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हमें कोरोना के साथ जीना सीखना होगाः प्रोफेसर सुधाकर पांडा
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हमें कोरोना के साथ जीना सीखना होगा और व्यापक स्तर पर अपने व्यवहार में तीव्र परिवर्तन भी करना होगा। यह बात बिरला ग्लोबल विश्वविद्यालय, भुवनेश्वर के कुलपति प्रो. सुधाकर पांडा ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय के अर्थशास्त्र विभाग की ओर से आयोजित वेबिनार में कही।
‘कोविड-19 के पश्तात भारतीय अर्थव्यवस्था-चुनौतियां एवं संभावनाएं’ विषय पर आयोजित ई-संवाद में प्रो. पांडा ने कहा कि कोरोना महामारी ने जहां एक ओर अप्रत्याशित संकट की स्थिति उत्पन्न की है, वहीं इससे जूझने के लिए एक नए साहस का संचार भी किया है। इस त्रासदी ने सरकार से लेकर आम लोगों को एक बड़ी सीख दी है। वेबिनार का संचालन कर रहे अर्थशास्त्र के विभागाध्यक्ष प्रो. प्रशांत घोष ने कहा कि इस महामारी के कारण भारत को पांच ट्रिलियन की अर्थव्यवसथा बनाने का सपना अकाल मृत्यु को प्राप्त होगा और किसानों की आय को दोगुना करने का लक्ष्य अभी प्राप्त नहीं हो सकेगा। यह महामारी भारत की सामाजिक-आर्थिक प्रणाली में व्यापक स्तर पर बदलाव लाएगी और देश का वित्तीय स्वास्थ्य एक लंबी अवधि तक चिंताजनक बना रहेगा। इस कार्यक्रम में इविवि के विद्यार्थियों के साथ देश-विदेश के विभिन्न शिक्षण संस्थानों से बड़ी संख्या में अभ्यर्थियों ने प्रतिभाग किया।
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‘कोविड-19 के पश्तात भारतीय अर्थव्यवस्था-चुनौतियां एवं संभावनाएं’ विषय पर आयोजित ई-संवाद में प्रो. पांडा ने कहा कि कोरोना महामारी ने जहां एक ओर अप्रत्याशित संकट की स्थिति उत्पन्न की है, वहीं इससे जूझने के लिए एक नए साहस का संचार भी किया है। इस त्रासदी ने सरकार से लेकर आम लोगों को एक बड़ी सीख दी है। वेबिनार का संचालन कर रहे अर्थशास्त्र के विभागाध्यक्ष प्रो. प्रशांत घोष ने कहा कि इस महामारी के कारण भारत को पांच ट्रिलियन की अर्थव्यवसथा बनाने का सपना अकाल मृत्यु को प्राप्त होगा और किसानों की आय को दोगुना करने का लक्ष्य अभी प्राप्त नहीं हो सकेगा। यह महामारी भारत की सामाजिक-आर्थिक प्रणाली में व्यापक स्तर पर बदलाव लाएगी और देश का वित्तीय स्वास्थ्य एक लंबी अवधि तक चिंताजनक बना रहेगा। इस कार्यक्रम में इविवि के विद्यार्थियों के साथ देश-विदेश के विभिन्न शिक्षण संस्थानों से बड़ी संख्या में अभ्यर्थियों ने प्रतिभाग किया।
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