SRN Hospital : दिमाग की पिट्यूटरी ग्रंथी के ट्यूमर का एसआरएन में दूरबीन विधि से शुरू हुआ इलाज
पिट्यूटरी ग्रंथी मस्तिष्क के मध्य में स्थित होती है। जो शरीर के हार्मोंस को नियंत्रित करने का काम करती है। कभी-कभी इस ग्रंथी में गांठ (ट्यूमर) हो जाता है। जिसे पिट्यूटरी एडिनोमा कहते हैं। यह एक दुर्लभ बीमारी है, जो अधिकतर महिलाओं देखने को मिलती है।
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मस्तिष्क की पिट्यूटरी ग्रंथी के ट्यूमर की जटिल सर्जरी अब स्वरूप रानी नेहरू चिकित्सालय में दूरबीन विधि (लेप्रोस्कोपी सर्जरी) द्वारा शुरू हो गई है। हाल में एक 22 वर्षीय युवती की सफल सर्जरी की गई है। वहीं सर्जरी के 24 घंटे बाद महिला को बेहतर महसूस होने लगा। इस सर्जरी के दौरान न्यूरो ईएनटी टीम ने नाक में नली डालकर महिला के पिट्यूटरी ग्रंथी में मौजूद ट्यूमर को समाप्त किया। यह सर्जरी तीन घंटे तक चली। इससे पहले मस्तिष्क में चीड़-फाड़ करके ट्यूमर को निकाला जाता था। जिसमें ज्यादा खतरा रहता था।
दरअसल पिट्यूटरी ग्रंथी मस्तिष्क के मध्य में स्थित होती है। जो शरीर के हार्मोंस को नियंत्रित करने का काम करती है। कभी-कभी इस ग्रंथी में गांठ (ट्यूमर) हो जाता है। जिसे पिट्यूटरी एडिनोमा कहते हैं। यह एक दुर्लभ बीमारी है, जो अधिकतर महिलाओं देखने को मिलती है। पिछले महीने एक 22 वर्षीय युवती सिर दर्द की समस्या की शिकायत लेकर एसआरएन अस्पताल के पीएमएसएसवाई स्थित न्यूरो ईएनटी विभाग पहुंची।
जहां चिकित्सकों द्वारा युवती का एमआरआई कराया तो पिट्यूटरी ग्रंथी में ट्यूमर की बीमारी निकली। जिसके बाद चिकित्सकों ने युवती की दूरबीन विधि से सर्जरी करने का निर्णय लिया। न्यूरो ईएनटी सर्जरी विभागाध्यक्ष प्रोफेसर सचिन जैन, सह आचार्य डॉ. पंकज गुप्ता, एनेस्थटिस डॉ. धर्मेंद्र यादव की टीम ने दूरबीन विधि से नाक के रास्ते नली को मस्तिष्क में ट्यूमर तक पहुंचाया और उसे निकालने में सफलता प्राप्त की। इस सफल सर्जरी के बाद मोती लाल नेहरू मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. एसपी सिंह ने न्यूरो ईएनटी टीम को बधाई दी।
हजारों में किसी एक को होती है पिट्यूटरी एडिनोमा की बीमारी
यह एक दुर्लभ बीमारी है। जो हजारों में किसी एक को होती है। सबसे अधिक महिलाओं में होने की संभावना होती है। इसका ऑपरेशन जटिल होता है। जिसमें मरीज की जान का भी खतरा होता है। वहीं कई मरीजों के सर पर चीड़-फाड़ के बाद दाग रह जाता है।
क्या है लक्षण
1-सिर में दर्द
2-आंखों से कम दिखाई पड़ना
3-छाती से दूध का स्राव
4-चेहरे का मोटापन या भद्दापन
5- माहवारी में अनियमित्ता
दूरबीन विधि से सर्जरी होने के कारण समय कम लगता है और मरीज को किसी प्रकार का खतरा नहीं होता है। वहीं दाग लगने का खतरा भी नहीं होता है। मरीज 24 घंटे में ही रिकवर हो जाता है। - डॉ.सचिन जैन, विभागाध्यक्ष, न्यूरो ईएनटी विभाग।
न्यूरो ईएनटी की टीम को इस सफल सर्जरी के लिए मेरी तरफ से ढेर सारी शुभकामनाएं। इस प्रकार उपलब्धियां चिकित्सा क्षेत्र में मरीजों को बेहतर व सुरक्षित इलाज उपलब्ध कराती हैं। - डॉ. एसपी सिंह, प्राचार्य, मोती लाल नेहरू मेडिकल कॉलेज।