UP : प्रोफेसर भर्ती परीक्षा रद्द होने पर छात्र संगठनों ने जताई खुशी, दोषियों पर कार्रवाई की मांग
उच्चतर शिक्षा सेवा चयन आयोग द्वारा 16 और 17 जून 2025 को कराई गई असिस्टेंट प्रोफेसर भर्ती परीक्षा रद्द होने पर विभिन्न छात्र संगठनों ने खुशी जताई। उन्होंने इसे संघर्ष की जीत करार दिया।
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उच्चतर शिक्षा सेवा चयन आयोग द्वारा 16 और 17 जून 2025 को कराई गई असिस्टेंट प्रोफेसर भर्ती परीक्षा रद्द होने पर विभिन्न छात्र संगठनों ने खुशी जताई। उन्होंने इसे संघर्ष की जीत करार दिया। आइसा ने असिस्टेंट प्रोफेसर भर्ती परीक्षा में हुई धांधली और भ्रष्टाचार में शामिल उच्च अधिकारियों समेत अन्य दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग करते हुए पारदर्शी तरीके से परीक्षा कराए जाने की बात रखी।
इंकलाबी नौजवान सभा ने परीक्षा निरस्त होने को सतत आंदोलन की जीत बताया। भर्ती परीक्षा को लेकर प्रमुखता से सवाल उठाने वाले प्रदेश सचिव सुनील मौर्य ने कहा कि योगी सरकार को आंदोलन के दबाव में भर्ती परीक्षा को निरस्त करना पड़ा। यह भ्रष्टाचार के खिलाफ युवाओं की बड़ी जीत है लेकिन छात्रों के भविष्य को दांव पर लगाने वाले लोगों को कड़ी सजा मिलनी चाहिए।
अभ्यर्थियों ने इन मुद्दों पर उठाए थे सवाल
रेंडमाइजेशन न होना : असिस्टेंट प्रोफेसर भर्ती परीक्षा में रेंडमाइजेशन न होना सबसे बड़ा सवाल बना। भर्तियों में आरोप लगता रहा है कि नकल माफिया एक साथ फॉर्म भरकर रोल नंबर आवंटित करा लेते हैं और उसमें अलग-अलग सॉल्वर बैठाकर पैसे लेकर लोगों को पास कराते हैं। इसके बावजूद इस परीक्षा में रेंडमाइजेशन न होना बड़ा मुद्दा बना।
सीसीटीवी कैमरे का न होना : इस भर्ती परीक्षा में आयोग ने भ्रष्टाचार और नकल को रोकने के लिए न सिर्फ सीसीटीवी कैमरे को सभी केंद्र पर अनिवार्य माना था बल्कि इस परीक्षा के दौरान ड्रोन कैमरे से नकल रोकने की बात कही थी। अभ्यर्थियों का आरोप था कि कई केंद्रों पर सीसीटीवी कैमरे पर्याप्त संख्या में नहीं थे जिससे नकल विहीन परीक्षा के दावे कोरे साबित हुए।
परीक्षा केंद्र पर 45 मिनट पहले पहुंचने की बाध्यता : आयोग ने परीक्षा केंद्रों पर 45 मिनट पहले पहुंचने की बाध्यता लागू की थी लेकिन अभ्यर्थियों का आरोप था कि कई केंद्रों पर इस मानक का पालन नहीं किया गया और निर्धारित समय के बाद आने वालों को भी प्रवेश दिया गया। इससे परीक्षा में बराबरी और नकल रोकने की प्रतिबद्धता घटी।
आयोग के आउटसोर्स कर्मचारी की भूमिका : एसटीएफ ने आयोग के एक आउटसोर्स कर्मचारी को गिरफ्तार किया जिस पर गंभीर आरोप लगे कि वह परीक्षा में अभ्यर्थियों को अनुचित लाभ पहुंचाने का प्रयास कर रहा था। यह गिरफ्तारी परीक्षा संपन्न होने के बाद हुई जिससे आशंका उत्पन्न होती है कि परीक्षा के पहले वह कई अभ्यर्थियों को अनुचित लाभ दे चुका होगा।
हिंदी विषय में सिलेबस से बाहर के प्रश्न : अभ्यर्थियों का दावा था कि हिंदी विषय की परीक्षा में घोषित सिलेबस से बाहर के साथ एक कुंजी गाइड से अधिकतम हल्के प्रश्न पूछे गए। इससे अभ्यर्थियों में भ्रम की स्थिति उत्पन्न हुई और उनकी परीक्षा प्रभावित हुई। अभ्यर्थियों ने कहा कि यह आयोग की लापरवाही और दिशा-निर्देशों के उल्लंघन का उदाहरण है।
सामान्य अध्ययन में पाठ्यक्रम से बाहर के प्रश्न : अभ्यर्थियों का दावा था कि सामान्य अध्ययन विषय के घोषित सिलेबस में केवल आधुनिक इतिहास का उल्लेख किया गया था लेकिन वास्तविक परीक्षा में प्राचीन इतिहास से भी प्रश्न पूछे गए। यह सिलेबस के उल्लंघन का स्पष्ट उदाहरण है और अभ्यर्थियों के साथ अन्याय है जिन्होंने आयोग द्वारा जारी दिशा-निर्देशों के अनुसार तैयारी की थी।
अभ्यर्थियों ने 25 अप्रैल से शुरू कर दिया था आंदोलन
उत्तर प्रदेश उच्चतर शिक्षा सेवा चयन आयोग द्वारा आयोजित असिस्टेंट प्रोफेसर भर्ती में भ्रष्टाचार व अपारदर्शिता का आरोप लगाते हुए परीक्षा रद्द करने की मांग पर इंकलाबी नौजवान सभा (आरवाईए) के नेतृत्व में 25 अप्रैल 2025 को आंदोलन शुरू किया गया और आयोग पर प्रदर्शन किया गया। इसके बाद एक मई को प्रदर्शन हुआ और आरवाईए के प्रतिनिधिमंडल की आयोग के सचिव मनोज कुमार से वार्ता हुई। इसके बाद आयोग पर कई बार धरना-प्रदर्शन किया गया।