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वासुदेवानंद बोले : नरेंद्र मोदी धर्म की रक्षा करने वाले प्रधानमंत्री

Thu, 09 Dec 2021 11:03 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला ब्यूरो, प्रयागराज
अमर उजाला ब्यूरो, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Thu, 09 Dec 2021 11:03 PM IST
सार

पीएम की ही देन है कि अयोध्या में भगवान राम के भव्य मंदिर का निर्माण हो रहा है। प्रयागराज में किले में बंद अक्षयवट का दर्शन आम श्रद्धालुओं को होने लगा है। यह इसीलिए संभव हो पाया कि देश के प्रधानमंत्री ने आगे बढ़कर साहसिक निर्णय लिया।

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Vasudevanand said: Narendra Modi, the Prime Minister who protects religion
श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के सदस्य वासुदेवानंद सरस्वती - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

धर्म-संस्कृति की रक्षा के आह्वान के साथ बृहस्पतिवार को शंकराचार्य आश्रम परिसर में नौ दिवसीय आराधना महोत्सव आरंभ हो गया। इस मौके पर श्रीराम मंदिर तीर्थ क्षेत्र के सदस्य जगद्गुरु स्वामी वासुदेवानंद सरस्वती ने कहा कि प्रत्येक राष्ट्र का अपना धर्म और संस्कृति होती है। पीएम नरेंद्र मोदी धर्म की रक्षा करने वाले प्रधानमंत्री के रूप में हमेशा याद किए जाएंगे। देश के मुखिया की जिम्मेदारी होती है कि वह अपने राष्ट्रीय धर्म का सम्मान और सुरक्षा करें। इस दायित्व को मोदी ने बखूबी निभाया है।

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उन्होंने कहा कि जब राजा अपने प्रजा की समृद्धि और खुशहाली के लिए सतत प्रयत्नशील रहता है, तो जनता भी राष्ट्र रक्षा के लिए हमेशा खड़ी रहती है। राज सत्ता और सेना के बीच परस्पर समन्वय एवं सहयोग भी जरूरी है। पीएम की ही देन है कि अयोध्या में भगवान राम के भव्य मंदिर का निर्माण हो रहा है। प्रयागराज में किले में बंद अक्षयवट का दर्शन आम श्रद्धालुओं को होने लगा है। यह इसीलिए संभव हो पाया कि देश के प्रधानमंत्री ने आगे बढ़कर साहसिक निर्णय लिया।
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श्रीमद्भागवत कथा में वृंदावन से पधारे व्यास स्वामी श्रवणसनंद ने कथा के पहले दिन ज्ञान, भक्ति और वैराग्य की विस्तार से व्याख्या की। उन्होंने कहा कि भागवत महापुराण की कथा जीवन की हर समस्या का समाधान है। भागवत सिर्फ धर्मग्रंथ ही नहीं, संसार रूपी भवसागर को पार करने की नाव भी है। यह नाव हमें गुरु रूपी पथ प्रदर्शक के ज्ञान से मिलती है। इससे पहले परमहंस आश्रम टीकरमाफी के स्वामी हरि चैतन्य ब्रह्मचारी ने आराधना महोत्सव का उद्घाटन किया।
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उन्होंने कहा कि जिस तरह भगवान की आराधना की जाती है, उसी भाव से गुरु की भी वंदना करनी चाहिए। संत भगवंत के ही बराबर होता है। आराधना महोत्सव के प्रथम दिन दंडी संन्यासी विनोदानंद,शिवार्चन उपाध्याय,स्वामी रामसुखदास, ब्रह्मचारी आत्मानंद, ब्रह्मचारी विशुद्धानंद, विपिन मिश्रा, ब्रह्मचारी  जितेंद्रानंद, सीताराम शर्मा, मनीष ने वेदी पूजन के बाद आरती की। इस मौके पर ज्योतिष्पीठ के ब्रह्मलीन शंकराचार्यों के चित्रों पर माल्यार्पण किया गया।

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