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पूर्व मंत्री नंदी के करीबी व्यापारी ने दी जान 

Wed, 19 Oct 2016 02:02 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद Updated Wed, 19 Oct 2016 02:02 AM IST
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Traders said a close aide of former Minister Nandi life
allahabad
इलाहाबाद। पूर्व मंत्री नंद गोपाल गुप्ता नंदी के करीबी व्यापारी रितेश गुप्ता (42) पुत्र लल्लू लाल गुप्ता उर्फ सौरभ ने मंगलवार सुबह कीडगंज स्थित अपने घर में फांसी लगा ली। दरवाजा बंद होने की वजह से नौकर ने खिड़की से झांका तो रितेश को फंदे पर लटके देख शोर मचाया। रितेश को फौरन निजी अस्पताल ले जाया गया लेकिन उसकी मौत हो चुकी थी। खुदकुशी का कारण साफ नहीं हो सका है। 
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नई बस्ती कीडगंज में रहने वाले रिटायर बैंक कर्मचारी लल्लू लाल गुप्ता उर्फ सौरभ पूर्व मंत्री नंद गोपाल गुप्ता नंदी के मीडिया प्रभारी हैं। वह पथरचट्टी रामलीला कमेटी के भी पदाधिकारी हैं। उनके दो बेटों में छोटे रितेश गुप्ता ने सिविल लाइंस स्थित इंदिरा भवन में कंप्यूटर पार्ट्स की दुकान खोल रखी थी। वह मंगलवार सुबह अपने दोनों बेटों को सेंट जोसेफ स्कूल छोड़कर घर लौटे और नाश्ता करने के बाद नीचे कमरे में आ गए। इसके बाद रितेश ने कमरे का दरवाजा बंद कर लिया। करीब साढ़े दस बजे घरेलू नौकर आया तो रितेश के कमरे दरवाजा बंद देख खटखटाया मगर कोई जवाब नहीं मिला। उसने खिड़की से झांका तो सन्न रह गया। रितेश पंखे के रॉड में बंधी लोहे की जंजीर से फांसी पर लटके थे। उस जंजीर के जरिए रात में वह घर के बाहर अपनी बाइक को लॉक करते थे। धक्का देकर दरवाजा खोलने के बाद रितेश को फंदे से उताकरकर निजी चिकित्सालय ले जाया गया लेकिन उनकी मौत हो चुकी थी। खबर पाकर कीडगंज थाने की पुलिस भी अस्पताल पहुंची। पुलिस ने शव का पोस्टमार्टम कराया। मेयर अभिलाषा गुप्ता और कई पार्षद समेत तमाम करीबी तथा व्यापारी भी पोस्टमार्टम हाउस पहुंच गए। परिजन खुदकुशी की वजह नहीं बता सके। थानाध्यक्ष कीडगंज उदयवीर सिंह ने भी परिवार के लोगों से बातचीत के बाद बताया कि कारण साफ नहीं हो सका है। रितेश के इस कदम से रिश्तेदार और करीबी भी सकते में हैं। 
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दोनों बेटे पूछते रहे, क्या हुआ पापा को
इलाहाबाद। कारोबारी रितेश गुप्ता का भरा पूरा परिवार था। कारोबार भी ठीक-ठाक चल रहा था। रितेश के दो बेटे नयन (10) और ईशांत (6) सेंट जोसेफ स्कूल में पढ़ते हैं। दोपहर में दोनों बेटों को स्कूल से लाया गया तो घर में भीड़ और मां आंचल तथा दादी रुणेश को रोते-बिलखते देख वे परेशान हो गए। मासूम बेटे नहीं समझ पा रहे थे कि आखिर हुआ क्या? वे मां से पूछ रहे थे कि पापा कहां गए, वे स्कूल में हमें लेने क्यों नहीं आए? रिश्तेदार दोनों बेटों को संभालने में जुटे रहे। रितेश के बड़े भाई राजीव और पिता लल्लू लाल गुप्ता गम में डूबे थे। उन्हें रिश्तेदार दिलासा देते रहे।
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