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यूपीपीएससी : सीबीआई जांच धीमी, अभ्यर्थियों ने ट्विटर पर खोला मोर्चा
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सीबीआई जांच धीमी, अभ्यर्थियों ने सोशल मीडिया पर खोला मोर्चा
प्रयागराज। उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग (यूपीपीएससी) की भर्ती परीक्षाओं की सीबीआई जांच को चार साल पूरे हो चुके हैं और अब तक किसी के खिलाफ कोई सीधी कार्रवाई नहीं की गई है। दोषियों पर कार्रवाई न होने से प्रतियोगी छात्रों में नाराजगी है और उन्होंने ट्विटर पर सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। इस बीच चर्चा है कि सीबीआई के जांच अधिकारी बदल दिए गए हैं। हालांकि, आधिकारिक रूप से अभी इसकी पुष्टि नहीं हुई है।
सीबीआई की ओर से यूपीपीएससी की तकरीबन छह सौ भर्ती परीक्षाओं की जांच की जा रही है। इन परीक्षाओं के तहत लगभग 40 हजार पदों पर चयन हुआ है। पीसीएस भर्ती परीक्षा-2015 और अपर निजी सचिव (एपीएस) भर्ती परीक्षा-2010 में धांधली के सुबूत मिलने के बाद सीबीआई दोनों ही मामलों में एफआईआर दर्ज कर चुकी है। एपीएस-2010 के मामले में तो पूर्व परीक्षा नियंत्रक प्रभुनाथ को नामजद भी किया गया है। दोनों ही परीक्षाओं में अभ्यर्थियों को मनमाने अंक देकर उन्हें अनुसूचित लाभ पहुंचाए जाने के मामले सामने आए थे। हालांकि एफआईआर दर्ज होने के बाद अब तक किसी के खिलाफ कोई सीधी कार्रवाई कार्रवाई नहीं हुई है।
सीबीआई ने अभियोजन स्वीकृति के लिए प्रदेश सरकार और उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग के पास फाइल भेजी थी। सूत्रों का कहना है कि अभियोजन स्वीकृति की अनुमति न मिलने के कारण सीबीआई किसी की गिरफ्तारी नहीं कर सकती है। प्रतियोगी छात्रों ने मुख्यमंत्री को पत्र भेजकर इस मामले में हस्तक्षेप करने की मांग भी की थी, लेकिन अब तक कुछ नहीं हुआ। ऐसे में प्रतियोगी छात्रों ने सोशल मीडिया पर प्रदेश सरकार के खिलाफ अभियान छेड़ दिया है।
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प्रतियोगी छात्र संघर्ष समिति अध्यक्ष अवनीश पांडेय के अनुसार उन्हें सूचना मिली है कि अब तक जांच की जिम्मेदारी संभाल रहे आईआरएस अफसर विजेंद्र कुमार की जगह दिल्ली कैडर के आईपीएस अफसर अतुल ठाकुर को जांच की जिम्मेदारी सौंपी गई है। इस तरह चार साल की जांच के दौरान अतुल तीसरे अधिकारी होंगे, जिन्हें यह जिम्मेदारी सौंपी गई है। इससे पूर्व शुरुआत में आईपीएस अधिकारी राजीव रंजन और बाद में विजेंद्र कुमार यह जिम्मेदारी संभाल रहे थे। प्रतियोगी छात्रों को उम्मीद है कि इस बदलाव के बाद जांच तेजी आएगी और दोषियों पर सीधी कार्रवाई होगी।
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प्रयागराज। उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग (यूपीपीएससी) की भर्ती परीक्षाओं की सीबीआई जांच को चार साल पूरे हो चुके हैं और अब तक किसी के खिलाफ कोई सीधी कार्रवाई नहीं की गई है। दोषियों पर कार्रवाई न होने से प्रतियोगी छात्रों में नाराजगी है और उन्होंने ट्विटर पर सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। इस बीच चर्चा है कि सीबीआई के जांच अधिकारी बदल दिए गए हैं। हालांकि, आधिकारिक रूप से अभी इसकी पुष्टि नहीं हुई है।
सीबीआई की ओर से यूपीपीएससी की तकरीबन छह सौ भर्ती परीक्षाओं की जांच की जा रही है। इन परीक्षाओं के तहत लगभग 40 हजार पदों पर चयन हुआ है। पीसीएस भर्ती परीक्षा-2015 और अपर निजी सचिव (एपीएस) भर्ती परीक्षा-2010 में धांधली के सुबूत मिलने के बाद सीबीआई दोनों ही मामलों में एफआईआर दर्ज कर चुकी है। एपीएस-2010 के मामले में तो पूर्व परीक्षा नियंत्रक प्रभुनाथ को नामजद भी किया गया है। दोनों ही परीक्षाओं में अभ्यर्थियों को मनमाने अंक देकर उन्हें अनुसूचित लाभ पहुंचाए जाने के मामले सामने आए थे। हालांकि एफआईआर दर्ज होने के बाद अब तक किसी के खिलाफ कोई सीधी कार्रवाई कार्रवाई नहीं हुई है।
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सीबीआई ने अभियोजन स्वीकृति के लिए प्रदेश सरकार और उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग के पास फाइल भेजी थी। सूत्रों का कहना है कि अभियोजन स्वीकृति की अनुमति न मिलने के कारण सीबीआई किसी की गिरफ्तारी नहीं कर सकती है। प्रतियोगी छात्रों ने मुख्यमंत्री को पत्र भेजकर इस मामले में हस्तक्षेप करने की मांग भी की थी, लेकिन अब तक कुछ नहीं हुआ। ऐसे में प्रतियोगी छात्रों ने सोशल मीडिया पर प्रदेश सरकार के खिलाफ अभियान छेड़ दिया है।
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प्रतियोगी छात्र संघर्ष समिति अध्यक्ष अवनीश पांडेय के अनुसार उन्हें सूचना मिली है कि अब तक जांच की जिम्मेदारी संभाल रहे आईआरएस अफसर विजेंद्र कुमार की जगह दिल्ली कैडर के आईपीएस अफसर अतुल ठाकुर को जांच की जिम्मेदारी सौंपी गई है। इस तरह चार साल की जांच के दौरान अतुल तीसरे अधिकारी होंगे, जिन्हें यह जिम्मेदारी सौंपी गई है। इससे पूर्व शुरुआत में आईपीएस अधिकारी राजीव रंजन और बाद में विजेंद्र कुमार यह जिम्मेदारी संभाल रहे थे। प्रतियोगी छात्रों को उम्मीद है कि इस बदलाव के बाद जांच तेजी आएगी और दोषियों पर सीधी कार्रवाई होगी।