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Prayagraj : नाबालिग से दुष्कर्म में दोषी को 21 साल की कठोर कारावास, ट्रायल कोर्ट ने सुनाई सजा

Thu, 09 Apr 2026 07:18 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Thu, 09 Apr 2026 07:18 PM IST
सार

जिला अदालत ने नाबालिग से दुष्कर्म में दोषी को 21 साल की कठोर कारावास की सजा सुनाई है। साथ ही अदालत ने 32 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया।

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Trial court sentences man to 21 years rigorous imprisonment for raping minor
कोर्ट का फैसला - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

जिला अदालत ने नाबालिग से दुष्कर्म में दोषी को 21 साल की कठोर कारावास की सजा सुनाई है। साथ ही अदालत ने 32 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया। यह आदेश अपर सत्र न्यायाधीश/विशेष न्यायाधीश (पाॅक्सो एक्ट) विनोद कुमार चौरसिया ने लोक अभियोजक विनय कुमार त्रिपाठी को सुनकर दिया। बिहार के भभुआ थाना क्षेत्र अंतर्गत पतेसर गांव निवासी सरफराज खां के खिलाफ धूमनगंज थाने में दुष्कर्म, अपहरण और पॉक्सो एक्ट समेत गंभीर धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज हुआ था।

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अभियोजन के अनुसार पीड़िता घटना के समय 17 वर्ष की नाबालिग थी। आरोपी सरफराज खां ने उसे बहला-फुसलाकर अपने साथ ले गया और उसके साथ दुष्कर्म किया। मामले में पीड़िता के बयान, स्कूल के अभिलेखों और अन्य साक्ष्यों से उसे नाबालिग माना गया। पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर जांच के बाद आरोप पत्र न्यायालय में प्रस्तुत किया। बचाव पक्ष के अधिवक्ता ने दलील दी कि पीड़िता बालिग थी और उसके परिवार वालों ने रंजिशन झूठा मुकदमा दर्ज कराया है। साथ ही आरोपी के अच्छे चरित्र, कम उम्र और प्रथम अपराध होने का हवाला देते हुए न्यूनतम सजा की मांग की।

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वहीं, शासकीय अधिवक्ता ने दलील दी कि आरोपी ने नाबालिग के साथ गंभीर और जघन्य अपराध किया है। जो समाज और पीड़िता दोनों के खिलाफ है। ऐसे मामलों में कठोरतम दंड दिया जाना आवश्यक है ताकि समाज में निवारक प्रभाव पड़े। अदालत ने सरफराज खां को दोषी मानते हुए पॉक्सो एक्ट के तहत 21 साल की कठोर कारावास और 15 हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई।

साथ ही विवाह के लिए मजबूर करने के आरोप में सात साल की कठोर कारावास और 10 हजार रुपये जुर्माना लगाया। अपहरण के आरोप में पांच साल की कठोर कारावास और सात हजार रुपये का जुर्माना लगाया। सभी सजाएं साथ-साथ चलेंगी। अदालत ने आदेश दिया कि अर्थदंड की राशि में से 10 हजार रुपये पीड़िता को प्रतिकर के रूप में दिए जाएंगे। साथ ही विचारण के दौरान आरोपी की ओर से जेल में बिताई गई अवधि को सजा में समायोजित करने का निर्देश दिया ।

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