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हाईकोर्ट ने कहा : अर्थदंड से बचने के लिए जांच के समय प्रपत्र न होने का उचित कारण जरूरी

Sun, 03 Mar 2024 02:29 PM IST
विनोद सिंह अमर उजला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Sun, 03 Mar 2024 02:29 PM IST
सार

न्यायमूर्ति शेखर बी सराफ की कोर्ट ने कहा, याचिकाकर्ता ने कानून के प्रावधानों का पालन नहीं किया। ऐसे में अदालत ने किसी हस्तक्षेप की आवश्यकता न मानते हुए याचिका खारिज कर दी। याची की ओर से अधिवक्ता शुभम अग्रवाल व उप्र सरकार की ओर से अपर मुख्य स्थायी अधिवक्ता रवि शंकर पांडेय ने पक्ष रखा।

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To avoid fine, proper reason is necessary for not having the form at the time of investigation.
(सांकेतिक तस्वीर) - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

इलाहाबाद हाईकोर्ट में मेसर्स झांसी इंटरप्राइजेज की ओर से दाखिल याचिका के मामले में कहा है कि रोक के बाद दस्तावेज देर से प्रस्तुत करना, कर चोरी का इरादा न होने के लिए वैध आधार नहीं हो सकता। परिवहन शुरू करने के पूर्व ई वे बिल जेनरेट न करने को उचित ठहराने के लिए कई युक्तियुक्त आधार होने चाहिए।

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न्यायमूर्ति शेखर बी सराफ की कोर्ट ने कहा, याचिकाकर्ता ने कानून के प्रावधानों का पालन नहीं किया। ऐसे में अदालत ने किसी हस्तक्षेप की आवश्यकता न मानते हुए याचिका खारिज कर दी। याची की ओर से अधिवक्ता शुभम अग्रवाल व उप्र सरकार की ओर से अपर मुख्य स्थायी अधिवक्ता रवि शंकर पांडेय ने पक्ष रखा।
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मामले के तहत याची की ओर से उस पर लगाए गए कर और जुर्माने की राशि को वापस करने और एडिशनल कमिश्नर ग्रेड 2 (अपील) की ओर से पारित आदेश को रद्द करने के लिए प्रार्थना की गई थी। याचिकाकर्ता मेसर्स झांसी इंटरप्राइजेज एक पंजीकृत डीलर है।

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10 मार्च 2019 को याचिकाकर्ता ने मेसर्स सहाय एंड संस उरई को टीएमटी बार्स (सरिया) की एक खेप बेची थी। इसी दिन दोपहर में गल्ला मंडी, उरई में वाणिज्य कर विभाग के मोबाइल दस्ते ने वाहन को रोककर जांच का आदेश दिया।

इस दौरान काफी देर बाद ई-वे बिल व इनवॉइस प्रस्तुत किया गया। ऐसे में अधिकारियों ने 14 मार्च 2019 को कर और जुर्माने का आदेश पारित किया। याचिकाकर्ता ने कर और जुर्माने के रूप में 3,97,224 रुपये की राशि जमा की और एडिशनल कमिश्नर वाणिज्य कर, झांसी के यहां अपील दायर की लेकिन राहत न मिलने पर याची ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया।

कोर्ट ने कहा, याचिकाकर्ता चालान और ई-वे बिल की अनुपस्थिति का उचित कारण स्पष्टीकरण के साथ नहीं बता सका, इसलिए वह कर चोरी की धारणा का खंडन करने में सक्षम नहीं है। कोर्ट ने अधिकारियों की ओर से उठाए गए कदम को उचित और कानून के अनुसार सही मानते हुए हस्तक्षेप से इन्कार कर दिया। साथ ही याचिका खारिज कर दी।

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