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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Prayagraj News ›   up election 2022: Keshav Prasad Maurya will contest for the fourth time in the assembly elections

up election 2022 :  चौथी बार विधानसभा चुनाव में ताल ठोकेंगे केशव प्रसाद मौर्य, चाय और अखबार बेचकर सीखा राजनीति का ककहरा

Sun, 16 Jan 2022 04:08 AM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Sun, 16 Jan 2022 04:08 AM IST
सार

केशव प्रसाद मौर्य ने पहला चुनाव इलाहाबाद पश्चिम विधानसभा से वर्ष 2004 में लड़ा था। तब उक्त सीट में हुए उपचुनाव में बसपा के राजू पाल निर्वाचित हुए। उस चुनाव में माफिया अतीक के भाई अशरफ को सपा के टिकट पर दूसरा और केशव को तीसरा स्थान मिला था।

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up election 2022: Keshav Prasad Maurya will contest for the fourth time in the assembly elections
prayagraj : केशव प्रसाद मौर्य। - फोटो : prayagraj

विस्तार

भारतीय जनता पार्टी ने वर्ष 2022 के चुनाव में आखिरकार डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य को चुनाव मैदान में उतार ही दिया। अपने राजनीतिक सफर में केशव चौथी बार विधानसभा का चुनाव लडऩे जा रहे हैं। सपा लहर के बीच पिछला चुनाव उन्होंने वर्ष 2012 में सिराथू विधानसभा सीट से ही जीता था। दस वर्ष बाद उसी सीट से केशव को एक बार फिर से कमल खिलाने की जिम्मेदारी सौंपी गई है।

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केशव प्रसाद मौर्य ने पहला चुनाव इलाहाबाद पश्चिम विधानसभा से वर्ष 2004 में लड़ा था। तब उक्त सीट में हुए उपचुनाव में बसपा के राजू पाल निर्वाचित हुए। उस चुनाव में माफिया अतीक के भाई अशरफ को सपा के टिकट पर दूसरा और केशव को तीसरा स्थान मिला था।
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इसी सीट पर वर्ष 2007 के चुनाव में केशव प्रसाद मौर्य एक बार फिर से भाजपा के टिकट पर चुनाव लड़े, लेकिन उस चुनाव में बसपा की पूजा पाल निर्वाचित र्हुइं। उस चुनाव में भी केशव तीसरे स्थान पर रहे। हालांकि उन्होंने हार नहीं मानी। केशव मौर्य ने वर्ष 2012 के चुनाव में अपने गृह जनपद की सिराथू सीट से किस्मत आजमाई। उक्त चुनाव में वह पहली बार सिराथू में कमल खिलाने में कामयाब रहे। इसके बाद डिप्टी सीएम का ग्राफ बढ़ता गया।
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केशव की सांगठनिक क्षमता और जुझारूपन के अतिरिक्त राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ (आरएसएस) और विश्व हिंदू परिषद (विहिप) से उनकी करीबी ने उन्हें वर्ष 2014 में मोदी लहर के बीच फूलपुर संसदीय क्षेत्र से टिकट दिला दिया। इस चुनाव में वह रिकार्ड मतों से विजयी हुए। दो वर्ष बाद ही 16 अप्रैल 2016 में डिप्टी सीएम  भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष बने।

प्रदेश अध्यक्ष होने के दौरान 265 प्लस का केशव ने किया था दावा
केशव के प्रदेश अध्यक्ष बनने के बाद उनके नेतृत्व में ही वर्ष 2017 का विधानसभा चुनाव लड़ा गया। इस दौरान उन्होंने जब 265 प्लस सीट जीतने का दावा किया तो वह विपक्षी दल के नेताओं के निशाने पर आ गए। लेकिन जब विधानसभा चुनाव का रिजल्ट आया तो सभी की बोलती बंद हो गई। उक्त चुनाव में भाजपा और उसके सहयोगी दलों ने 325 सीट जीतकर इतिहास रच दिया। योगी सरकार का जब गठन हुआ तो केशव को डिप्टी सीएम की कुर्सी दी गई।

चाय और अखबार बेचते सीखा राजनीति का ककहरा
प्रयागराज। केशव प्रसाद मौर्य कभी कौशांबी के सिराथू कस्बे में एक छोटी सी दुकान में पिता के साथ चाय और अखबार बेचते थे। केशव ने इसी दुकान में चाय पीने आने वाले सियासत दां से राजनीति का ककहरा सीखा। वर्ष 1989 में अयोध्या आंदोलन के दौरान विहिप से जुड़े कई नेता उनकी दुकान पर आते थे, जिनकी संगत में केशव विहिप की विचारधारा से प्रभावित होकर संगठन से जुड़े।

फिर वह प्रयागराज आ गए और विहिप का कामकाज संभालने लगे। जल्द ही वह विहिप के दिग्गज अशोक सिंहल के चहेते बन गए। अपनी कार्यशैली से छाप छोडऩे वाले केशव ने समय के साथ चलते हुए भाजपा का दामन थामकर सक्रिय राजनीति में प्रवेश किया। उनके करीबी अरुण अग्रवाल बताते हैं कि संगठनात्मक क्षमता और वाकपटुता में वह अन्य नेताओं से काफी आगे हैं।

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