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सिर्फ अन्नदाता की आंखों में बचा पानी
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
Updated Mon, 11 Apr 2016 02:31 AM IST
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दूर-दराज से पानी ले अाते ग्रामीण।
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
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कई वर्षों से औसत से कम वर्षा का दंश झेल रहे तहसील क्षेत्र कोरांव में इस वर्ष अभूतपूर्व जल संकट उत्पन्न हो गया है। प्राकृतिक जलश्रोतों के सूखने के कारण न केवल ग्रामीणों बल्कि पशु-पक्षियों के भी जीवन पर संकट के बादल मंडराने लगे हैं। जन जीवन पर मंड़राते इस संकट के प्रति शासन एवं प्रशासन की उदासीनता समझ से परे है।
खेती के बाद जीवन पर संकट
औसत से कम बरसात ने तहसील क्षेत्र कोरांव के जनजीवन को पूरी तरह बेपटरी कर दिया है। एक तरफ जहां पानी की कमी के कारण इस क्षेत्र के किसानों की रीढ़ टूट चुकी है, वहीं अब पेयजल संकट के कारण पूरा इलाका हासिए पर आ चुका है। पानी की कमी ने तहसील क्षेत्र कोरांव के पाल और उपरौध इलाके में पहले ही अपनी छाप छोड़ चुकी है। एक तरफ जहां इस क्षेत्र के मड़फा, सिरावल, पटेहरी, सलैया, बरहुला, केड़वर, झरवनिया, रुचई का पूरा, परोहनी, रत्यौरा, कुरहरा, कूदर, नेवारी, लतीफपुर, बेलवनिया, पारा, देवघाट, कोलडिहवा, संसारपुर, हड़िया, बड़ोखर आदि गावाें में खरीफ की फसल बिना पानी के सूख गई। दूसरी ओर हजारों एकड़ भूमि बिना रबी की बुआई के परती ही पड़ी रह गई। इस प्रकार खेती की बर्बादी के कारण अन्नदाता का आर्थिक ढांचा जहां पहले ही चरमरा चुका है वहीं अब पेयजल संकट के कारण पशुधन सहित समूचा जनजीवन खतरे में है।
प्राकृतिक जलश्रोतों के सूखने से विकराल हुयी समस्या
विकास क्रम में काफी पिछड़ा होने के बावजूद तहसील क्षेत्र कोरांव प्राकृतिक नेमतों से काफी समृद्ध माना जाता रहा है। दक्षिण में जहां कैमूर पर्वत श्रृंखला इस क्षेत्र के लोगों को सुरक्षित एवं संवर्धित करती रही है। इसकी कोख से निकली अनेक नदियां अपने जल से आंचलिक जनजीवन का पोषण करती रही हैं। इस वर्ष बेलन के अलावा नैना, टुड़ियारी, सेवटी, गुरमा, लपरी तथा गदहिया नदी के सूखने से पूरे क्षेत्र में हाहाकार मचा हुआ है। कमोवेश यही हाल तालाबों का भी है। कुल 786 तलाबों के सापेक्ष महज 42 तालाबों में ही आंशिक जल अवशेष रह गया है। इसी प्रकार क्षेत्र में कुल 1853 कुएं हैं जिनमें से 362 कुएं पूरी तरह सूख चुके है। प्राकृतिक जलश्रोतों के सूखने का दुष्परिणाम यह है कि जलस्तर काफी नीचे चला गया है। फलत: क्षेत्र में मौजूद कुल 3137 इंडिया मार्का हैंडपम्पों के सापेक्ष 1343 हैडपम्पों ने पानी देना बन्द कर दिया है। हालात यह है कि पूरे क्षेत्र में पीने के पानी के लिए हाहाकार मचा हुआ है।
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जंगली जानवरों ने किया गांवों की ओर रुख
प्राकृतिक नदियों एवं झरनाें के सूखने के कारण पहाड़ों पर रहने वाले हिंसक जानवरों ने पानी की तलाश में गंावों की ओर रुख कर दिया है। कैमूर पर्वत श्रृंखला की तलहटी में बसे संसारपुर, बैठकवा, महुली, पियरी, झलमल, हनुमानगंज, पैतिहा, हरदौन, बड़ोखर आदि गांवों के लोगों का कहना है कि रात में भालू, बन्दर, लकड़बग्घा, हिरन, भेड़िया, तेंदुआ जैसे जानवर प्राय: देखे जाते हैं। पानी की तलाश में उनका गंावों की ओर पलायन स्वाभाविक है।
जलाशयों के सूखने से और बिगड़े हालात-
काफी अर्से से जलापूर्ति के प्रमुख वाहक रहे जलाशयों के सूखने से हालात और भी बदतर हो गए हैं। इस बार मेजा तथा सिरसी जलाशयों ने पूरी तरह धोखा दे दिया। मेजा जलाशय की क्षमता बारह हजार क्यूसिक घनफिट तथा सिरसी जलाशय की क्षमता दस हजार क्यूसिक होने के कारण बरसात में जहां ये पूरी तरह लबालब होते थे वहीं इस वर्ष अगस्त एवं सितम्बर माह में ही ये आधे से ज्यादा सूख गए। खरीफ की फसल को बचाने के प्रयास में इन जलाशयों की हालत खस्ता हो गयी। इस समय नहरों में धूल उड़ रही है और तालाब पूरी तरह प्यासे हैं।
कई गांवों में गंभीर जलसंकट, प्रशासन से मांगे 45 टैंकर-
अप्रैल माह के शुरु आती दिनों में ही क्षेत्र के कई गांवों में गम्भीर जलसंकट पैदा हो गया है। बड़ोखर, देवघाट, बैठकवा, नई बस्ती, छड़गड़ा, बेलहट, मंगलापुरी, पारा, लैनहा, बभनपट्टी, पुरारुचई, बरहुला, जमोहरा, लतीफपुर, बेढ़ीपट्टी, धाव, साजी, संसारपुर, हरदौन तथा हड़िया आदि गंाव भीषण जलसंकट की जद में है। विगत वर्षो में गर्मी के दिनो में पूरे क्षेत्र में जलापूर्ति के लिये जहां मात्र दस-ग्यारह टैंकराें से काम चल जाता था वहीं इस वर्ष एसडीएम सुनील कुमार मिश्र ने केवल विकास खण्ड कोरांव के लिए 45 टैंकराें की मंाग की है।
फोटो कैप्सन 10 मेजा 01: अंतरी अमिलिया में सूखा पड़ा कुंआ।
फोटो कैप्सन 10 मेजा 02: बरसैता में खराब पड़ा हैंडपंप, शिकायत के बाद भी नहीं दूर की गई खराबी।
बरसैता में जलाश्रोत से पानी पीने को मजबूर हैं ग्रामीण
मेजा के पाठा क्षेत्र में पानी की समस्या विकराल होती जा रही है। चैत में जेठ जैसे हालात हो गए हैं। हैंडपंप और कुएं सूख गए हैं। कई बार की गई शिकायत के बाद भी शासन-प्रशासन की ओर से किसी प्रकार का कदम नहीं उठाया जा रहा है। जिससे इलाके के लोग पानी की समस्या से जूझ रहे हैं। तालाब और पोखरे भी सूख गए हैं जिससे जानवरों के सामने भी पानी की समस्या विकराल होती जा रही है। बता दें कि जलस्तर नीचे खिसकने से मेजा के बरसैता, सिंहपुर, कोंहड़ार, कोना, ईंटवा, सुजनी, दरी, समोधा, अंतरी अमिलिया, तिजगा, बंधवा, भसुंदर, भटौती सहित दर्जनों गांवों में इस समय पानी की समस्या विकराल हो गई है। हैंडपंप पूरी तरह से सूख गए। कुंए भी सूख गए हैं। बरसैता गांव के सारे हैंडपंप सूख जाने से ग्रामीण गांव के दक्षिणी क्षोर पर पहाड़ पर हो रहे जलाश्रोत से पानी पीने को मजबूर हैं। बरसैता के प्रधान छक्कू लाल पाल ने बताया कि पानी समस्या की शिकायत कई दफे स्थानीय प्रशासन से किया गया है। हैंडपंप रीबोर नहीं कराए जा रहे हैं। कोंहड़ार के रंजय मिश्र ने बताया कि गांव में एक-दो हैंडपंप पानी दे भी रहे हैं तो सुबह इतनी भीड़ हो जा रही है पानी मिलना मुश्किल हो जा रहा है।
‘जिन गांवों में वास्तव में पानी की किल्लत हैं वहां पर टैंकर से पानी उपलब्ध कराने की रणनीति तय की गई है। जल्द ही पानी गांवों में पहुंचना शुरू हो जाएगा। रही बात तालाब और पोखरों में पानी भरने के लिए संबंधित राजस्व कर्मियों को लगाया गया है। राजस्व कर्मी संबंधित प्रधानों से मिलकर ए कार्य करेंगे। पशुओं के स्वास्थ्य को लेकर संबंधित पशु चिकित्साधिकारियों को भी सतर्क कर दिया गया है।
आशीष कुमार मिश्र, उप जिलाधिकारी मेजा’
‘जिन गांवों में पानी संकट से ग्रामीण जूझ रहे हैं वहां पर सोमवार से टैंकर के माध्यम से पानी उपलब्ध कराने के लिए एसडीएम को निर्देशित किया गया है। अगर, इस कार्य में प्रशासन की तरफ से किसी प्रकार की लापरवाही की जाती है तो कार्रवाई के लिए शासन को पत्र भेजा जाएगा।
गिरीश चन्द्र उर्फ गामा पाण्डेय, विधायक मेजा’
पेयजल योजनाओं से भी नहीं मिल पा रहा है पानी
मेजा। मेजा की पेयजल योजनाओं की भी स्थिति बद से बदतर हो गई है। जलस्तर नीचे खिसकने से पर्याप्त मात्रा में पानी लोगों को नहीं मिल पा रहा है। धरमपुर के पूर्व प्रधान रविकांत मिश्र ने बताया कि कई मजरों में पिछले दो माह से पानी नहीं मिल पा रहा है। कई बार शिकायत की गई लेकिन किसी प्रकार की सुनवाई नहीं हुई। जिससे समस्या जस की तस बनी हुई है। जेवनिया पेयजल योजना सन् 2007 में स्थापित किया गया था। लेकिन जलस्तर नीचे खिसकने से कई मजरों में पानी की सतप्लाई बंद पड़ी है। जेवनिया की प्रधान रुचि तिवारी ने बताया कि यही स्थिति रही तो जल्द ही योजना से जुड़े लोग बेपानी हो जाएंगे। इसकी शिकायत प्रशासन से की गई है।
मेजा जलाशय पड़ा है सूखा, कैसे भरे जाएंगे तालाब और पोखरे
मेजा। अवर्षण की स्थिति में मेजा जलाशय पूरी तरह से काफी दिनों से सूखा पड़ा है। ऐसी स्थिति में नहर के माध्यम से तालाब एवं पोखरे भरने का किया जा रहा दावा फिर झूठा साबित होगा। क्योंकि मेजा जलाशय में पानी है नहीं तो नहर के माध्यम से तालाब एवं पोखरा भरना संभव नहीं है। मेजा जलाशय यानि सिरसी डैम मिर्जापुर में स्थापित है। उक्त जलाशय से बेलन नहर की कई माइनरों में पानी छोड़ा जाता है। लेकिन इधर, छह माह से मेजा जलाशय पूरी तरह से सूखा पड़ा है।
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खेती के बाद जीवन पर संकट
औसत से कम बरसात ने तहसील क्षेत्र कोरांव के जनजीवन को पूरी तरह बेपटरी कर दिया है। एक तरफ जहां पानी की कमी के कारण इस क्षेत्र के किसानों की रीढ़ टूट चुकी है, वहीं अब पेयजल संकट के कारण पूरा इलाका हासिए पर आ चुका है। पानी की कमी ने तहसील क्षेत्र कोरांव के पाल और उपरौध इलाके में पहले ही अपनी छाप छोड़ चुकी है। एक तरफ जहां इस क्षेत्र के मड़फा, सिरावल, पटेहरी, सलैया, बरहुला, केड़वर, झरवनिया, रुचई का पूरा, परोहनी, रत्यौरा, कुरहरा, कूदर, नेवारी, लतीफपुर, बेलवनिया, पारा, देवघाट, कोलडिहवा, संसारपुर, हड़िया, बड़ोखर आदि गावाें में खरीफ की फसल बिना पानी के सूख गई। दूसरी ओर हजारों एकड़ भूमि बिना रबी की बुआई के परती ही पड़ी रह गई। इस प्रकार खेती की बर्बादी के कारण अन्नदाता का आर्थिक ढांचा जहां पहले ही चरमरा चुका है वहीं अब पेयजल संकट के कारण पशुधन सहित समूचा जनजीवन खतरे में है।
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प्राकृतिक जलश्रोतों के सूखने से विकराल हुयी समस्या
विकास क्रम में काफी पिछड़ा होने के बावजूद तहसील क्षेत्र कोरांव प्राकृतिक नेमतों से काफी समृद्ध माना जाता रहा है। दक्षिण में जहां कैमूर पर्वत श्रृंखला इस क्षेत्र के लोगों को सुरक्षित एवं संवर्धित करती रही है। इसकी कोख से निकली अनेक नदियां अपने जल से आंचलिक जनजीवन का पोषण करती रही हैं। इस वर्ष बेलन के अलावा नैना, टुड़ियारी, सेवटी, गुरमा, लपरी तथा गदहिया नदी के सूखने से पूरे क्षेत्र में हाहाकार मचा हुआ है। कमोवेश यही हाल तालाबों का भी है। कुल 786 तलाबों के सापेक्ष महज 42 तालाबों में ही आंशिक जल अवशेष रह गया है। इसी प्रकार क्षेत्र में कुल 1853 कुएं हैं जिनमें से 362 कुएं पूरी तरह सूख चुके है। प्राकृतिक जलश्रोतों के सूखने का दुष्परिणाम यह है कि जलस्तर काफी नीचे चला गया है। फलत: क्षेत्र में मौजूद कुल 3137 इंडिया मार्का हैंडपम्पों के सापेक्ष 1343 हैडपम्पों ने पानी देना बन्द कर दिया है। हालात यह है कि पूरे क्षेत्र में पीने के पानी के लिए हाहाकार मचा हुआ है।
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प्राकृतिक नदियों एवं झरनाें के सूखने के कारण पहाड़ों पर रहने वाले हिंसक जानवरों ने पानी की तलाश में गंावों की ओर रुख कर दिया है। कैमूर पर्वत श्रृंखला की तलहटी में बसे संसारपुर, बैठकवा, महुली, पियरी, झलमल, हनुमानगंज, पैतिहा, हरदौन, बड़ोखर आदि गांवों के लोगों का कहना है कि रात में भालू, बन्दर, लकड़बग्घा, हिरन, भेड़िया, तेंदुआ जैसे जानवर प्राय: देखे जाते हैं। पानी की तलाश में उनका गंावों की ओर पलायन स्वाभाविक है।
जलाशयों के सूखने से और बिगड़े हालात-
काफी अर्से से जलापूर्ति के प्रमुख वाहक रहे जलाशयों के सूखने से हालात और भी बदतर हो गए हैं। इस बार मेजा तथा सिरसी जलाशयों ने पूरी तरह धोखा दे दिया। मेजा जलाशय की क्षमता बारह हजार क्यूसिक घनफिट तथा सिरसी जलाशय की क्षमता दस हजार क्यूसिक होने के कारण बरसात में जहां ये पूरी तरह लबालब होते थे वहीं इस वर्ष अगस्त एवं सितम्बर माह में ही ये आधे से ज्यादा सूख गए। खरीफ की फसल को बचाने के प्रयास में इन जलाशयों की हालत खस्ता हो गयी। इस समय नहरों में धूल उड़ रही है और तालाब पूरी तरह प्यासे हैं।
कई गांवों में गंभीर जलसंकट, प्रशासन से मांगे 45 टैंकर-
अप्रैल माह के शुरु आती दिनों में ही क्षेत्र के कई गांवों में गम्भीर जलसंकट पैदा हो गया है। बड़ोखर, देवघाट, बैठकवा, नई बस्ती, छड़गड़ा, बेलहट, मंगलापुरी, पारा, लैनहा, बभनपट्टी, पुरारुचई, बरहुला, जमोहरा, लतीफपुर, बेढ़ीपट्टी, धाव, साजी, संसारपुर, हरदौन तथा हड़िया आदि गंाव भीषण जलसंकट की जद में है। विगत वर्षो में गर्मी के दिनो में पूरे क्षेत्र में जलापूर्ति के लिये जहां मात्र दस-ग्यारह टैंकराें से काम चल जाता था वहीं इस वर्ष एसडीएम सुनील कुमार मिश्र ने केवल विकास खण्ड कोरांव के लिए 45 टैंकराें की मंाग की है।
फोटो कैप्सन 10 मेजा 01: अंतरी अमिलिया में सूखा पड़ा कुंआ।
फोटो कैप्सन 10 मेजा 02: बरसैता में खराब पड़ा हैंडपंप, शिकायत के बाद भी नहीं दूर की गई खराबी।
बरसैता में जलाश्रोत से पानी पीने को मजबूर हैं ग्रामीण
मेजा के पाठा क्षेत्र में पानी की समस्या विकराल होती जा रही है। चैत में जेठ जैसे हालात हो गए हैं। हैंडपंप और कुएं सूख गए हैं। कई बार की गई शिकायत के बाद भी शासन-प्रशासन की ओर से किसी प्रकार का कदम नहीं उठाया जा रहा है। जिससे इलाके के लोग पानी की समस्या से जूझ रहे हैं। तालाब और पोखरे भी सूख गए हैं जिससे जानवरों के सामने भी पानी की समस्या विकराल होती जा रही है। बता दें कि जलस्तर नीचे खिसकने से मेजा के बरसैता, सिंहपुर, कोंहड़ार, कोना, ईंटवा, सुजनी, दरी, समोधा, अंतरी अमिलिया, तिजगा, बंधवा, भसुंदर, भटौती सहित दर्जनों गांवों में इस समय पानी की समस्या विकराल हो गई है। हैंडपंप पूरी तरह से सूख गए। कुंए भी सूख गए हैं। बरसैता गांव के सारे हैंडपंप सूख जाने से ग्रामीण गांव के दक्षिणी क्षोर पर पहाड़ पर हो रहे जलाश्रोत से पानी पीने को मजबूर हैं। बरसैता के प्रधान छक्कू लाल पाल ने बताया कि पानी समस्या की शिकायत कई दफे स्थानीय प्रशासन से किया गया है। हैंडपंप रीबोर नहीं कराए जा रहे हैं। कोंहड़ार के रंजय मिश्र ने बताया कि गांव में एक-दो हैंडपंप पानी दे भी रहे हैं तो सुबह इतनी भीड़ हो जा रही है पानी मिलना मुश्किल हो जा रहा है।
‘जिन गांवों में वास्तव में पानी की किल्लत हैं वहां पर टैंकर से पानी उपलब्ध कराने की रणनीति तय की गई है। जल्द ही पानी गांवों में पहुंचना शुरू हो जाएगा। रही बात तालाब और पोखरों में पानी भरने के लिए संबंधित राजस्व कर्मियों को लगाया गया है। राजस्व कर्मी संबंधित प्रधानों से मिलकर ए कार्य करेंगे। पशुओं के स्वास्थ्य को लेकर संबंधित पशु चिकित्साधिकारियों को भी सतर्क कर दिया गया है।
आशीष कुमार मिश्र, उप जिलाधिकारी मेजा’
‘जिन गांवों में पानी संकट से ग्रामीण जूझ रहे हैं वहां पर सोमवार से टैंकर के माध्यम से पानी उपलब्ध कराने के लिए एसडीएम को निर्देशित किया गया है। अगर, इस कार्य में प्रशासन की तरफ से किसी प्रकार की लापरवाही की जाती है तो कार्रवाई के लिए शासन को पत्र भेजा जाएगा।
गिरीश चन्द्र उर्फ गामा पाण्डेय, विधायक मेजा’
पेयजल योजनाओं से भी नहीं मिल पा रहा है पानी
मेजा। मेजा की पेयजल योजनाओं की भी स्थिति बद से बदतर हो गई है। जलस्तर नीचे खिसकने से पर्याप्त मात्रा में पानी लोगों को नहीं मिल पा रहा है। धरमपुर के पूर्व प्रधान रविकांत मिश्र ने बताया कि कई मजरों में पिछले दो माह से पानी नहीं मिल पा रहा है। कई बार शिकायत की गई लेकिन किसी प्रकार की सुनवाई नहीं हुई। जिससे समस्या जस की तस बनी हुई है। जेवनिया पेयजल योजना सन् 2007 में स्थापित किया गया था। लेकिन जलस्तर नीचे खिसकने से कई मजरों में पानी की सतप्लाई बंद पड़ी है। जेवनिया की प्रधान रुचि तिवारी ने बताया कि यही स्थिति रही तो जल्द ही योजना से जुड़े लोग बेपानी हो जाएंगे। इसकी शिकायत प्रशासन से की गई है।
मेजा जलाशय पड़ा है सूखा, कैसे भरे जाएंगे तालाब और पोखरे
मेजा। अवर्षण की स्थिति में मेजा जलाशय पूरी तरह से काफी दिनों से सूखा पड़ा है। ऐसी स्थिति में नहर के माध्यम से तालाब एवं पोखरे भरने का किया जा रहा दावा फिर झूठा साबित होगा। क्योंकि मेजा जलाशय में पानी है नहीं तो नहर के माध्यम से तालाब एवं पोखरा भरना संभव नहीं है। मेजा जलाशय यानि सिरसी डैम मिर्जापुर में स्थापित है। उक्त जलाशय से बेलन नहर की कई माइनरों में पानी छोड़ा जाता है। लेकिन इधर, छह माह से मेजा जलाशय पूरी तरह से सूखा पड़ा है।