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फिर आयोग पहुंची सीबीआई टीम
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UPPSC
अचानक सक्रिय हुई सीबीआई, कैंप कार्यालय में बढ़ी हलचल
डेढ़ साल पहले शुरू हुई थी जांच, अब तक केवल एक मुकदमा
प्रयागराज। उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग (यूपीपीएससी) की भर्ती परीक्षाओं की जांच कर रही सीबीआई टीम तीन दिनों से अचानक सक्रिय हो गई है। सीबीआई की टीम जांच के लिए फिर आयोग पहुंची है। हालांकि, डेढ़ साल की जांच के दौरान सीबीआई ने अब तक केवल एक मुकदमा दर्ज किया है और वह भी आयोग के अज्ञात अफसरों एवं बाहरी अज्ञात लोगों के खिलाफ है।
सीबीआई आयोग की उन परीक्षाओं की जांच कर रही है, जिनके परिणाम अप्रैल-2012 से मार्च-2017 के बीच जारी किए गए। जांच शुरू हुए डेढ़ साल से अधिक समय बीत चुका है, लेकिन सीबीआई किसी नतीजे पर नहीं पहुंची। सूत्रों का कहना है कि सीबीआई के पास परीक्षाओं में अनियमितता को लेकर दस हजार से अधिक शिकायतें पहुंची हैं। हजारों की संख्या में अभ्यर्थियों के बयान दर्ज किए चुका हैं। तमाम परीक्षाओं के संदिग्ध चयनितों से भी पूछताछ की जा चुकी है। आयोग के भी कई वर्तमान एवं पूर्व अफसरों से पूछताछ की गई है और इनके बयान भी लिए जा चुके हैं। इतना कुछ होने के बाद सीबीआई ने पीसीएस-2015 में धांधली के मामले में केवल मुकदमा दर्ज किया और वह भी अज्ञात लोगों के खिलाफ, जो अब भी सीबीआई की पकड़ से बाहर हैं।
सीबीआई को अपर निजी सचिव (एपीएस) परीक्षा-2010 में भी धांधली कई सुराग मिले थे और इसी आधार पर सीबीआई ने इस परीक्षा की जांच के लिए प्रदेश सरकार से विशेष अनुमति ली थी, लेकिन इस परीक्षा की जांच भी अब तक किसी नतीजे पर नहीं पहुंची। सीबीआई तीन दिनों से फिर सक्रिय हो गई है। सूत्रों का कहना है कि गोविंदपुर स्थित सीबीआई के कैंप कार्यालय में हलचल बढ़ी है। वहीं सीबीआई की एक टीम 20 एवं 21 सितंबर को आयोग में भी गई और वहां कुछ दस्तावेजों की जांच पड़ताल भी की। सीबीआई के अचानक सक्रिय होने से तमाम चर्चाएं शुरू हो गई हैं।
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डेढ़ साल पहले शुरू हुई थी जांच, अब तक केवल एक मुकदमा
प्रयागराज। उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग (यूपीपीएससी) की भर्ती परीक्षाओं की जांच कर रही सीबीआई टीम तीन दिनों से अचानक सक्रिय हो गई है। सीबीआई की टीम जांच के लिए फिर आयोग पहुंची है। हालांकि, डेढ़ साल की जांच के दौरान सीबीआई ने अब तक केवल एक मुकदमा दर्ज किया है और वह भी आयोग के अज्ञात अफसरों एवं बाहरी अज्ञात लोगों के खिलाफ है।
सीबीआई आयोग की उन परीक्षाओं की जांच कर रही है, जिनके परिणाम अप्रैल-2012 से मार्च-2017 के बीच जारी किए गए। जांच शुरू हुए डेढ़ साल से अधिक समय बीत चुका है, लेकिन सीबीआई किसी नतीजे पर नहीं पहुंची। सूत्रों का कहना है कि सीबीआई के पास परीक्षाओं में अनियमितता को लेकर दस हजार से अधिक शिकायतें पहुंची हैं। हजारों की संख्या में अभ्यर्थियों के बयान दर्ज किए चुका हैं। तमाम परीक्षाओं के संदिग्ध चयनितों से भी पूछताछ की जा चुकी है। आयोग के भी कई वर्तमान एवं पूर्व अफसरों से पूछताछ की गई है और इनके बयान भी लिए जा चुके हैं। इतना कुछ होने के बाद सीबीआई ने पीसीएस-2015 में धांधली के मामले में केवल मुकदमा दर्ज किया और वह भी अज्ञात लोगों के खिलाफ, जो अब भी सीबीआई की पकड़ से बाहर हैं।
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सीबीआई को अपर निजी सचिव (एपीएस) परीक्षा-2010 में भी धांधली कई सुराग मिले थे और इसी आधार पर सीबीआई ने इस परीक्षा की जांच के लिए प्रदेश सरकार से विशेष अनुमति ली थी, लेकिन इस परीक्षा की जांच भी अब तक किसी नतीजे पर नहीं पहुंची। सीबीआई तीन दिनों से फिर सक्रिय हो गई है। सूत्रों का कहना है कि गोविंदपुर स्थित सीबीआई के कैंप कार्यालय में हलचल बढ़ी है। वहीं सीबीआई की एक टीम 20 एवं 21 सितंबर को आयोग में भी गई और वहां कुछ दस्तावेजों की जांच पड़ताल भी की। सीबीआई के अचानक सक्रिय होने से तमाम चर्चाएं शुरू हो गई हैं।
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