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UP : हाईकोर्ट ने एसडीएम से पूछा- अधिकारों में हस्तक्षेप के लिए क्यों न मुख्य सचिव को लिख दिया जाए
Fri, 15 Nov 2024 05:32 PM IST
विनोद सिंह
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
Published by: विनोद सिंह
Updated Fri, 15 Nov 2024 05:32 PM IST
सार
न्यायमूर्ति मनीष कुमार निगम की अदालत ने फूलमती की याचिका पर अपर आयुक्त (प्रशासन) और अपर आयुक्त (न्यायिक) से कहा है कि व्यक्तिगत हलफनामा दाखिल कर बताएं कि ऐसे आदेश कैसे पारित किए गए। अगली सुनवाई 26 नवंबर को होगी।
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अदालत का फैसला।
- फोटो : अमर उजाला।
विस्तार
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मामला लंबित होने के बावजूद याची को घर से बेदखल करने संबंधी आजमगढ़ के निजामाबाद एसडीएम के आदेश को रद्द कर दिया है। कोर्ट ने 10 दिनों के भीतर याची का कब्जा बहाल करने का आदेश दिया। एसडीएम से पूछा, 26 नवंबर को आकर बताएं कि अधिकारों में हस्तक्षेप के लिए क्यों न मुख्य सचिव को लिख दिया जाए।
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न्यायमूर्ति मनीष कुमार निगम की अदालत ने फूलमती की याचिका पर अपर आयुक्त (प्रशासन) और अपर आयुक्त (न्यायिक) से कहा है कि व्यक्तिगत हलफनामा दाखिल कर बताएं कि ऐसे आदेश कैसे पारित किए गए। अगली सुनवाई 26 नवंबर को होगी।
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फूलमती के घर का विवाद स्थानीय न्यायालय में लंबित था। बावजूद इसके, एसडीएम निजामाबाद ने बीते 25 मार्च को कब्जे को अवैध बताते हुए उन्हें मकान मालिक को एक हफ्ते में कब्जा सौंपने का आदेश दिया। खाली न करने पर पुलिस टीम के साथ जाकर घर से निकाल दिया। फूलमती ने इसके खिलाफ हाईकोर्ट में गुहार लगाई।
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हाईकोर्ट ने एसडीएम की कार्रवाई को न्यायालय के अधिकार क्षेत्र का उल्लंघन करार दिया। कहा, यह सरकार के आदेशों का भी उल्लंघन है। जानबूझकर याची के अधिकारों में हस्तक्षेप किया है। कार्रवाई के लिए मुख्य सचिव को लिखने से पहले यह उचित है कि एसडीएम अपना स्पष्टीकरण दें।