{"_id":"b7494dd119eb424cf6f5d5b13e5f5f26","slug":"why-are-thrown-in-the-trash-newborn-hindi-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"कूड़े में क्यों फेंके जा रहे नवजात","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
कूड़े में क्यों फेंके जा रहे नवजात
ब्यूरो/अमर उजाला इलाहाबाद
Updated Fri, 15 May 2015 01:53 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
इलाहाबाद (ब्यूरो)। नवजात के जन्म लेते ही उनको कूड़े के ढेर में फेंक देने की बढ़ती घटनाओं पर संज्ञान लेते हुए हाईकोर्ट ने केें द्र और राज्य सरकार से जवाब मांगा है। पूछा है कि इस प्रकार की घटनाओं को रोकने के लिए क्या कदम उठाए जाने चाहिए। पूर्वांचल विश्वविद्यालय के विधि छात्र अर्जुन सिंह ने जनहित याचिका दाखिल कर ऐसी अमानवीय घटनाओं को रोकने के लिए कदम उठाए जाने की मांग की है।
याचिका पर अधिवक्ता आरपी सिन्हा ने पक्ष रखते हुए बताया कि इलाहाबाद शहर और राज्य के दूसरे शहरों में आए दिन ऐसी घटनाएं हो रही हैं। अखबारों में प्रकाशित खबरों के हवाले से कहा गया कि जन्म लेते ही असुरक्षित फेंके गए अधिकांश नवजातों की मृत्यु जानवरों के नोचने की वजह से हो जाती है। बताया कि पिछले दिनों रेलवे स्टेशन पर मिली नवजात बच्ची को किसी ने गोद ले लिया, मगर पुलिस ने कोई सक्रियता नहीं दिखाई जिससे पता चल सकता कि बच्ची को कौन फेंक गया था।
मांग की गई कि मानवता को शर्मसार करने वाली ऐसी घटनाओं पर तत्काल रोक लगाई जाए। याचिका पर सुनवाई कर रही न्यायमूर्ति दिलीप गुप्ता और न्यायमूर्ति वीके मिश्र की खंडपीठ ने सरकार से जानना चाहा है कि ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए क्या किया जा रहा है। क्या सरकार ने कोई योजना बनाई है और कौन से ऐसे उपाय हो सकते हैं, जिससे घटनाएं रोकी जा सकें। याचिका पर नौ जुलाई को अगली सुनवाई होगी।
विज्ञापन
विज्ञापन
याचिका पर अधिवक्ता आरपी सिन्हा ने पक्ष रखते हुए बताया कि इलाहाबाद शहर और राज्य के दूसरे शहरों में आए दिन ऐसी घटनाएं हो रही हैं। अखबारों में प्रकाशित खबरों के हवाले से कहा गया कि जन्म लेते ही असुरक्षित फेंके गए अधिकांश नवजातों की मृत्यु जानवरों के नोचने की वजह से हो जाती है। बताया कि पिछले दिनों रेलवे स्टेशन पर मिली नवजात बच्ची को किसी ने गोद ले लिया, मगर पुलिस ने कोई सक्रियता नहीं दिखाई जिससे पता चल सकता कि बच्ची को कौन फेंक गया था।
विज्ञापन
मांग की गई कि मानवता को शर्मसार करने वाली ऐसी घटनाओं पर तत्काल रोक लगाई जाए। याचिका पर सुनवाई कर रही न्यायमूर्ति दिलीप गुप्ता और न्यायमूर्ति वीके मिश्र की खंडपीठ ने सरकार से जानना चाहा है कि ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए क्या किया जा रहा है। क्या सरकार ने कोई योजना बनाई है और कौन से ऐसे उपाय हो सकते हैं, जिससे घटनाएं रोकी जा सकें। याचिका पर नौ जुलाई को अगली सुनवाई होगी।
विज्ञापन