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Prayagraj : झूंसी के समुद्र कूप का पानी पीने लायक नहीं, मानक से अधिक मिले हैं बैक्टीरिया व नाइट्राइट्स

Thu, 28 Mar 2024 04:14 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Thu, 28 Mar 2024 04:14 PM IST
सार

समुद्र कूप का काफी धार्मिक महत्व है। यहां दूर-दूर से लोग आते हैं। इसे ध्यान में रखते इसके सौंदर्यीकरण की योजना बनाई गई है। इसी वजह से कूप का पानी पीने लायक है या नहीं इसकी जांच का भी निर्णय लिया गया। पहले चरण में जलकल विभाग की प्रयोगशाला में जांच कराई गई, जिसमें पानी पीने योग्य मिला।

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Water of Samudra well of Jhunsi is not fit for drinking, bacteria and nitrites have been found more than the s
समुद्रकूप। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

झूंसी के समुद्र कूप का पानी पीने लायक नहीं है। लखनऊ के लैब से आई रिपोर्ट के मुताबिक कूप में नुकसान पहुंचाने वाले बैक्टीरिया के अलावा नाइट्राइट्स भी पाए गए हैं, जो सेहत के लिए खतरनाक हैं। आसपास के लोग तो नहीं लेकिन, बाहर से आने वाले श्रद्धालु इसका पानी पी लेते हैं। रिपोर्ट आने के बाद कुएं की सफाई समेत अन्य विकल्पों पर विचार शुरू हो गया है।

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समुद्र कूप का काफी धार्मिक महत्व है। यहां दूर-दूर से लोग आते हैं। इसे ध्यान में रखते इसके सौंदर्यीकरण की योजना बनाई गई है। इसी वजह से कूप का पानी पीने लायक है या नहीं इसकी जांच का भी निर्णय लिया गया। पहले चरण में जलकल विभाग की प्रयोगशाला में जांच कराई गई, जिसमें पानी पीने योग्य मिला। वहीं, इसके बाद आगे की जांच के जल के नमूने लखनऊ स्थित राज्य स्वास्थ्य संस्थान के लैब में भेजा गया।
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पानी की जांच तीन मानकों, नाइट्राइटस, प्रदूषण और जीवाणु के स्तर पर की गई। जांच में तीनों ही स्तर पर पानी ठीक नहीं मिला। पानी में नाइट्राइट्स शून्य मिलना चाहिए, लेकिन इसमें 0.3 यूनिट पाया गया। इसी तरह से नुकसान पहुंचाने वाले जीवाणु भी मानक से कहीं अधिक पाए गए। प्रदूषण लेवल भी अधिक पाया गया।
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अधिशासी अभियंता मुख्यालय व लैब के प्रभारी शिवम मिश्रा का कहना है कि रिपोर्ट आ गई है। अच्छी रिपोर्ट नहीं है। कूप की सफाई कराके पानी पीने योग्य हो किया जा सकता है या नहीं इसे देखा जाएगा।

वर्षों से एकत्रित, गंदे पानी में पाए जाते हैं नाइट्राइट्स एवं जीवाणु

जलकल विभाग के विशेषज्ञों का कहना है कि वर्षों से एकत्रित व गंदे पानी में नाइट्राइट्स पाए जाते हैं। इसके अलावा जो जीवाणु पाए गए हैं वे भी गंदे पानी में मिलते हैं। क्योंकि, समुद्र कूप का पानी उपयोग में नहीं है। इसके अलावा वह खुला है। ऐसे में कचरा होने के साथ जानवर भी गिरकर मर सकते हैं। इसलिए उसमें हानिकारक तत्व पाए गए हैं।

सफाई व क्लोरीनेशन के बाद पीने योग्य हो सकता है पानी

जलकल के अफसर अभी खुलकर बोलने से बच रहे हैं, लेकिन उनका कहना है कि कूप की सफाई कराके, नियमित क्लोरीनेशन से पानी को पीने योग्य बनाया जा सकता है। ऐसे मामले में 70 फीसदी सफलता की उम्मीद होती है। इसके लिए कूप से कचरा बाहर निकालने के साथ पंप के माध्यम से खराब पानी बाहर निकाला जा सकता है। यदि शुद्ध पानी का स्रोत मिल गया तो दिक्कत दूर हो सकती है। उनका कहना है कि इस विचार भी किया जा रहा है। अधिशासी अभियंता का कहना है कि कूप की सफाई की योजना बनाई गई है। क्लोरीनेशन समेत अन्य उपाय किए जाएंगे।

..लेकिन होगा सौंदर्यीकरण
कूप के पानी की गुणवत्ता की रिपोर्ट भले ही नकारात्मक आई हो, लेकिन उसका जीर्णोद्धार व सौंदर्यीकरण कराया जाएगा। इसका प्रस्ताव तैयार हो गया है। जल्द काम शुरू होगा।


विशेषज्ञों के माध्यम से रिपोर्ट का अध्ययन कराया जाएगा। कूप के जल को साफ कराया जा सकता है या नहीं इसे देखा जाएगा। पानी पीने योग्य बनाने को सभी कदम उठाए जाएंगे। समुद्र कूप का धार्मिक महत्व है। यहां ब्रह्माजी ने यज्ञ किया था। कूप व आसपास के क्षेत्र का सौंदर्यीकरण कराया जाएगा। - गणेश केसरवानी, महापौर


समुद्र कूप का महत्व

मान्यता है कि ब्रह्मा जी ने सृष्टि का पहला यज्ञ प्रयाग में करते समय सभी देवी-देवताओं समुद्र, नदियों व अन्य जल स्रोतों को आमंत्रित किया था। यज्ञ समाप्त होने पर जब लोग वापस जाने लगे तो ब्रह्माजी ने सभी से अपना-अपना अंश प्रयाग में छोड़ने का आह्वान किया। उनके आह्वान पर सभी समुद्र, नदियों व अन्य स्रोत ने अपने-अपने अंश छोड़े। मान्यता है कि इसी समुद्र कूप में सभी के अंश समाहित हैं। इसीलिए इसे समुद्र कूप कहा जाता है।


 
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