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Prayagraj News: बच्चों को छोड़कर क्यों गई थी मजदूरी करने? जवाब में बिलख पड़ी मां
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मेजा के बेदौली में ईंट भट्ठे के लिए हुई खुदाई से बने गड्ढे में डूबने से चार मासूमों की मौत के दूसरे दिन बृहस्पतिवार को आदिवासी बस्ती में सन्नाटा पसरा रहा। घरों में चूल्हे नहीं जले। मृतक हुनर और वैष्णवी के पिता हीरा आदिवासी मुंबई से घर आए तो फफक-फफक कर रो पड़े। वह पत्नी रीना से बार-बार एक ही सवाल पूछ रहे थे, आखिर दोनों बच्चों को छोड़कर क्यों मजदूरी करने गई थी। वह जवाब न देकर बिलख पड़ी।
ईंट-भट्ठे पर लगे सीसीटीवी कैमरे को खंगाला गया तो शाम पांच बजे तक चारों मासूम गड्ढे के पास दिखे थे। उसके बाद की रिकॉर्डिंग में साफ कुछ नहीं दिख रहा है। पुलिस मामले की जांच पड़ताल में जुटी हुई है। बेदौली गांव के आदिवासी बस्ती के हीरा आदिवासी के दो बच्चे हुनर (5) और वैष्णवी (3), संजय आदिवासी का बेटा खेशारी लाल (5), विमल आदिवासी का बेटा कान्हा (5) की घर से कुछ ही दूरी पर भट्ठे के लिए हुई खुदाई से बने गड्ढे में डूबने से मौत हो गई थी। हादसे के दूसरे दिन बृहस्पतिवार को आदिवासी बस्ती में पूरी तरह से सन्नाटा पसरा रहा। आने-जाने वालों का तांता लगा रहा। घरों में चूल्हे नहीं जले।
हुनर और वैष्णवी के पिता हीरा आदिवासी हादसे के दिन घर पर नहीं थे। वह मुंबई में थे। हादसे की सूचना पर बृहस्पतिवार को घर पहुंचे तो फफक-फफक कर रो पड़े। उन्होंने कहा, दो बच्चे थे। एक साथ चले गए। सिरसा चौकी इंचार्ज अनिल पांडेय ने बताया कि ईंट-भट्ठा पर लगे सीसीटीवी कैमरे को खंगाला गया तो मंगलवार शाम पांच बजे तक चारों बच्चे दिखे हैं। उसके बाद से कुछ भी स्पष्ट नहीं दिख रहा था। मेजा के उप जिलाधिकारी सुरेंद्र प्रताप यादव ने बताया कि पीएम रिपोर्ट प्राप्त होने पर मृतक बच्चों के परिजनों को दैवीय आपदा के तहत मिलने वाली सहायता राशि की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी।
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ईंट-भट्ठे पर लगे सीसीटीवी कैमरे को खंगाला गया तो शाम पांच बजे तक चारों मासूम गड्ढे के पास दिखे थे। उसके बाद की रिकॉर्डिंग में साफ कुछ नहीं दिख रहा है। पुलिस मामले की जांच पड़ताल में जुटी हुई है। बेदौली गांव के आदिवासी बस्ती के हीरा आदिवासी के दो बच्चे हुनर (5) और वैष्णवी (3), संजय आदिवासी का बेटा खेशारी लाल (5), विमल आदिवासी का बेटा कान्हा (5) की घर से कुछ ही दूरी पर भट्ठे के लिए हुई खुदाई से बने गड्ढे में डूबने से मौत हो गई थी। हादसे के दूसरे दिन बृहस्पतिवार को आदिवासी बस्ती में पूरी तरह से सन्नाटा पसरा रहा। आने-जाने वालों का तांता लगा रहा। घरों में चूल्हे नहीं जले।
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हुनर और वैष्णवी के पिता हीरा आदिवासी हादसे के दिन घर पर नहीं थे। वह मुंबई में थे। हादसे की सूचना पर बृहस्पतिवार को घर पहुंचे तो फफक-फफक कर रो पड़े। उन्होंने कहा, दो बच्चे थे। एक साथ चले गए। सिरसा चौकी इंचार्ज अनिल पांडेय ने बताया कि ईंट-भट्ठा पर लगे सीसीटीवी कैमरे को खंगाला गया तो मंगलवार शाम पांच बजे तक चारों बच्चे दिखे हैं। उसके बाद से कुछ भी स्पष्ट नहीं दिख रहा था। मेजा के उप जिलाधिकारी सुरेंद्र प्रताप यादव ने बताया कि पीएम रिपोर्ट प्राप्त होने पर मृतक बच्चों के परिजनों को दैवीय आपदा के तहत मिलने वाली सहायता राशि की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी।
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