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High Court : तलाक के वक्त सारे अधिकार छोड़ चुकी पत्नी को गुजारे की मांग का हक नहीं, फेमिली कोर्ट का आदेश रद्द

Sat, 06 Apr 2024 04:38 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Sat, 06 Apr 2024 04:38 PM IST
सार

कोर्ट ने कहा, पत्नी ने पति के खिलाफ भविष्य के सारे अधिकार छोड़ कर तलाक ले लिया है। इसलिए उसे अंतरिम गुजारा भत्ता पाने का हक नहीं है। यह आदेश न्यायमूर्ति विपिन चंद्र दीक्षित ने गौरव मेहता तथा अनामिका चोपड़ा की पुनरीक्षण याचिकाओं पर दिया है।
 

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Wife who has given up all rights at the time of divorce has no right to demand maintenance
अदालत। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा है कि यदि आपसी सहमति से तलाक के समय पत्नी ने गुजारा भत्ता सहित सभी अधिकार छोड़ दिए हैं तो बाद में उसे पूर्व पति से गुजारा भत्ते की मांग करने का हक नहीं है। कोर्ट ने उक्त टिप्पणी करते हुए गौतमबुद्धनगर अपर प्रधान न्यायाधीश परिवार अदालत की ओर से पत्नी को प्रतिमाह 25 हजार रुपये गुजारा भत्ता देने के आदेश को रद्द कर दिया है। कोर्ट ने पति की याचिका मंजूर करते हुए पत्नी की गुजारा भत्ता बढ़ाने की पुनरीक्षण याचिका खारिज कर दी है।

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कोर्ट ने कहा, पत्नी ने पति के खिलाफ भविष्य के सारे अधिकार छोड़ कर तलाक ले लिया है। इसलिए उसे अंतरिम गुजारा भत्ता पाने का हक नहीं है। यह आदेश न्यायमूर्ति विपिन चंद्र दीक्षित ने गौरव मेहता तथा अनामिका चोपड़ा की पुनरीक्षण याचिकाओं पर दिया है।
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मामले के अनुसार 27 फरवरी 2004 को दोनों की शादी हुई। एक बच्चा अभिमन्यु भी पैदा हुआ।16 जून 2006 को दोनों में विवाद की वजह से उन्होंने आपसी सहमति से तीस हजारी कोर्ट, नई दिल्ली में तलाक का मुकदमा दायर किया। अदालत में बयान दर्ज हुए।

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पत्नी ने कहा, भविष्य में वह पति से कोई गुजारा भत्ता नहीं मांगेगी। बेटा बालिग होने तक मां के साथ रहेगा और पिता को बेटे से नियत समय पर मुलाकात करने की अनुमति होगी। 20 अगस्त 2007 को तलाक होने के बाद दोनों अलग रह रहे हैं।

पत्नी ने बेटे की ओर से गौतमबुद्धनगर परिवार अदालत में गुजारा भत्ता दिलाने के लिए धारा 125 में अर्जी दायर की। अदालत ने बेटे को 15 हजार रुपये प्रतिमाह गुजारा भत्ता देने का आदेश दिया। फिर पत्नी ने भी धारा 125 में पूर्व पति की आय में 25 फीसदी गुजारा भत्ते की मांग की। साथ ही 50 हजार रुपये अंतरिम गुजारे की अर्जी दी।

इसे स्वीकार करते हुए परिवार अदालत ने पत्नी को 25 हजार रुपये प्रतिमाह गुजारा भत्ता पाने का हकदार माना। पति ने इसकी वैधता को चुनौती दी कि पत्नी ने सारे अधिकार छोड़ दिए हैं। इसलिए यह आदेश रद्द किया जाय। कोर्ट ने कहा, परिवार अदालत ने गलती की है और पत्नी को 25 हजार अंतरिम गुजारा भत्ता देने के आदेश को रद्द कर दिया।

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