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उमेश पाल हत्याकांड : अतीक के करीबी अधिवक्ता पर एसटीएफ की पैनी नजर, कई करीबियों को करा चुका है सरेंडर

Sat, 18 Mar 2023 10:50 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Sat, 18 Mar 2023 10:50 PM IST
सार

उमेश पाल पर गोलियां बरसाने वाले शूटरों की तलाश में जुटी एसटीएफ के रडार पर माफिया अतीक अहमद का करीबी अधिवक्ता आ चुका है। एसटीएफ के अधिकारी अतीक के खिलाफ दर्ज मामलों में उसके करीबी अधिवक्ता की संलिप्तता के सुराग तलाश रहे हैं।

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Umesh Pal murder case: STF keeping a close watch on Atiq's close advocate, has surrendered many close ones
Prayagraj News : अतीक अहमद। फाइल फोटो - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

उमेश पाल पर गोलियां बरसाने वाले शूटरों की तलाश में जुटी एसटीएफ के रडार पर माफिया अतीक अहमद का करीबी अधिवक्ता आ चुका है। एसटीएफ के अधिकारी अतीक के खिलाफ दर्ज मामलों में उसके करीबी अधिवक्ता की संलिप्तता के सुराग तलाश रहे हैं। साथ ही बीते कुछ वर्षों में उसके द्वारा अर्जित की गई चल-अचल संपत्तियों का भी पता लगाया जा रहा है।

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सूत्रों की मानें तो अतीक के बेहद खास इस अधिवक्ता के जरिए ही गिरोह के कई सदस्यों को अदालत में सरेंडर कराया गया। हाल ही में अतीक के पुत्र अली को पुलिस की नजरों से बचाकर वकील के भेष में वाराणसी से प्रयागराज लाकर सरेंडर कराने वाली अधिवक्ताओं की टीम में वह भी शामिल था। दरअसल, प्रयागराज पुलिस और एसटीएफ के लिए यह अधिवक्ता बीते कुछ वर्षों से मुसीबत का सबब बना हुआ है।
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अतीक के खिलाफ दर्ज मामलों की सुनवाई के दौरान कानूनी दांव-पेंच अपनाकर लंबित रखने में उसे महारत हासिल है, जिसका सीधा फायदा अतीक और उसके गिरोह के सदस्यों को पहुंचता है। इसी वजह से अब एसटीएफ ने उसकी घेराबंदी करनी शुरू कर दी है। उसकी हर गतिविधि पर पैनी नजर रखी जा रही है।

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एसटीएफ को संदेह है कि वह उमेश पाल हत्याकांड में शामिल शूटरों खासकर अतीक के बेटे असद को सरेंडर कराने की कवायद में जुटा है। इसी वजह से एसटीएफ ने उसे अपने रडार पर ले रखा है।

जमीन के कारोबार में भी भूमिका

एसटीएफ के अधिकारियों की मानें बीते दो दशक में माफिया अतीक ने प्रयागराज और आसपास के इलाकों में अपनी दबंगई के बल पर हजारों करोड़ रुपये कीमत की संपत्तियों पर कब्जा किया अथवा अपने करीबियों के नाम पर सौदा कर लिया। इसका फायदा उसके करीबी अधिवक्ता को भी पहुंचा और वह बेहद कम समय में तमाम बेशकीमती संपत्तियों का मालिक बन गया।

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