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इलाहाबाद हाईकोर्ट : उम्रकैद की सजा पाए दो आरोपियों को हाईकोर्ट ने दी सात साल की कैद

Fri, 28 Apr 2023 10:37 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Fri, 28 Apr 2023 10:37 PM IST
सार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अभियोजन की ओर से एटा के 11 साल बच्चे के अपहरण के मामले में पिता द्वारा प्रस्तुत किया गया फिरौती मांगने वाला कथित पत्र न साबित कर पाने से आजीवन कारावास की सजा को बदल दिया।

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Two accused sentenced to life imprisonment were given seven years imprisonment by the High Court
इलाहाबाद हाईकोर्ट - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अभियोजन की ओर से एटा के 11 साल बच्चे के अपहरण के मामले में पिता द्वारा प्रस्तुत किया गया फिरौती मांगने वाला कथित पत्र न साबित कर पाने से आजीवन कारावास की सजा को बदल दिया। कोर्ट ने दोनों आरोपियों को बच्चे को छुपाकर और गलत तरीके से कैद करने का दोषी माना और उसके तहत सात साल की सजा सुनाई। यह आदेश मुख्य न्यायमूर्ति प्रीतिंकर दिवाकर और न्यायमूर्ति नलिन कुमार श्रीवास्तव की खंडपीठ ने इंद्रपाल सिंह व अन्य व श्रीपाल व अन्य की अलग-अलग याचिका को आंशिक रूप से स्वीकार करते हुए दिया है।

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कोर्ट ने मामले में सभी आरोपियों को सात-सात साल की कारावास और दो-दो हजार रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई। इंद्रपाल और श्रीपाल ने जेल में 14 वर्ष बिता दिए। लिहाजा, कोर्ट ने उन्हें तुरंत जेल से रिहा करने का आदेश दिया। जबकि, कल्लू और महात्मा की जमानत निरस्त करते हुए दोनों को बाकी सजा काटने के लिए संबंधित कोर्ट में आत्मसमर्पण करने के लिए कहा।

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मामले में अज्ञात बदमाश 21-22 नवंबर 1997 की रात एटा के सोरोन थाने में प्राथमिकी दर्ज कराने वाले (शिकायतकर्ता) के घर आए और उसके 11 वर्षीय बेटे को उठा ले गए। यह देखकर शिकायतकर्ता और उसकी पत्नी ने शोर मचाया। शोर सुनकर पड़ोसी जमा हो गए और बच्चे को छुड़ाने की कोशिश की तो आरोपी बंदूक से फायर कर उसे लेकर चले गए। आरोपी अवधेश (जिसकी विचारण के दौरान मृत्यु हो गई) द्वारा चलाई गई गोली से सह अभियुक्त जबर सिंह घायल हो गया। इसके बाद मामले में सात अभियुक्तों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज हुई।

जांच के दौरान शिकायतकर्ता ने फिरौती मांगने के संबंध में एक पत्र सौंपा। जिसमें अपह्त बच्चे को देने के एवज में 70 हजार रुपये की मांग की गई थी। बाद में पुलिस ने अपह्त बच्चे को बरामद कर लिया। जांच के बाद आरोपियों के नाम सामने आए। विशेष सत्र न्यायाधीश एटा ने आरोपियों को दोषी पाते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई। आरोपियों ने उसे हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। आरोपियों का तर्क था कि उनके नाम प्राथमिकी में नहीं हैं। बच्चे का अपहरण किसी फिरौती के लिए नहीं किया गया था, इसलिए अभियोजन पक्ष का मामला 364 ए के दायरे में नहीं आता है। कोर्ट ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद आरोपियों को आईपीसी की धारा 307 और 149 का दोषी पाते हुए सजा सुनाई।

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