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महाकुंभ हादसों में हुईं मौतों और लापता लोगों का पता कौन लगाएगा: हाईकोर्ट

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Thu, 20 Feb 2025 01:38 AM IST
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Who will find out the deaths and missing people in Mahakumbh accidents: High Court
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने महाकुंभ में मौनी अमावस्या पर हुए हादसों को लेकर प्रदेश सरकार से पूछा है कि न्यायिक आयोग का काम घटना के कारणों और बचाव संबंधी सुझाव देना है, लेकिन मौतों और लापता लोगों का पता कौन लगाएगा? कोर्ट ने 24 फरवरी तक विस्तृत जानकारी तलब की है।
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हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के पूर्व महासचिव सुरेश चंद्र पांडेय की जनहित याचिका पर बुधवार को सुनवाई करते हुए मुख्य न्यायाधीश अरुण भंसाली व न्यायमूर्ति शैलेंद्र क्षितिज की खंडपीठ ने यह सवाल पूछा। याचिका में हाईकोर्ट की निगरानी में उच्च स्तरीय जांच कराने की मांग की गई है।
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मीडिया रिपोर्ट और हादसों की वायरल वीडियो फुटेज पेश करते हुए दलील दी गई कि याची मेले में ही कल्पवास कर रहा था। मौनी अमावस्या पर भगदड़ भी एक नहीं, बल्कि तीन जगह हुई थी। याची ने दावा किया कि सरकार ने मृतकों की संख्या भी गलत बताई।
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दलील दी कि घटना के बाद खोया-पाया केंद्र से घोषणा कराने पहुंचे परिजनों से लापता लोगों के आधार कार्ड मांगे गए, जबकि यह लापता के ही पास थे। कुछ मीडिया रिपोर्ट में मृतकों की संख्या सौ से ऊपर बताई गई है। यह संवेदनशील मामला है, जिसमें सरकार व प्रशासनिक अधिकारियों की भूमिका संदिग्ध है। लिहाजा, हाईकोर्ट की निगरानी में उच्च स्तरीय जांच कमेटी का गठन आवश्यक है।
सरकार की ओर से पेश अपर महाधिवक्ता मनीष गोयल ने याचिका का विरोध किया। कहा, हादसे की जांच के लिए सरकार न्यायिक आयोग का गठन पहले ही कर चुकी है। आयोग एक माह में बताएगा कि घटना के कारण क्या थे और इसकी पुनरावृत्ति रोकने के लिए क्या किया जाना चाहिए।

इन तर्कों से असंतुष्ट कोर्ट ने कहा कि अधिसूचना से प्रथम दृष्टया प्रतीत होता है कि आयोग का काम घटना के कारणों और बचाव के सुझाव देने तक ही सीमित है। सरकार मृतकों और लापता लोगों का पता कैसे लगाएगी, यह अस्पष्ट है। सरकार इस पर 24 फरवरी तक विस्तृत रिपोर्ट पेश करे।
कोर्ट ने याची की ओर से हलफनामे संग पेश किए गए हादसों की वीडियाे फुटेज सुरक्षित रखने का निर्देश भी दिया है।

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