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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Prayagraj News ›   UP Assembly Election 2022: After fielding candidate from Allahabad West, the distance between Samajwadi Party and Apna Dal Kamerawadi increased

प्रयागराज : शहर पश्चिमी से प्रत्याशी उतारे जाने के बाद सपा और अपना दल कमेरावादी में बढ़ी खटास, जानें क्या बनाई जा रही रणनीति

Thu, 03 Feb 2022 06:27 AM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Thu, 03 Feb 2022 06:27 AM IST
सार

अपना दल कमेरावादी की पल्लवी पटेल ने प्र्रेसवार्ता करके घोषणा की थी कि सपा के साथ गठबंधन में उन्हें सात सीटें मिली हैं। उसमें प्रयागराज की शहर पश्चिमी सीट भी शामिल है। पल्लवी ने शहर पश्चिमी से चुनाव लड़ने की इच्छा भी जताई थी।

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UP Assembly Election 2022: After fielding candidate from Allahabad West, the distance between Samajwadi Party and Apna Dal Kamerawadi increased
अखिलेश यादव और पल्लवी पटेल - फोटो : amar ujala

विस्तार

सपा की ओर से शहर पश्चिमी विधानसभा सीट से प्रत्याशी की घोषणा के बाद अपना दल कमेरावादी से खटास बढ़ गई है। अपना दल कमेरावादी की ओर से इस सीट के लिए पहले ही दावेदारी की जा चुकी है। अब पल्लवी पटेल ने प्रतापगढ़ की सदर सीट से पर्चा लेकर सपा को स्पष्ट संदेश दे दिया है कि वह फिलहाल पीछे हटने के लिए तैयार नहीं हैं।

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अपना दल कमेरावादी की पल्लवी पटेल ने प्र्रेसवार्ता करके घोषणा की थी कि सपा के साथ गठबंधन में उन्हें सात सीटें मिली हैं। उसमें प्रयागराज की शहर पश्चिमी सीट भी शामिल है। पल्लवी ने शहर पश्चिमी से चुनाव लड़ने की इच्छा भी जताई थी। इसके विपरीत सपा ने पल्लवी को उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य के खिलाफ कौशाम्बी की सिराथू सीट से उम्मीदवार बनाया है। वहीं प्रयागराज की शहर पश्चिमी से अमरनाथ मौर्य को प्रत्याशी बनाया है।
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बताया जा रहा है कि इससे अपना दल कमेरावादी के नेताओं में नाराजगी है। पार्टी सूत्र के अनुसार पल्लवी शहर पश्चिमी सीट छोड़ने के पक्ष में नहीं हैं। यह भी कहा जा रहा है कि उन्होंने शहर पश्चिमी सीट के बदले में प्रयागराज की ही फाफामऊ के अलावा एक अन्य सीट की मांग की है। पल्लवी ने प्रतापगढ़ की सदर सीट से पर्चा भी ले लिया है। इससे दोनों दलों के बीच दूरी बढ़ने की बात कही जा रही है।

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टिकट बंटवारे के साथ सपा की बढ़ी मुसीबत

टिकट बंटवारे के साथ सपा नेताओं की परेशानी भी बढ़ गई है। वरिष्ठ नेताओं के सामने भीतरघात को संभालने की चुनौती तो खड़ी हो ही गई है, टिकट नहीं मिलने से नाराज कई दिग्गजों के दूसरे दलों में चले जाने से जातीय समीकरण को साधने की कवायद को भी झटका लगा है।


पार्टी को बुधवार को बड़ा झटका लगा। पूर्व सांसद नागेंद्र पटेल ने भाजपा गठबंधन में शामिल अपना दल एस का दामन थाम लिया। अपना दल एस ने उन्हें कौशाम्बी के चायल से प्रत्याशी भी बनाया है।


खासतौर पर, गंगापार में पटेल मतदाताओं की बड़ी संख्या है, लेकिन सपा ने क्षेत्र की किसी भी सीट से इस बिरादरी के नेता को उम्ममीदवार नहीं बनाया है। इस तरह से नागेंद्र के अपना दल में चले जाने से सपा के सामने पटेल मतदाताओं को मनाने की चुनौती होगी। इस सियासी उठापटक के बीच पटेल बिरादरी में पकड़ रखने वाले अपना दल कमेरावादी की नाराजगी ने पार्टी की मुसीबत और बढ़ा दी है।


इनके अलावा हंडिया विधानसभा क्षेत्र की राजनीति में लंबे समय तक मजबूत दखल रखने वाले महेश नारायण सिंह के पुत्र एवं पूर्व विधायक प्रशांत सिंह ने भी बुधवार को भाजपा गठबंधन में शामिल निषाद पार्टी का दामन थाम लिया।

निषाद पार्टी ने प्रशांत को हंडिया से उतारा
निषाद पार्टी ने प्रशांत को हंडिया से उम्मीदवार बनाकर सपा की राजनीति को चोट करने की कोशिश की है। कोरांव विधानसभा क्षेत्र में आदिवासी तथा अनुसूचित जाति बिरादरी के मतों में मजबूत पकड़ रखने वाले पूर्व विधायक राजमणि कोल के भी कांग्रेस में चले जाने से भी पार्टी को बड़ा झटका लगा है।


हालांकि पार्टी ने कोल बिरादरी के लिए रामदेव निडर को कोरांव से प्रत्याशी बनाकर जातिगत आंकड़ों को साधने की कोशिश की है। बुधवार को पश्चिमी से अमरनाथ मौर्य को टिकट दिए जाने के बाद भी पार्टी के भीतर नाराजगी सामने आने लगी है। टिकट के लिए दावेदारी करने वाले कई नेताओं ने अमरनाथ को प्रत्याशी बनाए जाने पर नाराजगी जताई है।


इससे पहले मेजा, शहर उत्तरी के उम्मीदवारों के खिलाफ भी कई नेता शीर्ष नेतृत्व से नाराजगी जता चुके हैं। सोशल मीडिया पर भी मुहिम छेड़ रखे हैं। ऐसे में पार्टी के नेताओं के सामने सबसे बड़ी चुनौती अपने को ही मनाने तथा जातीय समीकरण को साधने की चुनौती है।

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