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लेनदेन का विवाद दीवानी मामला, आपराधिक रंग दे अदालत को न बनाएं वसूली का जरिया : कोर्ट

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Thu, 28 May 2026 02:36 AM IST
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Transaction Disputes Are Civil Matters; Do Not Give Them a Criminal Hue, Nor Turn the Court into a Means of Recovery: Court
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने रियल एस्टेट से जुड़े लेनदेन के विवाद में एफआईआर रद्द कर दी। कहा कि जमीन-जायदाद की खरीद-फरोख्त का मामला पूरी तरह सिविल (दीवानी) है। पक्षकार विवाद को आपराधिक रंग देकर अदालत को वसूली का जरिया न बनाया जाए। यह कानूनी प्रक्रिया का दुरुपयोग है।
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यह फैसला न्यायमूर्ति चंद्रधारी सिंह, न्यायमूर्ति देवेंद्र सिंह प्रथम की खंडपीठ ने गौतमबुद्ध नगर से जुड़े अर्जुनप्रीत सिंह साहनी, मेसर्स प्रसादी इन्फोटेक पार्क प्राइवेट लिमिटेड और हरजीत सिंह साहनी की ओर से दाखिल याचिका स्वीकार करते हुए सुनाया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि इस तरह के विवादों के निपटारे के लिए रेरा और मध्यस्थता जैसे विधिक मंच मौजूद हैं। पीड़ित अपनी शिकायत के साथ रेरा या मध्यस्थता की ओर रुख कर सकता है।
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मामला गौतमबुद्ध नगर के नॉलेज पार्क थाना क्षेत्र का है। याचियों के खिलाफ शिकायतकर्ता डॉ. गुरप्रीत सिंह ने एफआईआर दर्ज कराई थी। आरोप लगाया कि 2008 में उसने तीन दुकानें बुक कराई थीं। इनका कब्जा उन्हें मिलने के बाद तय मासिक रिटर्न नहीं मिलने पर इसके एवज में बिल्डर ने चौथी दुकान देने का वादा किया था। लेकिन, उसे तय रिटर्न भी नहीं मिला और चौथी दुकान के स्थान पर आम रास्ता निकल गया। इस कारण शिकायतकर्ता ने याचियों के खिलाफ धोखाधड़ी और जालसाजी का मामला दर्ज कराया।
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इसे चुनौती देते हुए याचियों ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया। याचियों की ओर से दलील दी गई कि मामला व्यावसायिक लेनदेन से जुड़ा दीवानी विवाद है। इसे जानबूझकर फौजदारी मामला बनाया गया है, ताकि शिकायतकर्ता याचियों से वसूली कर सके।
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व्यावसायिक लेनदेन में जब तक शुरुआती समय से ही धोखाधड़ी की नीयत साबित नहीं होती, तब तक हर व्यावसायिक विफलता को अपराध नहीं माना जा सकता।
-इलाहाबाद हाईकोर्ट
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