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विवि की ‘साख’ के लिए मांगे वोट
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
Updated Thu, 29 Sep 2016 01:52 AM IST
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allahabad
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इलाहाबाद। इलाहाबाद विश्वविद्यालय छात्रसंघ चुनाव में बुधवार को हुए दक्षता भाषण में अध्यक्ष और उपाध्यक्ष पद के प्रत्याशियों ने ‘पूरब के ऑक्सफोर्ड’ की पुरानी साख वापस दिलाने के नाम पर वोट मांगे। उन्होंने संघर्ष में हमेशा साथ रहने का वादा किया तो नियमित कक्षाएं, कैंटीन, लाइब्रेरी से किताबें, हॉस्टल आदि सुविधाएं सुनिश्चित करने के दावों के साथ भी सामने खड़े हजारों विद्यार्थियों को लुभाने की कोशिश की। परंपरा के विपरीत छात्र नेताओं ने एक -दूसरे पर सीधा हमला बोला तो उनके संबोधन राजनीतिक दलों के एजेंडों से भी प्रेरित रहे। हालांकि, सात और पांच मिनट का समय भी कई छात्र नेताओं के लिए भारी पड़ा और पानी पीने के बाद भी वे नहीं बोल पाए। वहीं कई प्रत्याशियों का धारा प्रवाह और प्रभावी संबोधन विद्यार्थियाें पर छाप छोड़ गया।
दक्षता भाषण की शुरुआत उपाध्यक्ष पद के प्रत्याशियाें से हुई। उन्हें बात रखने के लिए पांच मिनट दिए गए। उपाध्यक्ष पद के सभी आठ प्रत्याशी, अभय प्रताप सरोज, अदील हमजा, अश्वनी कुमार मौर्या, अवनीश कुमार राय, सुभाष चंद्र कुशवाहा, सूरजभान सिंह, विश्वदीप शुक्ला और विवेक कुमार यादव ने छेड़खानी, नियमित कक्षाएं आदि मुद्दे उठाए। उन्हाेंने स्वस्थ और मजबूत छात्रसंघ के नाम पर भी वोट मांगे। हालांकि दक्षता भाषण की शुरुआत करने वाले अभय प्रताप शुरू में ही लड़खड़ा गए और फिर नहीं बोल पाए। यही स्थिति रही आखिरी वक्ता विवेक कुमार की।
इसके बाद अध्यक्ष पद के प्रत्याशियों को बोलने का मौका मिला। इस पद के लिए दावेदारी कर रहे अजीत यादव विधायक, अमित कुमार सिंह विकास, आनंद कुमार दुबे, अनीस यादव, अतुल नारायण सिंह, धीरेंद्र प्रताप यादव डीपी, रोहित मिश्रा, सत्येंद्र सिंह और शमून अहमद अंसारी ने योग्य और संघर्ष करने वाले प्रत्याशी को जीताने की अपील की। उन्होंने कैंटीन, सीनेट हाल की घड़ी को चालू करने, परिसर में मेडिकल की सुविधा, छात्राओं की सुरक्षा आदि मुद्दे उठाए।
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दक्षता भाषण के दौरान समर्थक प्रत्याशियों का लगातार हौसला बढ़ाते रहे तो विरोधियों ने हुटिंग भी की। संबोधन के दौरान लगातार नारेबाजी होती रही। इससे पहले पूर्व छात्रसंघ अध्यक्ष केके राय ने छात्रसंघ और दक्षता भाषण के उद्देश्य पर प्रकाश डाला। समारोह में पूर्व छात्रसंघ अध्यक्ष विनोद चंद्र दुबे, कृष्ण मूर्ति यादव, हेमंत सिंह टुन्नू, संजय तिवारी, भूपेंद्र सिंह यादव, ऋचा सिंह आदि मौजूद रहीं। इस मौके पर सुरक्षा एवं छात्र सलाहकार प्रोफेसर माता अंबर तिवारी, चुनाव अधिकारी प्रोफेसर आरके सिंह, डीएसडब्ल्यू प्रोफेसर आरकेपी सिंह, चीफ प्रॉक्टर, जिला और पुलिस प्रशासन के अफसर मौजूद रहे।
अध्यक्ष पद के प्रत्याशियों के बोल
‘विद्यार्थियों के मुद्दे पर हमेशा संघर्ष करता रहा हूं। यह लड़ाई तब तक जारी रहेगी जब तक विवि की सूरत बदल न जाए। लाइब्रेरी से किताबें, हॉस्टल, कैंटीन, महिला हास्टल में अस्पताल समेत कई मुद्दे हैं। सबसे जरूरी है शिक्षकों की भर्ती। जल्द से जल्द नियुुक्ति और इसमें पारदर्शिता के लिए विश्वविद्यालय प्रशासन पर लगातार दबाव बनाया जाएगा।’
अजीत यादव विधायक
‘धर्म, जाति, क्षेत्र नहीं मैं छात्रों की बात करूंगा। विवि की साख में गिरावट आई है। 2005 में विवि को केंद्रीय दर्जा मिला लेकिन सुविधाओं की जगह दलाली बढ़ गई। इसके लिए सभी लोग जिम्मेदार हैं। विवि प्रशासन तानाशाह हो गया है। मैं अध्यक्ष बना तो यह सब नहीं चलेगा।’
अमित कुमार सिंह विकास
‘मैं पढ़ाई के लिए आया था लेकिन पढ़ाई नहीं मिली तो लड़ाई में उतर गया। विद्यार्थियों की हक की लड़ाई में। इसीलिए अध्यक्ष पद के लिए आप लोगों के बीच में हूं। अध्यक्ष बना तो कैंटीन, हॉस्टल में मेस, लाइब्रेरी आदि की सुविधा बेहतर की जाएगी। पिछला सत्र दलाें की विचारधारा थोपने के लिए संघर्षों में चला गया। इस बार ऐसा न होने दीजिए।’
आनंद कुमार दुबे
‘विज्ञान संकाय में कैंटीन सबके एजेंडे में है लेकिन यह सिर्फ वोट मांगने के लिए। लगातार वादों के बावजूद कैंटीन शुरू नहीं हो पायी। विज्ञान संकाय से 18 वर्ष से कोई अध्यक्ष नहीं हुआ। भौतिकी में लैब की स्थिति ठीक नहीं है। ज्यादातर उपकरण काफी पुराने हैं।’
अनीस यादव
‘हॉस्टल में सुविधा बढ़ेगी। मेस शुरू होगा। हर परिसर में कैंटीन होगी। लाइब्रेरी में किताबें हैं लेकिन डिजिटलाइजेशन और कैटलॉग नहीं है। इसकी वजह से किताबें नहीं मिलतीं। मैं अध्यक्ष बना तो किताबों का डिजिटलाइजेशन होगा। डेलीगेसी में रूम रेंट कंट्रोल ऐक्ट कराने, चिकित्सीय सुविधा के लिए संघर्ष करूंगा। अध्यक्ष बना तो छात्राओं के लिए टोल फ्री नंबर होगा, जो 24 घंटे काम करेगा।’
अतुल नारायण सिंह
‘छात्राओं की सुरक्षा के लिए पूरे परिसर में सीसीटीवी कैमरा तथा अन्य इंतजाम के लिए संघर्ष करूंगा। डेलीगेसी में रहने वाले छात्रों की समस्या तथा उनके साथ मारपीट का मामला हो या विवि में लाइब्रेरी, अराजकता के मुद्दे पर मैंने हमेशा संघर्ष किया। आपने अध्यक्ष बनाया तो यह लड़ाई और मजबूत होगी।’
धीरेंद्र प्रताप यादव डीपी
‘विवि में छात्रों के लिए 75 फीसदी उपस्थिति अनिवार्य है। अन्यथा, परीक्षा में बैठने नहीं दिया जाएगा। मैं अध्यक्ष बना तो 85 फीसदी से कम कक्षाएं लेने वाले शिक्षकाें को वेतन भी नहीं लेने दूंगा। विगत वर्षों में दो छात्राओं ने आत्महत्या कर ली थी। काउंसलिंग सेंटर होता तो यह नहीं होता। काउंसलिंग सेंटर खुलेगा। विज्ञान संकाय में 15 दिनों में कैंटीन नहीं खुला तो मैं खुद चाय बनाने लगूंगा। मैं पांच दिन में पूरे परिसर को बदलने का वादा नहीं करता लेकिन परिवर्तन जरूर होगा।’
रोहित कुमार मिश्रा
‘छात्र हितों के लिए आइसा हमेशा संघर्ष करता रहा है। ऑनलाइन प्रवेश परीक्षा का मुद्दा भी हमने पहले उठाया। अन्य लोग बाद में आए। कैंटीन, प्रवेश में धांधली, लाइब्रेरी से किताबें कई मुद्दे हैं जिन्हें लेकर संघर्ष हमेशा जारी रहेगा। जाति, धर्म के नाम पर भेदभाव नहीं होने दिया जाएगा।’
सत्येंद्र सिंह
‘परिसर में पानी, कैंटीन नहीं है। कक्षाआें में पंखा खराब है। विद्यार्थी छोटी-छोटी सुविधाओं से महरूम हैं। मैं जीता तो ये समस्याएं दूर होंगी।’
शमून अहमद अंसारी
उपाध्यक्ष पद के प्रत्याशियों के बोल
‘मैंने लाइब्रेरी, हॉस्टल में मेस आदि सुविधाओं के लिए हमेशा संघर्ष किया है। जाति और धर्म नहीं छात्र के नाम पर वोट मांगने आया हूं।’
अदील हमजा
‘बदलाव के लिए आया हूं। इसके लिए हमेशा संघर्ष करता रहूंगा। परिसर का माहौल बिगड़ रहा है। पठन-पाठन के माहौल के लिए लड़ूूंगा। महिला छात्रावास में एंबुलेंस की सुविधा सुनिश्चित होगी।’
अश्वनी कुमार मौर्या
‘जेएनयू में भारत विरोधी मुर्दाबाद का नारा लगाने वाले वोट मांग रहे है। उन्हें पहचानिए। सलोरी में छात्रों की पिटाई होती है तो ये लोग कहां होते हैं। मैं हमेशा पीड़ित छात्रों के बीच रहा। लाइब्रेरी से किताबें निर्गत कराना, अंतरराष्ट्रीय खेल का आयोजन प्राथमिकता होगी।’
अवनीश कुमार राय
‘अराजकता के खिलाफ आइसा ने हमेशा आवाज बुलंद की है। विद्यार्थियों की हर छोटी-बड़ी समस्या में आइसा उनके साथ रहता है। पैनल जीता तो यह संघर्ष और मजबूत होगा। साथ में मांगें पूरी होंगी।’
सुभाष चंद्र कुशवाहा
‘भर्तियों में भ्रष्टाचार की वजह से युवाओं और छात्राओं का भविष्य अंधकार में है। इसके लिए प्रदेश सरकार जिम्मेदार है। विवि में अराजकता का माहौल है। सिविल सेवा में सफलता के गिरते ग्राफ के पीछे यह मुख्य वजह है। इन मुद्दों को लेकर संघर्ष करूंगा।’
सूरजभान सिंह
‘छात्राओं की सुरक्षा की बात हो रही है लेकिन सबसे अधिक डर तथाकथित छात्र नेताओं से ही होता है। परिसर में विचारधारा थोपने की कोशिश की गई। इस माहौल को बदलना होगा। मैं भीख नहीं उधार के तौर पर वोट मांग रहा हूं। ’
विश्वदीप शुक्ला
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दक्षता भाषण की शुरुआत उपाध्यक्ष पद के प्रत्याशियाें से हुई। उन्हें बात रखने के लिए पांच मिनट दिए गए। उपाध्यक्ष पद के सभी आठ प्रत्याशी, अभय प्रताप सरोज, अदील हमजा, अश्वनी कुमार मौर्या, अवनीश कुमार राय, सुभाष चंद्र कुशवाहा, सूरजभान सिंह, विश्वदीप शुक्ला और विवेक कुमार यादव ने छेड़खानी, नियमित कक्षाएं आदि मुद्दे उठाए। उन्हाेंने स्वस्थ और मजबूत छात्रसंघ के नाम पर भी वोट मांगे। हालांकि दक्षता भाषण की शुरुआत करने वाले अभय प्रताप शुरू में ही लड़खड़ा गए और फिर नहीं बोल पाए। यही स्थिति रही आखिरी वक्ता विवेक कुमार की।
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इसके बाद अध्यक्ष पद के प्रत्याशियों को बोलने का मौका मिला। इस पद के लिए दावेदारी कर रहे अजीत यादव विधायक, अमित कुमार सिंह विकास, आनंद कुमार दुबे, अनीस यादव, अतुल नारायण सिंह, धीरेंद्र प्रताप यादव डीपी, रोहित मिश्रा, सत्येंद्र सिंह और शमून अहमद अंसारी ने योग्य और संघर्ष करने वाले प्रत्याशी को जीताने की अपील की। उन्होंने कैंटीन, सीनेट हाल की घड़ी को चालू करने, परिसर में मेडिकल की सुविधा, छात्राओं की सुरक्षा आदि मुद्दे उठाए।
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दक्षता भाषण के दौरान समर्थक प्रत्याशियों का लगातार हौसला बढ़ाते रहे तो विरोधियों ने हुटिंग भी की। संबोधन के दौरान लगातार नारेबाजी होती रही। इससे पहले पूर्व छात्रसंघ अध्यक्ष केके राय ने छात्रसंघ और दक्षता भाषण के उद्देश्य पर प्रकाश डाला। समारोह में पूर्व छात्रसंघ अध्यक्ष विनोद चंद्र दुबे, कृष्ण मूर्ति यादव, हेमंत सिंह टुन्नू, संजय तिवारी, भूपेंद्र सिंह यादव, ऋचा सिंह आदि मौजूद रहीं। इस मौके पर सुरक्षा एवं छात्र सलाहकार प्रोफेसर माता अंबर तिवारी, चुनाव अधिकारी प्रोफेसर आरके सिंह, डीएसडब्ल्यू प्रोफेसर आरकेपी सिंह, चीफ प्रॉक्टर, जिला और पुलिस प्रशासन के अफसर मौजूद रहे।
अध्यक्ष पद के प्रत्याशियों के बोल
‘विद्यार्थियों के मुद्दे पर हमेशा संघर्ष करता रहा हूं। यह लड़ाई तब तक जारी रहेगी जब तक विवि की सूरत बदल न जाए। लाइब्रेरी से किताबें, हॉस्टल, कैंटीन, महिला हास्टल में अस्पताल समेत कई मुद्दे हैं। सबसे जरूरी है शिक्षकों की भर्ती। जल्द से जल्द नियुुक्ति और इसमें पारदर्शिता के लिए विश्वविद्यालय प्रशासन पर लगातार दबाव बनाया जाएगा।’
अजीत यादव विधायक
‘धर्म, जाति, क्षेत्र नहीं मैं छात्रों की बात करूंगा। विवि की साख में गिरावट आई है। 2005 में विवि को केंद्रीय दर्जा मिला लेकिन सुविधाओं की जगह दलाली बढ़ गई। इसके लिए सभी लोग जिम्मेदार हैं। विवि प्रशासन तानाशाह हो गया है। मैं अध्यक्ष बना तो यह सब नहीं चलेगा।’
अमित कुमार सिंह विकास
‘मैं पढ़ाई के लिए आया था लेकिन पढ़ाई नहीं मिली तो लड़ाई में उतर गया। विद्यार्थियों की हक की लड़ाई में। इसीलिए अध्यक्ष पद के लिए आप लोगों के बीच में हूं। अध्यक्ष बना तो कैंटीन, हॉस्टल में मेस, लाइब्रेरी आदि की सुविधा बेहतर की जाएगी। पिछला सत्र दलाें की विचारधारा थोपने के लिए संघर्षों में चला गया। इस बार ऐसा न होने दीजिए।’
आनंद कुमार दुबे
‘विज्ञान संकाय में कैंटीन सबके एजेंडे में है लेकिन यह सिर्फ वोट मांगने के लिए। लगातार वादों के बावजूद कैंटीन शुरू नहीं हो पायी। विज्ञान संकाय से 18 वर्ष से कोई अध्यक्ष नहीं हुआ। भौतिकी में लैब की स्थिति ठीक नहीं है। ज्यादातर उपकरण काफी पुराने हैं।’
अनीस यादव
‘हॉस्टल में सुविधा बढ़ेगी। मेस शुरू होगा। हर परिसर में कैंटीन होगी। लाइब्रेरी में किताबें हैं लेकिन डिजिटलाइजेशन और कैटलॉग नहीं है। इसकी वजह से किताबें नहीं मिलतीं। मैं अध्यक्ष बना तो किताबों का डिजिटलाइजेशन होगा। डेलीगेसी में रूम रेंट कंट्रोल ऐक्ट कराने, चिकित्सीय सुविधा के लिए संघर्ष करूंगा। अध्यक्ष बना तो छात्राओं के लिए टोल फ्री नंबर होगा, जो 24 घंटे काम करेगा।’
अतुल नारायण सिंह
‘छात्राओं की सुरक्षा के लिए पूरे परिसर में सीसीटीवी कैमरा तथा अन्य इंतजाम के लिए संघर्ष करूंगा। डेलीगेसी में रहने वाले छात्रों की समस्या तथा उनके साथ मारपीट का मामला हो या विवि में लाइब्रेरी, अराजकता के मुद्दे पर मैंने हमेशा संघर्ष किया। आपने अध्यक्ष बनाया तो यह लड़ाई और मजबूत होगी।’
धीरेंद्र प्रताप यादव डीपी
‘विवि में छात्रों के लिए 75 फीसदी उपस्थिति अनिवार्य है। अन्यथा, परीक्षा में बैठने नहीं दिया जाएगा। मैं अध्यक्ष बना तो 85 फीसदी से कम कक्षाएं लेने वाले शिक्षकाें को वेतन भी नहीं लेने दूंगा। विगत वर्षों में दो छात्राओं ने आत्महत्या कर ली थी। काउंसलिंग सेंटर होता तो यह नहीं होता। काउंसलिंग सेंटर खुलेगा। विज्ञान संकाय में 15 दिनों में कैंटीन नहीं खुला तो मैं खुद चाय बनाने लगूंगा। मैं पांच दिन में पूरे परिसर को बदलने का वादा नहीं करता लेकिन परिवर्तन जरूर होगा।’
रोहित कुमार मिश्रा
‘छात्र हितों के लिए आइसा हमेशा संघर्ष करता रहा है। ऑनलाइन प्रवेश परीक्षा का मुद्दा भी हमने पहले उठाया। अन्य लोग बाद में आए। कैंटीन, प्रवेश में धांधली, लाइब्रेरी से किताबें कई मुद्दे हैं जिन्हें लेकर संघर्ष हमेशा जारी रहेगा। जाति, धर्म के नाम पर भेदभाव नहीं होने दिया जाएगा।’
सत्येंद्र सिंह
‘परिसर में पानी, कैंटीन नहीं है। कक्षाआें में पंखा खराब है। विद्यार्थी छोटी-छोटी सुविधाओं से महरूम हैं। मैं जीता तो ये समस्याएं दूर होंगी।’
शमून अहमद अंसारी
उपाध्यक्ष पद के प्रत्याशियों के बोल
‘मैंने लाइब्रेरी, हॉस्टल में मेस आदि सुविधाओं के लिए हमेशा संघर्ष किया है। जाति और धर्म नहीं छात्र के नाम पर वोट मांगने आया हूं।’
अदील हमजा
‘बदलाव के लिए आया हूं। इसके लिए हमेशा संघर्ष करता रहूंगा। परिसर का माहौल बिगड़ रहा है। पठन-पाठन के माहौल के लिए लड़ूूंगा। महिला छात्रावास में एंबुलेंस की सुविधा सुनिश्चित होगी।’
अश्वनी कुमार मौर्या
‘जेएनयू में भारत विरोधी मुर्दाबाद का नारा लगाने वाले वोट मांग रहे है। उन्हें पहचानिए। सलोरी में छात्रों की पिटाई होती है तो ये लोग कहां होते हैं। मैं हमेशा पीड़ित छात्रों के बीच रहा। लाइब्रेरी से किताबें निर्गत कराना, अंतरराष्ट्रीय खेल का आयोजन प्राथमिकता होगी।’
अवनीश कुमार राय
‘अराजकता के खिलाफ आइसा ने हमेशा आवाज बुलंद की है। विद्यार्थियों की हर छोटी-बड़ी समस्या में आइसा उनके साथ रहता है। पैनल जीता तो यह संघर्ष और मजबूत होगा। साथ में मांगें पूरी होंगी।’
सुभाष चंद्र कुशवाहा
‘भर्तियों में भ्रष्टाचार की वजह से युवाओं और छात्राओं का भविष्य अंधकार में है। इसके लिए प्रदेश सरकार जिम्मेदार है। विवि में अराजकता का माहौल है। सिविल सेवा में सफलता के गिरते ग्राफ के पीछे यह मुख्य वजह है। इन मुद्दों को लेकर संघर्ष करूंगा।’
सूरजभान सिंह
‘छात्राओं की सुरक्षा की बात हो रही है लेकिन सबसे अधिक डर तथाकथित छात्र नेताओं से ही होता है। परिसर में विचारधारा थोपने की कोशिश की गई। इस माहौल को बदलना होगा। मैं भीख नहीं उधार के तौर पर वोट मांग रहा हूं। ’
विश्वदीप शुक्ला