Prayagraj : पहचान बताने में फेल अंगूठे व अंगुली के निशान, रजिस्ट्री कराने वाले परेशान
म्योराबाद गणेश नगर निवासी 80 वर्षीय आशा धवल जमीन ट्रांसफर कराने के लिए निबंधन कार्यालय गई थीं, लेकिन हाथ की लकीरें धुंधली पड़ने से उनका बायोमीट्रिक सत्यापन नहीं हो सका।
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म्योराबाद गणेश नगर निवासी 80 वर्षीय आशा धवल जमीन ट्रांसफर कराने के लिए निबंधन कार्यालय गई थीं, लेकिन हाथ की लकीरें धुंधली पड़ने से उनका बायोमीट्रिक सत्यापन नहीं हो सका। पूरा दिन रजिस्ट्री ऑफिस में बीत गया। अफसर भी बार-बार प्रयास करते रहे कि किसी तरह सत्यापन हो जाए पर थक-हारकर उन्हें खाली हाथ लौटना पड़ा।
यह तो एक उदाहरण है, रजिस्ट्री ऑफिस में इन दिनों ज्यादातर लोगों को इसी तरह की समस्या का सामना करना पड़ रहा है। रजिस्ट्री के लिए आधार कार्ड का बायोमीट्रिक सत्यापन अनिवार्य होने से संपत्तियों का बैनामा अटक गया है। रजिस्ट्री की संख्या घटने के साथ राजस्व भी आधा हो गया है। उपनिबंधक कार्यालयों में रजिस्ट्री के लिए लंबी लाइन लग रही है। बड़ी संख्या में लोगों को खाली हाथ लौटना पड़ रहा है।
रजिस्ट्री के दौरान बायोमीट्रिक सत्यापन में क्रेता, विक्रेता और कम से कम दो गवाहों के अंगूठे व अंगुलियों के निशान की स्कैनिंग होनी है। वरिष्ठ नागरिकों के साथ बायोमीट्रिक सत्यापन में ज्यादा दिक्कत आ रही है। कई ऐसे लोग हैं, जिनके हाथ के किसी भी अंगूठे या अंगुली के निशान स्कैन नहीं हो पा रहे हैं। ऐसे में उन्हें बिना रजिस्ट्री कराए खाली हाथ लौटना पड़ रहा है।
यह व्यवस्था एक फरवरी से प्रभावी है पर उस दिन रविवार का साप्ताहिक अवकाश था। दो फरवरी से निबंधन कार्यालय खुला तो समस्या सामने आई। कई वरिष्ठ नागरिक बिना रजिस्ट्री कराए लौट गए। अगले दिन दोबारा पहुंचे पर सफलता नहीं मिली। ऐसे में रजिस्ट्री की संख्या अचानक घट गई है पर निबंधन कार्यालयों में भीड़ भी बढ़ती जा रही है।
रजिस्ट्री के अलावा बंधक, वसीयत, स्टाम्प के क्रय-विक्रय सहित अन्य प्रक्रियाओं में भी संबंधित पक्षकाराें का आधार कार्ड से बायोमीट्रिक सत्यापन किया जाना है। वसीयत के लिए पहुंच रहे ज्यादातर वरिष्ठ नागरिकों को हताश होकर लौटना पड़ रहा है। उनका कहना है कि अगर अंगूठे व अंगुली के निशान सत्यापित नहीं हो पा रहे हैं तो आइरिस (आंखों की पुतली) स्कैनिंग के लिए मशीन की व्यवस्था की जाए या फेस आईडी को भी मान्य किया जाए।
वरिष्ठ नागरिकों के बायोमीट्रिक सत्यापन में थोड़ी दिक्कत आ रही है। समस्या के समाधान पर विचार किया जा रहा है। जल्द ही कोई रास्ता निकाल लिया जाएगा।
-राकेश चंद्ना, एआईजी स्टाम्प
औसतन 400 बैनामे होते थे और अब ढाई सौ
आधार के बायोमीट्रिक सत्यापन की व्यवस्था लागू होने से पहले जिले में प्रतिदिन औसतन 400 बैनामे होते थे, लेकिन अब इनकी संख्या ढाई सौ के आसपास सीमित हो गई है। हालांकि, दो फरवरी से बायोमीट्रिक सत्यापन के तहत रजिस्ट्री की व्यवस्था लागू होने के बाद तीन दिनों में सुधार देखने को मिला है। पहले दिन हालत बहुत ही खराब थी। दो फरवरी को 160 बैनामों से एक करोड़ 37 लाख 22 हजार 290 रुपये की राजस्व प्राप्ति हुई थी। तीन फरवरी को 259 बैनामों से एक करोड़ 76 लाख 58 हजार 210 रुपये की आय हुई और चार फरवरी को बैनामों की संख्या बढ़कर 266 हो गई जिनसे दो करोड़ 36 लाख 10 हजार 280 रुपये की आय हुई।
तहसीलवार बैनामों का विवरण
तहसील - बैनामों की संख्या (दो फरवरी) - तीन फरवरी - चार फरवरी
सदर 1 - 25 - 30 - 24
सदर 2 - 36 -36 - 31
फूलपुर - 18 - 31 - 35
सोरांव - 00 (हड़ताल थी) - 32 - 36
करछना - 28 - 53 - 69
हंडिया - 11 -14 - 18
बारा - 16 -21 - 25
कोरांव - 09 - 20 - 15
मेजा - 17 - 22 - 13