{"_id":"5f1de45c8ebc3e9f66756605","slug":"vicious-tigress-walking-back-again-as-experts-return-meerganj-news-bly4140635178","type":"story","status":"publish","title_hn":"शातिर बाघिन.. विशेषज्ञों के लौटते ही फिर शुरू की चहलकदमी","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
शातिर बाघिन.. विशेषज्ञों के लौटते ही फिर शुरू की चहलकदमी
विज्ञापन
demo photo
- फोटो : demo photo
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
फतेहगंज पश्चिमी। बाघिन को पकड़ने आई दुधवा टाइगर रिजर्व के विशेषज्ञों की टीम करीब 15 दिन तक रबर फैक्टरी के जंगल में हाथ पांव मारती रही लेकिन बाघिन से आमना-सामना होना तो दूर, उसकी झलक कैमरे तक में नहीं दिखी। शनिवार को विशेषज्ञों की टीम के लौटते ही बाघिन ने रबर फैक्टरी में दोबारा चहलकदमी शुरू की तो वन विभाग के अफसर हैरत में आ गए। रविवार को डिस्टलरी प्लांट में बाघिन के पगमार्क के साथ रबर प्लांट में लगे कैमरे में भी उसकी फुटेज मिली। अब वन विभाग दोबारा बाघिन को पकड़ने की योजना बनाने में जुट गया है।
पिछले दो सप्ताह से बाघिन की फुटेज कैमरे में नहीं दिखने के कारण बाघिन की लोकेशन ट्रेस नहीं हो पा रही थी, जिससे दुधवा टाइगर रिजर्व से आए विशेषज्ञ डॉ. दयाशंकर टीम के साथ शनिवार को लौट गए थे। लंबे समय तक बाघिन के न दिखने पर वन विभाग के अफसरों को भी रबर फैक्टरी के जंगल में उसकी मौजूदगी पर संदेह होने लगा था। बाघिन के अन्य स्थान पर जाने के कयास भी लगाए जाने लगे थे। मुख्य वन संरक्षक ललित वर्मा ने बारिश के बाद अभियान चलाने का निर्णय भी ले लिया था, लेकिन रविवार को डिस्टलरी प्लांट में बनाए गए मिट्टी के पैड पर पगचिह्न और रबर प्लांट में लगे कैमरे में उसकी फुटेज दिखने से अफसरों ने राहत की सांस ली है। डीएफओ भरतलाल ने बताया कि अगले एक-दो दिन तक लगातार बाघिन की लोकेशन ट्रेस होने पर दोबारा पकड़ने की रणनीति बनाई जाएगी।
विज्ञापन
विज्ञापन
पिछले दो सप्ताह से बाघिन की फुटेज कैमरे में नहीं दिखने के कारण बाघिन की लोकेशन ट्रेस नहीं हो पा रही थी, जिससे दुधवा टाइगर रिजर्व से आए विशेषज्ञ डॉ. दयाशंकर टीम के साथ शनिवार को लौट गए थे। लंबे समय तक बाघिन के न दिखने पर वन विभाग के अफसरों को भी रबर फैक्टरी के जंगल में उसकी मौजूदगी पर संदेह होने लगा था। बाघिन के अन्य स्थान पर जाने के कयास भी लगाए जाने लगे थे। मुख्य वन संरक्षक ललित वर्मा ने बारिश के बाद अभियान चलाने का निर्णय भी ले लिया था, लेकिन रविवार को डिस्टलरी प्लांट में बनाए गए मिट्टी के पैड पर पगचिह्न और रबर प्लांट में लगे कैमरे में उसकी फुटेज दिखने से अफसरों ने राहत की सांस ली है। डीएफओ भरतलाल ने बताया कि अगले एक-दो दिन तक लगातार बाघिन की लोकेशन ट्रेस होने पर दोबारा पकड़ने की रणनीति बनाई जाएगी।
विज्ञापन
हर बार विशेषज्ञ लौटते हैं और सामने आ जाती है बाघिन
हर बार विशेषज्ञों की टीम के लौटते ही बाघिन की चहलकदमी शुरू होने से वन विभाग भी सवालों के घेरे में है। एक माह पहले कई पड्डों का शिकार करने के बाद बाघिन की सटीक लोकेशन मिलने पर दुधवा और पीटीआर टीम के कई विशेषज्ञों ने बाघिन को घेरने के लिए रबर फैक्टरी में डेरा डाला था लेकिन टीम के आते ही बाघिन लापता हो गई। नाकाम होकर टीम को लौटना पड़ा लेकिन इसके बाद अगले ही दिन बाघिन की लोकेशन कोयला प्लांट में मिली। फिर एक सप्ताह तक बाघिन की मौजूदगी लगातार पता चलती रही तो दुधवा से एक्सपर्ट डॉ. दयाशंकर के नेतृत्व में टीम फिर रबर फैक्टरी पहुंची लेकिन इसके बाद फिर बाघिन लापता हो गई। जब हांका लगाया गया तब भी बाघिन नहीं दिखी। अब फिर वही क्रम दोहराने से सवाल उठ रहा है कि इसके पीछे कहीं लाखों रुपये खपाने का खेल तो नहीं चल रहा है।
विज्ञापन