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Allahabad High Court : चंद्रशेखर आजाद पार्क का नया लेआउट प्लान तैयार करे यूपी सरकार

Wed, 17 Aug 2022 08:07 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Wed, 17 Aug 2022 08:07 PM IST
सार

कोर्ट ने कहा कि जिस तरह से योजना तैयार की गई है। वह आवश्यकताओं को पूरा नहीं करती है। निजी एजेंसी को लेआउट योजना तैयार करने और किंवदंतियों को दिखाने की प्रक्रिया के बारे में पता नहीं है।

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UP government should prepare a new layout plan of Chandrashekhar Azad Park
चंद्रशेखर आजाद पार्क, प्रयागराज। - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने प्रयागराज स्थित चंद्रशेखर आजाद पार्क को अपग्रेड करने के लिए एक निजी भूमि सर्वेक्षक परियोजना परामर्श अभियंता द्वारा बनाए गए लेआउट योजना को खारिज कर दिया। साथ ही यूपी सरकार को कहा कि नए सिरे से लेआउट प्लान तैयार कर उपस्थित हो। यह आदेश मुख्य न्यायमूर्ति और न्यायमूर्ति जेजे मुनीर की खंडपीठ ने जितेंद्र सिंह विशन व अन्य की याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया है। मामले में खंडपीठ ने निजी भूमि सर्वेक्षक द्वारा तैयार किए गए लेआउट प्लान में कुछ गड़बड़ियां पाईं और सरकारी अधिवक्ता से पूछा कि एक निजी सर्वेक्षक क्यों नियुक्त किया गया था। हालांकि, इस पर सरकारी अधिवक्ता स्पष्टीकरण नहीं दे सके।

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कोर्ट ने कहा कि जिस तरह से योजना तैयार की गई है। वह आवश्यकताओं को पूरा नहीं करती है। निजी एजेंसी को लेआउट योजना तैयार करने और किंवदंतियों को दिखाने की प्रक्रिया के बारे में पता नहीं है। चंद्रशेखर आजाद पार्क जिसे पहले अल्फ्रेड पार्क और कंपनी गार्डन के नाम से जाना जाता था। यहां विभिन्न स्थानों पर मौजूद निर्माणों का कोई स्पष्टीकरण नहीं था। जिस स्थान पर शहीद चंद्रशेखर आजाद ने अपने प्राण न्यौछावर किए। उसका भी योजना में उल्लेख नहीं किया गया है। कोर्ट ने कहा कि क्योंकि, खंडपीठ ने अपने सामने प्रस्तुत किए गए लेआउट प्लान का अध्ययन किया था। कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई एक सितंबर की तिथि तय करते हुए नए प्लान के तहत पेश होने के लिए कहा है।

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कोर्ट ने मामले में इसके पहले 13 जुलाई 2022 को राज्य सरकार को निर्देश दिया था। कहा कि वह कोर्ट के सामने चंद्रशेखर आजाद पार्क के अपग्रेड करने केलिए  लेआउट प्लान पेश करे। जिसमें पार्क में अब भी मौजूद निर्माण और क्षेत्र के विकास को दिखाया जाए। अनाधिकृत निर्माण को तोड़ने के बाद किया गया।


कोर्ट ने पहले उत्तर प्रदेश सरकार को अमर शहीद चंद्रशेखर आजाद पार्क के क्षेत्र में बने या बनाए गए कब्रों, मजारों या मस्जिद समेत सभी अतिक्रमणों को हटाने के लिए कहा था। कोर्ट ने सुनवाई केदौरान मामले में जनहित याचिका पर न्यायालय की सहायता करने वाले वकीलों से कुछ रिसर्च करने के लिए भी कहा। पूछा कि इलाहाबाद में स्वतंत्रता संग्राम विषय पर क्या कोई पीएचडीधारक है।


वकील ताहिर हुसैन फारूकी ने बताया कि विभिन्न समाचार पत्रों में इस संबंध में नियमित समाचार प्रकाशित होते हैं। जिनमें कुछ अंग्रेजी गजेटियर का संदर्भ दिया गया है। जिसमें, उल्लेख किया गया है कि कर्नल नील ने तीन घंट,े चालीस मिनट में लगभग 640 मेवातियों को फांसी दी थी और कुल मिलाकर 6 हजार, 746 लोगों में से मारे गए थे।


इस पर संज्ञान लेते हुए न्यायालय ने रजिस्ट्रार जनरल को संबंधित गजेटियर की प्रतियां प्राप्त करने के लिए नैनीताल में सार्वजनिक पुस्तकालय इलाहाबाद सरकारी संग्रहालय और सार्वजनिक पुस्तकालय के साथ समन्वय करने का निर्देश दिया।

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