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Uppsc : याचिका दाखिल करने वाले किसी अभ्यर्थी का चयन नहीं
Fri, 23 Jul 2021 09:45 PM IST
विनोद सिंह
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
Published by: विनोद सिंह
Updated Fri, 23 Jul 2021 09:45 PM IST
सार
- अभ्यर्थियों का दावा, कम से कम 31 लोगों का चयन होना चाहिए था निरस्त
- प्रतियोगियों ने उठाए सवाल, जब प्रमाणपत्र नहीं थे तो इंटरव्यू में क्यों किया शामिल
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uppsc
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
पीसीएस-2018 के तहत उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग ने प्रधानाचार्य, राजकीय इंटर कॉलेज के पद का संशोधित परिणाम तो जारी कर दिया, लेकिन इलाहाबाद हाईकोर्ट में याचिका दाखिल करने वाले अशोक कुमार मिश्र, राकेश चंद्र पांडेय समेत सभी छह अभ्यर्थियों में से किसी का भी चयन संशोधित परिणाम में नहीं हुआ। संशोधित रिजल्ट जारी होने के बाद बाद आयोग एक बार फिर से घिर गया है। अभ्यर्थी संशोधित परिणाम से संतुष्ट नहीं हैं। उनका दावा है कि अगर आयोग पूरी पारदर्शिता के साथ संशोधित परिणाम जारी करता तो कम से कम 31 अभ्यर्थी चयन से बाहर हो जाते। अभ्यर्थी एक बार फिर से कोर्ट जाने की तैयारी कर रहे हैं।
अभ्यर्थी शुरू से आरोप लगा रहे थे कि आयोग ने जिस प्रारूप में प्रधानाचार्य, राजकीय इंटर कॉलेज पद के लिए अनुभव प्रमाणपत्र मांगा हैं, उनमें कम से कम 30 अभ्यर्थी ऐसे हैं, जिन्होंने प्रमाणपत्र जमा नहीं किए या निर्धारित प्रारूप में प्रमाणपत्र उपलब्ध नहीं कराए। आयोग की ओर से जारी प्रारूप के अनुभव प्रमाणपत्र संयुक्त शिक्षा निदेशक से प्रतिहस्ताक्षरित होना चाहिए था। उस पर वेतन बैंड एवं ग्रेड पे का भी जिक्र होना चाहिए। कोर्ट में याचिका दाखिल करने वाले अभ्यर्थी अशोक कुमार मिश्र, राकेश चंद्र पांडेय दावा है कि आयोग को मिले तमाम अभ्यर्थियों के प्रमाणपत्र संयुक्त शिक्षा निदेशक से प्रति हस्ताक्षरित नहीं थे।
इसके अलावा तमाम प्रमाणपत्रों पर वेतन बैंड एवं ग्रेड पे का जिक्र नहीं था। याचियों का यह आरोप भी है कि बेसिक शिक्षा के स्कूलों में पढ़ाने वाले तमाम अभ्यर्थियों ने फर्जी प्रमाणपत्र लगा दिए। किसी अभ्यर्थी ने कुलपति से प्रति हस्ताक्षरित फर्जी अनुभव प्रमाणपत्र लगाया तो किसी ने कॉलेज के स्तर से फर्जी प्रमाणपत्र जारी करा लिया।
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आयोग ने अंतिम चयन परिणाम जारी करने से पहले यह भी कहा था कि प्रमाणपत्र प्रस्तुत न करने की स्थिति में संबंधित अभ्यर्थी को इंटरव्यू में शामिल नहीं किया जाएगा। इसके बावजूद संशोधित परिणाम में आयोग ने मान लिया है कि 14 अभ्यर्थियों द्वारा इंटरव्यू में प्रमाणपत्र प्रस्तुत न किए जाने के बावजूद उन्हें साक्षात्कार में शामिल किया गया और औपबंधिक रूप से उन्हें सफल घोषित किया गया। याचियों का आरोप है कि आयोग ने सोची समझी रणनीति के तहत याचिका दाखिले करने वाले अभ्यर्थियों को संशोधित परिणाम में चयनित नहीं किया। इस मामले में वे फिर से कोर्ट जाएंगे।
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अभ्यर्थी शुरू से आरोप लगा रहे थे कि आयोग ने जिस प्रारूप में प्रधानाचार्य, राजकीय इंटर कॉलेज पद के लिए अनुभव प्रमाणपत्र मांगा हैं, उनमें कम से कम 30 अभ्यर्थी ऐसे हैं, जिन्होंने प्रमाणपत्र जमा नहीं किए या निर्धारित प्रारूप में प्रमाणपत्र उपलब्ध नहीं कराए। आयोग की ओर से जारी प्रारूप के अनुभव प्रमाणपत्र संयुक्त शिक्षा निदेशक से प्रतिहस्ताक्षरित होना चाहिए था। उस पर वेतन बैंड एवं ग्रेड पे का भी जिक्र होना चाहिए। कोर्ट में याचिका दाखिल करने वाले अभ्यर्थी अशोक कुमार मिश्र, राकेश चंद्र पांडेय दावा है कि आयोग को मिले तमाम अभ्यर्थियों के प्रमाणपत्र संयुक्त शिक्षा निदेशक से प्रति हस्ताक्षरित नहीं थे।
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इसके अलावा तमाम प्रमाणपत्रों पर वेतन बैंड एवं ग्रेड पे का जिक्र नहीं था। याचियों का यह आरोप भी है कि बेसिक शिक्षा के स्कूलों में पढ़ाने वाले तमाम अभ्यर्थियों ने फर्जी प्रमाणपत्र लगा दिए। किसी अभ्यर्थी ने कुलपति से प्रति हस्ताक्षरित फर्जी अनुभव प्रमाणपत्र लगाया तो किसी ने कॉलेज के स्तर से फर्जी प्रमाणपत्र जारी करा लिया।
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आयोग ने अंतिम चयन परिणाम जारी करने से पहले यह भी कहा था कि प्रमाणपत्र प्रस्तुत न करने की स्थिति में संबंधित अभ्यर्थी को इंटरव्यू में शामिल नहीं किया जाएगा। इसके बावजूद संशोधित परिणाम में आयोग ने मान लिया है कि 14 अभ्यर्थियों द्वारा इंटरव्यू में प्रमाणपत्र प्रस्तुत न किए जाने के बावजूद उन्हें साक्षात्कार में शामिल किया गया और औपबंधिक रूप से उन्हें सफल घोषित किया गया। याचियों का आरोप है कि आयोग ने सोची समझी रणनीति के तहत याचिका दाखिले करने वाले अभ्यर्थियों को संशोधित परिणाम में चयनित नहीं किया। इस मामले में वे फिर से कोर्ट जाएंगे।