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नई शिक्षा नीति पर पहले से काम कर रहा ट्रिपलआईटी
Sat, 01 Aug 2020 12:35 AM IST
विनोद सिंह
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
Published by: विनोद सिंह
Updated Sat, 01 Aug 2020 12:35 AM IST
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देश की नई शिक्षा नीति लागू होने से पहले ही ट्रिपल आईटी प्रयागराज इस नीति के कई बिंदुओं पर क्रियान्वयन शुरू कर चुका है। संस्थान के निदेशक प्रो. पी. नागभूषण के अनुसार संस्थान में वर्ष 2018 में ही छात्र-छात्राओं को सिर्फ डिग्री हासिल करने के बजाय उन्हें सीखने को बढ़ावा देने के लिए वर्ष पर्यंत मूल्यांकन की प्रक्रिया लागू की जा चुकी है, जिसके काफी अच्छे परिणाम रहे।
प्रो. नागभूषण ने नई शिक्षानीति को नवनिर्माण करने वाला एक ठोस कदम बताया है। उनके अनुसार ट्रिपल आईटी में वर्तमान में लागू सिस्टम के अनुसार छात्र अगर चार साल की पढ़ाई बीच में ही छोड़ना चाहता है उसे वर्ष के अनुसार प्रमाणपत्र, डिप्लोमा एवं डिग्री दी जा सकती है। संस्थान ने पुराने सिस्टम को बदलते हुए च्वायस एंड क्रेडिट लिंक कंटिन्यूअस असेसमेंट एंड अवार्ड अध्यादेश लागू किया है।
नई शिक्षा नीति के अनुसार अन्य मानविकी विषयों को भी संस्थान ने तीन साल पूर्व लागू कर दिया था। इसके तहत छात्र अपनी पसंद के अनुसार अन्य विषयों को एडऑन के रूप में चुन सकते हैं। जिसमें गांधीवाद, आध्यात्मिकता, संस्कृत, जर्मन, अंग्रेजी, योग, तैराकी, प्रबंधन एवं भौतिक विज्ञान के विभिन्न पहलुओं को शामिल किया गया है। अध्यादेश ड्रॉफ्टिंग कमेटी के पूर्व अध्यक्ष डॉ. नीतेश पुरोहित ने बताया कि अब एडऑन विषयों को नई शिक्षा नीति के तहत मान्यता मिली है। अब इसमें नए विषयों को शामिल किया जाए। अब इन्हें सीनेट की सहमति आसानी से मिल सकती है।
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प्रो. नागभूषण ने नई शिक्षानीति को नवनिर्माण करने वाला एक ठोस कदम बताया है। उनके अनुसार ट्रिपल आईटी में वर्तमान में लागू सिस्टम के अनुसार छात्र अगर चार साल की पढ़ाई बीच में ही छोड़ना चाहता है उसे वर्ष के अनुसार प्रमाणपत्र, डिप्लोमा एवं डिग्री दी जा सकती है। संस्थान ने पुराने सिस्टम को बदलते हुए च्वायस एंड क्रेडिट लिंक कंटिन्यूअस असेसमेंट एंड अवार्ड अध्यादेश लागू किया है।
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नई शिक्षा नीति के अनुसार अन्य मानविकी विषयों को भी संस्थान ने तीन साल पूर्व लागू कर दिया था। इसके तहत छात्र अपनी पसंद के अनुसार अन्य विषयों को एडऑन के रूप में चुन सकते हैं। जिसमें गांधीवाद, आध्यात्मिकता, संस्कृत, जर्मन, अंग्रेजी, योग, तैराकी, प्रबंधन एवं भौतिक विज्ञान के विभिन्न पहलुओं को शामिल किया गया है। अध्यादेश ड्रॉफ्टिंग कमेटी के पूर्व अध्यक्ष डॉ. नीतेश पुरोहित ने बताया कि अब एडऑन विषयों को नई शिक्षा नीति के तहत मान्यता मिली है। अब इसमें नए विषयों को शामिल किया जाए। अब इन्हें सीनेट की सहमति आसानी से मिल सकती है।
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