के अफसर यह भी उम्मीद जता रहे हैं कि अगर भीड़ ने पीछा छोड़ा तो हाथी खुद भी वापस अपने रास्ते चलकर नेपाल लौट सकते हैं।