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‘वुड आर्ट’ की खूबसूरती देखनी हो तो दरभंगा आएं
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
Updated Fri, 12 Oct 2018 01:57 AM IST
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इलाहाबाद
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
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दरभंगा कॉलोनी की दुर्गा पूजा इस बार फिर अलग और अनूठी होगी। विविधता और कलात्मकता के संगम के साथ पूजा पंडाल में पहली बार ‘वुड आर्ट’ का शानदार काम दिखेगा। मुख्य रूप से सागौन की लकड़ी से तैयार होने वाले पूजा पंडाल को दक्षिण भारतीय मंदिर शैली में सजाया जा रहा है। प्रकृति संरक्षण के सिद्धांत का पालन करते हुए लकड़ी के अनुपयोगी टुकड़ों का भी खूबसूरती से इस्तेमाल किया गया है।
पूजा पंडाल की परिकल्पना मार्च में ही की गई थी, जिस पर पश्चिम बंगाल के नवद्वीप शहर के पचास शिल्पकारों की टीम ने अप्रैल से ही काम करना आरंभ कर दिया था। ज्यादातर काम नवद्वीप में ही पूरा कर लिया गया था लेकिन टुकड़ों को जोड़ने और उसे फिनिश करके फाइनल रूप देना उससे ज्यादा महत्वपूर्ण था। बीते डेढ़ महीने से दो दर्जन कलाकारों अब उसे अंतिम रूप दे दिया है। वाह्य सज्जा के साथ ही आंतरिक सज्जा भी उतनी ही आकर्षक दिखेगी। देवी की तकरीबन अठारह फीट की प्रतिमा बुलेन के साज में आकर्षक रूप में सजेगी।
दुर्गा पूजा की शुरुआत 14 अक्तूबर को पंचमी पर आनंद मेले से होगी। कमेटी के महामंत्री देवव्रत बसु कहते हैं, सांस्कृतिक केंद्र के कलाकार षष्ठी को भजन संध्या प्रस्तुत करेंगे। कोलकाता के गोपाल भट्टाचार्या के निर्देशन में सप्तमी को भारतीय लोकनृत्यों की मोहक प्रस्तुतियां होंगी।
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दरभंगा के लोगों को पूजा के लिए दूर जाना पड़ता था तो यूआर चंदा, तुलसी नारायण, रवि मलिक आदि ने मिलकर शिव-हनुमान मंदिर की वेदी पर ही वर्ष 1958 में पूजा आरंभ की। सिल्वर जुबिली के ठीक पहले तक पूजा वहीं होती रही लेकिन वर्ष 1981 में पूजा मंदिर के सामने यानी मौजूदा जगह पर आ गई। अबकी पूजा का 61वां वर्ष है।
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पूजा पंडाल की परिकल्पना मार्च में ही की गई थी, जिस पर पश्चिम बंगाल के नवद्वीप शहर के पचास शिल्पकारों की टीम ने अप्रैल से ही काम करना आरंभ कर दिया था। ज्यादातर काम नवद्वीप में ही पूरा कर लिया गया था लेकिन टुकड़ों को जोड़ने और उसे फिनिश करके फाइनल रूप देना उससे ज्यादा महत्वपूर्ण था। बीते डेढ़ महीने से दो दर्जन कलाकारों अब उसे अंतिम रूप दे दिया है। वाह्य सज्जा के साथ ही आंतरिक सज्जा भी उतनी ही आकर्षक दिखेगी। देवी की तकरीबन अठारह फीट की प्रतिमा बुलेन के साज में आकर्षक रूप में सजेगी।
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दुर्गा पूजा की शुरुआत 14 अक्तूबर को पंचमी पर आनंद मेले से होगी। कमेटी के महामंत्री देवव्रत बसु कहते हैं, सांस्कृतिक केंद्र के कलाकार षष्ठी को भजन संध्या प्रस्तुत करेंगे। कोलकाता के गोपाल भट्टाचार्या के निर्देशन में सप्तमी को भारतीय लोकनृत्यों की मोहक प्रस्तुतियां होंगी।
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दरभंगा के लोगों को पूजा के लिए दूर जाना पड़ता था तो यूआर चंदा, तुलसी नारायण, रवि मलिक आदि ने मिलकर शिव-हनुमान मंदिर की वेदी पर ही वर्ष 1958 में पूजा आरंभ की। सिल्वर जुबिली के ठीक पहले तक पूजा वहीं होती रही लेकिन वर्ष 1981 में पूजा मंदिर के सामने यानी मौजूदा जगह पर आ गई। अबकी पूजा का 61वां वर्ष है।