यूपीपीएससी : सीधी भर्ती में जुड़ेंगे स्क्रीनिंग परीक्षा के अंक, अहम बदलाव के लिए आयोग ने भेजा प्रस्ताव
सीधी भर्ती में लगातार आरोप लगते रहे हैं कि इंटरव्यू के माध्यम से अपने चहेतों को मनमाने अंक देकर उनका चयन कर लिया जाता है। प्रतियोगी छात्रों ने कई बार सूचना के अधिकार के तहत आयोग से पूछा भी कि इंटरव्यू में अभ्यर्थियों को अंक देने का क्या आधार है।
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उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग (यूपीपीएससी) सीधी भर्ती में महत्वपूर्ण बदलाव करने जा रहा है। अब सीधी भर्ती के अंतिम चयन में स्क्रीनिंग परीक्षा के अंक भी जोड़े जाएंगे। इस व्यवस्था को लागू करने के लिए आयोग ने शासन को प्रस्ताव भेज दिया है। प्रक्रिया अंतिम चरण में है। शासन से मंजूरी मिलते ही इसे लागू कर दिया जाएगा।
सीधी भर्ती में लगातार आरोप लगते रहे हैं कि इंटरव्यू के माध्यम से अपने चहेतों को मनमाने अंक देकर उनका चयन कर लिया जाता है। प्रतियोगी छात्रों ने कई बार सूचना के अधिकार के तहत आयोग से पूछा भी कि इंटरव्यू में अभ्यर्थियों को अंक देने का क्या आधार है, लेकिन कोई स्पष्ट जवाब नहीं मिला। दरअसल, अयोग सीधी भर्ती में स्क्रीनिंग परीक्षा तभी कराता है, जब पदों की संख्या काफी अधिक होती है। स्क्रीनिंग परीक्षा में मिले अंकों के आधार पर अभ्यर्थियों को इंटरव्यू के लिए आमंत्रित किया जाता है।
स्क्रीनिंग परीक्षा में वर्ष 2019 से निगेटिव मार्किंग भी होने लगी है, लेकिन इस परीक्षा में मिले अंकों को अंतिम चयन परिणाम में शामिल नहीं किया जाता है। वहीं, प्रतियोगी छात्र यह सवाल उठाते रहे हैं कि जब स्क्रीनिंग परीक्षा के आधार पर योग्य अभ्यर्थियों को इंटरव्यू के लिए आमंत्रित किया जा रहा है तो परीक्षा में मिले अंकों को चयन परिणाम में क्यों नहीं जोड़ा जा रहा। अब छात्रों की यह शिकायत दूर होने जा रही है। आयोग के अफसरों का कहना है कि सीधी भर्ती में स्क्रीनिंग परीक्षा और इंटरव्यू के अंक जोड़कर चयन किया जाएगा। शासन को प्रस्ताव भेजा गया है। प्रस्ताव को जल्द ही मंजूरी मिलने की उम्मीद है।
स्क्रीनिंग परीक्षा के मानक स्पष्ट नहीं
सीधी भर्ती में स्क्रीनिंग परीक्षा के अंक जोड़कर आयोग अभ्यर्थियों को राहत देने तो जा रहा है, लेकिन आयोग ने अब तक यह स्पष्ट नहीं किया है कि स्क्रीनिंग परीक्षा कराए जाने के स्पष्ट मानक क्या हैं। पिछले दिनों अर्थ एवं संख्याधिकारी सहित कई भर्तियों में बिना स्क्रीनिंग परीक्षा के इंटरव्यू करा दिए गए। अभ्यर्थियों ने इस पर अपनी आपत्ति भी जताई।
प्रतियोगी छात्रों ने सूचना के अधिकार के तहत आयोग से इस पर सवाल किया, लेकिन कोई स्पष्ट जवाब नहीं मिला। सचिव की ओर से बयान दिया गया था कि जिन सीधी भर्तियों में पदों की संख्या काफी अधिक होती है, वहां स्क्र्रीनिंग परीक्षा कराई जाती है। वहीं, अभ्यर्थी जानना चाहते हैं कि सीधी भर्ती में स्क्रीनिंग परीक्षा कराने के स्पष्ट मानक क्या हैं? न्यूनतम कितने पदों पर भर्ती के लिए स्क्रीनिंग परीक्षा कराए जाने का प्रावधान है?