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UPPSC News : ठोस सुराग होने के बाद भी बंधे हैं सीबीआई के हाथ, चार साल से पूछताछ के लिए नहीं मिल रही अनुमति

Sat, 21 Jun 2025 04:18 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Sat, 21 Jun 2025 04:18 PM IST
सार

उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग (यूपीपीएससी) की भर्ती परीक्षाओं की जांच कर रही सीबीआई को पीसीएस परीक्षा-2015 और एपीएस परीक्षा-2010 समेत कई दूसरी भर्तियों में भी धांधली के ठोस सुराग मिले हैं। 

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UPPSC News: Despite having solid clues, CBI's hands are tied, not getting permission for interrogation for fou
यूपीपीएससी। UPPSC - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग (यूपीपीएससी) की भर्ती परीक्षाओं की जांच कर रही सीबीआई को पीसीएस परीक्षा-2015 और एपीएस परीक्षा-2010 समेत कई दूसरी भर्तियों में भी धांधली के ठोस सुराग मिले हैं। सीबीआई ने जहां पीसीएस-2015 के मामले में बाहरी अज्ञात लोगों व आयोग के अज्ञात अफसरों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की थी, वहीं अपर निजी सचिव (एपीएस) भर्ती-2010 के मामले में तत्कालीन परीक्षा नियंत्रक प्रभुनाथ के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया था। इसके अलावा सीबीआई ने गड़बड़ियां मिलने पर आधा दर्जन अन्य भर्तियों के मामले में प्राथमिक जांच (पीई) दर्ज की थी।

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जिन भर्तियों के मामले में पीई दर्ज की गई थीं, उनमें समीक्षा अधिकारी/ सहायक समीक्षा अधिकारी परीक्षा-2013, सम्मिलित राज्य अवर अधीनस्थ सेवा परीक्षा-2013, उत्तर प्रदेश प्रांतीय न्यायिक सेवा परीक्षा-2013 और मेडिकल ऑफिसर परीक्षा-2014 शामिल हैं।

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पीसीएस-2015 और एपीएस-2010 के मामले में मुकदमा दर्ज होने के बावजूद चार साल से जांच प्रक्रिया सिर्फ इसलिए ठप है, क्योंकि इन दोनों मामलों में सीबीआई को आयोग से पर्याप्त दस्तावेज और संदिग्ध लोक सेवकों के खिलाफ अभियोजन स्वीकृति नहीं मिल सकी है। इन दोनों बड़ी भर्तियों की जांच ठप होने के कारण सीबीआई उन आधा दर्जन भर्ती परीक्षाओं की जांच तेजी से आगे नहीं बढ़ा पा रही है जिनमें प्रारंभिक जांच के दौरान गड़बड़ी के सुराग मिले हैं।

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आयोग पर जल्द दस्तावेज उपलब्ध कराने का दबाव

भर्ती परीक्षाओं की जांच के मामले में सीधे सीबीआई निदेशक प्रवीण सूद के हस्तक्षेप के बाद आयोग पर भर्ती परीक्षाओं से जुड़े दस्तावेजों को जल्द से जल्द उपलब्ध कराने का दबाव है। लोक सेवकों के खिलाफ अभियोजन स्वीकृति के मामले में भी फैसला लेने का दबाव बढ़ा है। सूत्रों के अनुसार सीबीआई को दस्तावेज प्राप्त कराने के लिए फोटो कॉपी, नंबरिंग आदि प्रक्रिया तेज कर दी गई है।

पांच साल की जांच पर एक भी गिरफ्तारी नहीं

सीबीआई की ओर से अप्रैल 2012 से लेकर मार्च 2017 तक की तकरीबन 600 भर्ती प्रक्रियाओं की जांच की जा रही है। अब तक दो मुकदमे दर्ज हो चुके हैं, लेकिन किसी पर न तो सीधी कार्रवाई हुई न ही गिरफ्तारी।

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